अदालत की सख्त टिप्पणी
19 सितंबर 2026 को जारी किए गए कारण बताओ नोटिस में मजिस्ट्रेट ने रेलवे प्रशासन की सुस्ती पर कड़ी नाराजगी जताई।
- कार में बैठने को मजबूर जज: नोटिस में कहा गया कि औरंगाबाद बेंच के अधिकांश जज ट्रेन से यात्रा करते हैं और स्टेशन के VIP लाउंज पर निर्भर रहते हैं। सोफों में खटमल होने के कारण जजों को VIP रूम की जगह अपनी गाड़ियों (Cars) में बैठकर इंतजार करना पड़ रहा है, जो बेहद शर्मनाक स्थिति है।
- अवमानना का आरोप: मजिस्ट्रेट ने कहा:“न्यायिक अधिकारी के निर्देशों का पालन न करना और 4 महीने तक चुप्पी साधे रखना अदालत का घोर अनादर है, जो अवमानना की श्रेणी में आता है।”
छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद): महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर रेलवे स्टेशन (दक्षिण मध्य रेलवे, नांदेड़ मंडल) के वीआईपी लाउंज में खटमल (Bedbugs) और कीट-पतंगों से भरे पुराने सोफों को बदलने तथा पेस्ट कंट्रोल कराने के न्यायिक निर्देशों का चार महीने तक पालन न करने पर रेलवे मजिस्ट्रेट कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है।
प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट (JMFC) एस.एम. अहेर ने रेलवे अधिकारियों की लंबी निष्क्रियता और प्रशासनिक उदासीनता पर गहरा आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि न्यायिक अधिकारी के स्पष्ट निर्देशों का महीनों तक पालन न करना न्यायिक आदेशों का घोर अनादर (Blatant Disrespect) है, जो प्रथम दृष्टया अवमानना की श्रेणी में आता है। रेलवे अदालत ने दक्षिण मध्य रेलवे के मंडल रेल प्रबंधक (DRM), नांदेड़ मंडल को अदालत की अवमानना (Contempt of Court) का कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए 30 सितंबर 2026 को अदालत के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का सख्त आदेश दिया है।
मामले की तथ्यात्मक पृष्ठभूमि एवं न्यायिक आदेश
- मई 2026 का निरीक्षण: यह प्रकरण मई 2026 में उस समय शुरू हुआ जब बॉम्बे उच्च न्यायालय की न्यायाधीश न्यायमूर्ति मंजूषा देशपांडे और उनके पति छत्रपति संभाजीनगर रेलवे स्टेशन पहुंचे। वीआईपी लाउंज में बैठने के दौरान उन्होंने देखा कि वहां रखे सोफे अत्यधिक पुराने, जर्जर और खटमलों व कीटों से ग्रस्त (Pest-infested) थे। उन्होंने इस असहज स्थिति की सूचना संबंधित अधिकारियों को दी।
- 20 मई 2026 का पहला न्यायिक निर्देश: मजिस्ट्रेट एस.एम. अहेर ने 20 मई 2026 को आधिकारिक आदेश जारी कर नांदेड़ के डीआरएम को निर्देश दिया था कि वे वीआईपी लाउंज में तत्काल व्यापक पेस्ट कंट्रोल करवाएं और पुराने सोफों को बदलकर नए सोफे लगवाएं, ताकि उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों और अन्य गणमान्य व्यक्तियों को यात्रा के दौरान असुविधा का सामना न करना पड़े।
- चार महीने की प्रशासनिक निष्क्रियता: रेलवे प्रशासन ने इस न्यायिक निर्देश पर कोई कार्रवाई नहीं की और न ही चार महीनों तक अदालत को कोई औपचारिक उत्तर या अनुपालन रिपोर्ट (Compliance Report) भेजी।
19 सितंबर 2026 के कारण बताओ नोटिस में अदालत के सख्त अवलोकन
1. ‘जजों को वीआईपी रूम के बजाय अपनी कारों में बैठना पड़ रहा है’: मजिस्ट्रेट एस.एम. अहेर रेलवे कोर्ट ने 19 सितंबर 2026 को जारी अपने कारण बताओ नोटिस में स्थिति की गंभीरता को रेखांकित करते हुए कहा: “चूंकि वीआईपी रूम के सोफों में खटमल हैं, इसलिए माननीय उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों—जो अत्यंत विशिष्ट व्यक्ति (VVIPs) हैं—के लिए उन सोफों पर बैठना बेहद घृणास्पद और असहज स्थिति (Very disgusting position) बन गई है। वे अब वीआईपी रूम में बैठने के बजाय स्टेशन के बाहर अपनी कारों में बैठकर ट्रेनों का इंतजार करने के लिए विवश हैं।”
2. औरंगाबाद बेंच के जजों की रेल यात्रा पर निर्भरता
- नोटिस में विशेष रूप से रेखांकित किया गया कि बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद पीठ के अधिकांश न्यायाधीश छत्रपति संभाजीनगर से मुंबई और राज्य के अन्य हिस्सों में आने-जाने के लिए नियमित रूप से ट्रेन यात्रा करते हैं और रेलवे स्टेशन की वीआईपी प्रतीक्षालय सुविधा पर निर्भर रहते हैं।
- ऐसी बुनियादी और गरिमापूर्ण व्यवस्था बनाए रखने में रेलवे की विफलता संस्थागत प्रोटोकॉल और स्वच्छता मानकों की घोर अनदेखी को दर्शाती है।
3. ‘न्यायिक अधिकारी के निर्देश की खुली अवहेलना अवमाननाजनक’ मजिस्ट्रेट ने चार महीने तक रेलवे अधिकारियों द्वारा कोई प्रतिक्रिया न दिए जाने पर कड़ी नाराजगी जताते हुए दर्ज किया: “आपका यह आचरण न्यायिक अधिकारी के निर्देश का खुला अनादर है, जो पूरी तरह से अवमाननाजनक (Contemptuous) है।”
रेलवे अदालत का अंतिम निर्देश
- व्यक्तिगत पेशी का आदेश: अदालत ने नांदेड़ के मंडल रेल प्रबंधक (DRM) को निर्देश दिया कि वे 30 सितंबर 2026 को अदालत के समक्ष व्यक्तिगत रूप से हाजिर हों।
- अवमानना कार्यवाही पर जवाब तलब: डीआरएम को यह स्पष्ट करने का आदेश दिया गया है कि 20 मई के न्यायिक आदेश का अनुपालन न करने और अदालत के निर्देशों की अवहेलना करने के लिए उनके विरुद्ध न्यायालय की अवमानना अधिनियम के तहत औपचारिक कार्यवाही क्यों न शुरू की जाए।
विधिक विवरण
- केस संदर्भ: रेलवे न्यायालय, छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद) – कारण बताओ नोटिस बनाम मंडल रेल प्रबंधक (DRM), नांदेड़ मंडल
- संबंधित प्राधिकारी: मंडल रेल प्रबंधक (DRM), नांदेड़ मंडल, दक्षिण मध्य रेलवे (SCR)
- प्रासंगिक कानून:
- न्यायालय की अवमानना अधिनियम, 1971 (Contempt of Courts Act, 1971) की धारा 10 व धारा 12 (अधीनस्थ न्यायालयों के आदेशों की अवहेलना पर उच्च न्यायालय को संदर्भ एवं दंड)
- दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (CrPC) की धारा 345/346 / भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) के समतुल्य प्रावधान (न्यायिक कार्यवाही में बाधा या अनादर)
- रेलवे अधिनियम, 1989 (Railways Act, 1989) के तहत यात्री सुविधाएं व प्रोटोकॉल दायित्व
- संबद्ध न्यायिक सिद्धांत:
- अनिल रतन सरकार बनाम हीरालाल देवांग (सुप्रीम कोर्ट) — ‘न्यायिक आदेशों का समय पर और सटीक अनुपालन कानून के शासन (Rule of Law) की अनिवार्य शर्त है; प्रशासनिक लापरवाही या जानबूझकर की गई निष्क्रियता सिविल अवमानना का स्पष्ट आधार बनाती है।’
- अदालत: प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट (JMFC) एस.एम. अहेर (रेलवे कोर्ट, छत्रपति संभाजीनगर)
- अगली सुनवाई / व्यक्तिगत उपस्थिति: 30 सितंबर 2026
Bedbugs In Train: मामले का संक्षिप्त विवरण (At a Glance)
| विवरण | जानकारी |
| संबंधित अदालत | रेलवे कोर्ट, औरंगाबाद |
| न्यायाधीश | प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट एस. एम. आहेर (JMFC S.M. Aher) |
| नोटिस पाने वाले अधिकारी | मंडल रेल प्रबंधक (DRM), नांदेड डिवीज़न |
| स्थान | VIP रूम, छत्रपति संभाजीनगर रेलवे स्टेशन |
| अंतिम तिथि | DRM को 30 सितंबर 2026 को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश |

