Friday, September 25, 2026
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Shop On Airport: ड्यूटी-फ्री दुकानों को केवल सीमा शुल्क और करों से छूट प्राप्त है..,भारतीय सीमा में प्रवेश करते ही वस्तु ‘आयात’ बन जाती है; यह केस जानें

अदालत के मुख्य निर्णय और कानूनी सिद्धांत

  1. राजस्व छूट बनाम विनियामक कानून: अदालत ने कहा कि ड्यूटी-फ्री दुकानों को केवल वित्तीय करों (जैसे कस्टम ड्यूटी, टैक्स, वैट आदि) से छूट मिलती है। यदि कोई वस्तु किसी कानून के तहत प्रतिबंधित या विनियमित है, तो वह सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 की धारा 2(33) के तहत “प्रतिबंधित सामान” (Prohibited Goods) मानी जाएगी और उस पर देश के विनियामक कानून पूरी तरह लागू होंगे।
  2. ‘आयात’ (Import) की कानूनी परिभाषा: रिटेलर्स का तर्क था कि ये उत्पाद अंतर्राष्ट्रीय डिपार्चर लाउंज से विदेश जाने वाले यात्रियों के लिए हैं, इसलिए यह पुनः-निर्यात (Re-export) का मामला है। कोर्ट ने इस तर्क को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि जैसे ही कोई सामान भारत की समुद्री या सीमा क्षेत्र में प्रवेश करता है, उसका ‘आयात’ पूरा हो जाता है। इसलिए यह कानून घरेलू क्षेत्र की तरह ही लागू होगा।

निकोटीन पाउच ‘दवा/ड्रग’ हैं या नहीं? CDSCO करेगा फैसला

  • तकनीकी जांच का मामला: अदालत ने यह तय करने से परहेज किया कि तंबाकू-मुक्त निकोटीन पाउच ‘औषधि और प्रसाधन सामग्री अधिनियम’ के तहत ‘ड्रग’ (Drug) की परिभाषा में आते हैं या नहीं। कोर्ट ने कहा कि उसके पास ऐसे वैज्ञानिक तथ्यों की जांच करने की विशेषज्ञता नहीं है।
  • रिटेलर्स को निर्देश: कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को 4 सप्ताह के भीतर CDSCO के समक्ष उत्पाद की सटीक संरचना और विवरण के साथ अपना अभ्यावेदन प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
  • 30 दिनों में आदेश: CDSCO को निर्देश दिया गया है कि वह अभ्यावेदन मिलने के 30 दिनों के भीतर एक तर्कसंगत और विस्तृत आदेश (Reasoned Order) जारी करे।

मुंबई: बॉम्बे हाईकोर्ट ने अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों के डिपार्चर टर्मिनल्स पर संचालित होने वाली शुल्क-मुक्त दुकानों (Duty-Free Shops – DFS) की कानूनी स्थिति, सीमा शुल्क अधिनियम (Customs Act, 1962), और औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 (Drugs and Cosmetics Act, 1940) के घरेलू क्षेत्राधिकार के विस्तार पर एक अत्यंत महत्वपूर्ण विधिक निर्णय सुनाया है।

अडाणी समूह के समर्थन वाली कंपनी मुंबई ट्रैवल रिटेल लिमिटेड का मामला

न्यायमूर्ति सुमन श्याम और न्यायमूर्ति अद्वैत एम. सेठना की खंडपीठ ने अडाणी समूह के समर्थन वाली कंपनी मुंबई ट्रैवल रिटेल लिमिटेड (Mumbai Travel Retail Ltd) और फ्लेमिंगो ड्यूटीफ्री शॉप प्राइवेट लिमिटेड द्वारा दायर याचिका पर हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। हालांकि, अदालत ने इस तथ्यात्मक प्रश्न पर कोई राय व्यक्त करने से परहेज किया कि क्या ‘तंबाकू-मुक्त निकोटीन पाउच’ (Tobacco-free Nicotine Pouches) वास्तव में औषधि कानून के तहत ‘दवा’ (Drug) की श्रेणी में आते हैं, और इसके तकनीकी निर्धारण के लिए केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) को 30 दिनों के भीतर एक तर्कसंगत आदेश पारित करने का निर्देश दिया। अदालत ने स्पष्ट रूप से व्यवस्था दी है कि ड्यूटी-फ्री दुकानों को केवल सीमा शुल्क (Customs Duty) और अप्रत्यक्ष करों जैसे वित्तीय भारों (Fiscal Levies) से छूट हो सकती है, लेकिन उन्हें औषधि कानून और जनस्वास्थ्य से जुड़े घरेलू विनियामक तंत्र (Non-fiscal Regulatory Regime) से कोई पूर्ण कानूनी उन्मुक्ति (Blanket Immunity) प्राप्त नहीं है।

उच्च न्यायालय के प्रमुख विधिक निष्कर्ष एवं सिद्धांत

1. ‘वित्तीय छूट बनाम विनियामक दायित्व’: खंडपीठ ड्यूटी-फ्री दुकानों द्वारा ‘घरेलू कानूनों से अप्रभावित क्षेत्र’ (Extraterritoriality) का दावा खारिज करते हुए न्यायमूर्ति सुमन श्याम और न्यायमूर्ति अद्वैत एम. सेठना की पीठ ने व्यवस्था दी: “यदि कोई छूट प्राप्त भी है, तो वह केवल सीमा शुल्क, कर या स्थानीय वैट (MVAT) जैसे वित्तीय उपायों तक ही सीमित होगी। यदि कोई वस्तु ‘तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य कानून’ के तहत प्रतिबंधित या विनियमित है, तो वह सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 की धारा 2(33) के तहत ‘प्रतिबंधित माल’ (Prohibited Goods) का गठन करेगी, और परिणामस्वरूप उस पर घरेलू विनियामक ढांचा पूरी ताकत से लागू होगा।”

2. भारतीय क्षेत्रीय जलसीमा में प्रवेश ही ‘आयात’ (Import) है

  • याचिकाकर्ताओं ने दलील दी थी कि चूंकि ये उत्पाद अंतरराष्ट्रीय प्रस्थान लाउंज (International Departure Terminal) में केवल विदेश जाने वाले यात्रियों को बेचे जा रहे थे, इसलिए यह तकनीकी रूप से घरेलू उपभोग का मामला नहीं बल्कि ‘पुनर्निर्यात’ (Re-export) है।
  • अदालत ने इस तर्क को सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि जैसे ही कोई वस्तु भारतीय क्षेत्रीय जलसीमा (Territorial Waters) या भारतीय सीमा में प्रवेश करती है, कानूनी रूप से उसका ‘आयात’ (Import) पूरा हो जाता है। अतः घरेलू कानून के वैधानिक निषेध पूरी भारतीय सीमा पर समान रूप से लागू होते हैं—चाहे सामान कस्टम वेयरहाउस में रखा हो या डिपार्चर लाउंज में बेचा जा रहा हो।

3. क्या निकोटीन पाउच ‘दवा’ (Drug) हैं? तकनीकी विशेषज्ञता का अभाव

  • अदालत ने रेखांकित किया कि निकोटीन के सभी रूप अनिवार्य रूप से “प्रतिबंधित” नहीं हो सकते और स्वतः दवा की परिभाषा में नहीं आ सकते।
  • चूंकि याचिकाकर्ताओं ने अधिकारियों को उत्पाद की सटीक रासायनिक संरचना (Chemical Composition) और विनिर्देश उपलब्ध नहीं कराए थे, इसलिए यह स्पष्ट नहीं था कि औषधि नियंत्रक किस आधार पर इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि यह उत्पाद एक ‘दवा’ है।
  • खंडपीठ ने न्यायिक सीमाओं का उल्लेख करते हुए कहा:“इस अदालत के पास इस तरह की तथ्यात्मक जांच करने या इस वैज्ञानिक विषय पर राय व्यक्त करने की विशेषज्ञता नहीं है। अतः ये ऐसे मामले नहीं हैं जिनका निर्धारण या न्यायनिर्णयन रिट याचिका (अनुच्छेद 226) के तहत किया जा सके।”

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मामले की तथ्यात्मक पृष्ठभूमि एवं प्रतिबंध का आदेश

  • अडाणी समूह का संयुक्त उद्यम: मुंबई ट्रैवल रिटेल लिमिटेड (अडाणी ग्रुप और दुबई स्थित इकाई का संयुक्त उद्यम) मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के टर्मिनल-2 पर ड्यूटी-फ्री दुकानें संचालित करता है।
  • एंटी-टोबैको एनजीओ की शिकायत: तंबाकू-विरोधी वकालत संगठन ‘मदर्स अगेंस्ट वेपिंग’ (Mothers Against Vaping) ने केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) और स्वास्थ्य मंत्रालय को शिकायत भेजी थी कि बिना लाइसेंस के प्रतिबंधित विदेशी निकोटीन उत्पाद बेचे जा रहे हैं।
  • 2 अप्रैल 2026 की जब्ती व प्रतिबंध: सहायक औषधि नियंत्रक (Assistant Drug Controller) और सीडीएससीओ ने जांच के बाद 2 अप्रैल को एक आदेश पारित कर हवाई अड्डे पर बिना आयात लाइसेंस और पंजीकरण प्रमाणपत्र के बेचे जा रहे विदेशी निकोटीन पाउच की बिक्री पर तत्काल रोक लगा दी।
  • सीडीएससीओ का निष्कर्ष: विनियामक ने माना कि उक्त उत्पाद औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 की धारा 3(b) के तहत ‘दवा’ (Drug) की परिभाषा में आता है, अतः इसका आयात और बिक्री वैध लाइसेंस और पूर्व-पंजीकरण के बिना नहीं हो सकती।

उच्च न्यायालय का अंतिम निर्देशात्मक आदेश

  1. प्रतिबंध आदेश में हस्तक्षेप से इनकार: अदालत ने सीडीएससीओ और औषधि नियंत्रक द्वारा बिक्री पर लगाए गए प्रतिबंध को तत्काल रद्द करने या हटाने से इनकार कर दिया।
  2. चार सप्ताह में अभ्यावेदन देने की छूट: याचिकाकर्ताओं (मुंबई ट्रैवल रिटेल लि.) को निर्देश दिया गया कि वे 4 सप्ताह के भीतर उत्पाद के सभी तकनीकी विनिर्देशों (Product Specifications), रासायनिक संघटन और निकोटीन सांद्रता के साक्ष्यों के साथ सीडीएससीओ के समक्ष एक विस्तृत अभ्यावेदन प्रस्तुत करें।
  3. सीडीएससीओ द्वारा 30 दिनों में निर्णय: केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) को निर्देश दिया गया कि वह अभ्यावेदन प्राप्त होने के 30 दिनों के भीतर कानून के अनुसार एक विस्तृत और कारणयुक्त आदेश (Reasoned Order) पारित कर तय करे कि क्या यह उत्पाद लाइसेंस-अपेक्षित ‘दवा’ के दायरे में आता है या नहीं।

विधिक विवरण

  • केस संदर्भ: मुंबई ट्रैवल रिटेल लिमिटेड एवं अन्य बनाम भारत संघ, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय व अन्य [रिट याचिका (सिविल) – बॉम्बे उच्च न्यायालय]
  • विधिक प्रतिनिधित्व:
    • याचिकाकर्ताओं की ओर से: वरिष्ठ अधिवक्ता जनक द्वारकादास, अरुणाभ चौधरी, आशीष कामत एवं प्रकाश शाह (निर्देशन: जडेजाज एंड पार्टनर्स)
    • स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय / CDSCO की ओर से: अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) अनिल सिंह (सहयोगी: अधिवक्ता रुई रोड्रिग्स, जैनेंद्र शेठ, आदित्य व्यास एवं लीना पाटिल)
    • सीमा शुल्क आयुक्त (Customs) की ओर से: अधिवक्ता सिद्धार्थ चंद्रशेखर एवं अभिषेक आर. मिश्रा
  • प्रासंगिक कानून एवं धाराएं:
    • औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 की धारा 3(b) (दवा की परिभाषा), धारा 10 (आयात पर निषेध) एवं औषधि नियम, 1945
    • सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 की धारा 2(23) (‘आयात’ की परिभाषा), धारा 2(33) (‘प्रतिबंधित माल’ की परिभाषा) एवं विशेष आर्थिक क्षेत्र / ड्यूटी-फ्री वेयरहाउसिंग प्रावधान
    • भारत का संविधान – अनुच्छेद 226 (उच्च न्यायालय का रिट क्षेत्राधिकार) एवं अनुच्छेद 47 (जनस्वास्थ्य में सुधार का संवैधानिक दायित्व)
  • संबद्ध न्यायिक सिद्धांत व नजीरें:
    • गार्डन सिल्क मिल्स लिमिटेड बनाम भारत संघ (1999, सुप्रीम कोर्ट) — ‘सीमा शुल्क अधिनियम के तहत आयात तब पूरा होता है जब माल भारतीय क्षेत्रीय जलसीमा में प्रवेश करता है, न कि केवल तब जब वह सीमा शुल्क बाधाओं को पार करता है।’
    • एअर इंडिया कैबिन क्रू एसोसिएशन बनाम भारत संघ (सुप्रीम कोर्ट) — ‘तकनीकी और वैज्ञानिक वर्गीकरण के मामलों में संवैधानिक न्यायालयों को नियामक संस्थाओं के क्षेत्र में अतिक्रमण करने के बजाय निर्णय विशेषज्ञों पर छोड़ना चाहिए।’
  • पीठ: न्यायमूर्ति सुमन श्याम और न्यायमूर्ति अद्वैत एम. सेठना (बॉम्बे उच्च न्यायालय)

Shop On Airport: मामले का संक्षिप्त विवरण (At a Glance)

विवरणजानकारी
संबंधित अदालतबॉम्बे उच्च न्यायालय (Bombay High Court)
पीठ (Judges)न्यायमूर्ति सुमन श्याम और न्यायमूर्ति अद्वैत एम. सेठना
याचिकाकर्तामुंबई ट्रैवल रिटेल लिमिटेड (अडानी ग्रुप JV) एवं फ्लेमिंगो ड्यूटीफ्री
प्रतिवादीकेंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) एवं अन्य
मुद्दाड्यूटी-फ्री दुकानों पर प्रतिबंधित/बिना लाइसेंस वाले निकोटीन पाउच की बिक्री
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