नई दिल्ली/लखनऊ: लखनऊ विश्वविद्यालय (LU) के विधि संकाय और शिया पीजी कॉलेज के पूर्व छात्र रहे सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति विक्रम नाथ वरिष्ठता परंपरा (Seniority Convention) के अनुसार भारत के अगले मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice of India – CJI) के रूप में कार्यभार संभालने के लिए तैयार हैं। विधि स्नातक (LL.B.) की डिग्री पूरी करने के चार दशक बाद देश के सर्वोच्च न्यायिक पद पर उनकी पदोन्नति ने लखनऊ विश्वविद्यालय के एक सदी पुराने विधि संकाय और उसकी ऐतिहासिक विधिक विरासत को एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में ला दिया है।
9 फरवरी 2027 से 23 सितंबर 2027 तक होगा कार्यकाल
भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में लखनऊ विश्वविद्यालय (जिससे संबद्ध शिया पीजी कॉलेज भी है) का नाम एक बार फिर गर्व से दर्ज होने जा रहा है। विश्वविद्यालय के विधि संकाय से स्नातक की पढ़ाई पूरी करने वाले और लंबे समय तक इलाहाबाद उच्च न्यायालय में वकालत करने वाले जस्टिस विक्रम नाथ भारत के भावी मुख्य न्यायाधीश (CJI) बनने की कतार में हैं।
वरिष्ठता के स्थापित सिद्धांतों के अनुसार, जस्टिस विक्रम नाथ 9 फरवरी 2027 को देश के 53वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में पदभार ग्रहण करेंगे और 23 सितंबर 2027 तक इस सर्वोच्च संवैधानिक पद की जिम्मेदारी संभालेंगे। उनका कार्यकाल तकनीक-संचालित सुधारों, न्यायिक पारदर्शिता और पारदर्शी कानूनी सहायता प्रक्रियाओं के लिए जाना जाता है।
वर्ष 2018 में लखनऊ विश्वविद्यालय द्वारा ‘विशिष्ट पूर्व छात्र पुरस्कार’ (Distinguished Alumni Award) से सम्मानित न्यायमूर्ति विक्रम नाथ देश के पहले ऐसे उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रहे हैं, जिन्होंने गुजरात हाईकोर्ट में यूट्यूब पर अदालती कार्यवाहियों की औपचारिक लाइव-स्ट्रीमिंग (Live-Streaming) शुरू कर खुली अदालत (Open Court) की अवधारणा में तकनीकी क्रांति का सूत्रपात किया था।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ का विधिक व न्यायिक सफरनामा
- प्रारंभिक शिक्षा एवं विधि की डिग्री (1986)
- न्यायमूर्ति विक्रम नाथ का जन्म 24 सितंबर 1962 को उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले में हुआ था।
- उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय के संबद्ध शिया पीजी कॉलेज (Shia PG College) से 1986 में विधि स्नातक (LL.B.) की उपाधि प्राप्त की और मार्च 1987 में उत्तर प्रदेश बार काउंसिल में एक अधिवक्ता के रूप में नामांकित हुए।
- इलाहाबाद हाईकोर्ट में 17 वर्षों की वकालत
- उन्होंने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में 17 से अधिक वर्षों तक दीवानी, संवैधानिक, कंपनी और राजस्व मामलों में व्यापक वकालत की।
- उन्होंने उत्तर प्रदेश स्टेट स्पिनिंग कंपनी, स्टेट लेदर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन और अन्य सार्वजनिक उपक्रमों के स्थायी वकील के रूप में भी सेवाएं दीं।
- इलाहाबाद उच्च न्यायालय में न्यायाधीश (2004 – 2019)
- सितंबर 2004 में उन्हें इलाहाबाद उच्च न्यायालय का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया और फरवरी 2006 में वे स्थायी न्यायाधीश बने। उन्होंने लगभग 15 वर्षों तक इलाहाबाद हाईकोर्ट में सेवाएं दीं।
- गुजरात उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश (2019 – 2021)
- 10 सितंबर 2019 को उन्हें गुजरात उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया।
- अदालती लाइव स्ट्रीमिंग की ऐतिहासिक शुरुआत: गुजरात हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में उन्होंने कोविड-19 महामारी के दौरान 26 अक्टूबर 2020 को अदालत की पहली खंडपीठ की कार्यवाहियों की लाइव स्ट्रीमिंग शुरू की। सुप्रीम कोर्ट ने स्वयं इसे भारत के किसी भी उच्च न्यायालय द्वारा न्यायिक पारदर्शिता की दिशा में उठाया गया पहला ऐतिहासिक कदम बताया था।
- सर्वोच्च न्यायालय में पदोन्नति (अगस्त 2021)
- 31 अगस्त 2021 को वे भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत हुए।
Next CJI: लखनऊ विश्वविद्यालय के विधि संकाय की ऐतिहासिक विरासत
लखनऊ विश्वविद्यालय के विधि संकाय की स्थापना 1921 में जग मोहन नाथ चक द्वारा की गई थी। इस प्रतिष्ठित संकाय ने भारतीय न्यायपालिका और संवैधानिक विधि के विकास में कई प्रमुख विधिवेत्ताओं को जन्म दिया है:
| हस्ती / विधि विशेषज्ञ | लखनऊ विश्वविद्यालय से संबंध / विधिक योगदान |
| प्रो. आर. यू. सिंह (Prof. R.U. Singh) | वर्ष 1956 तक डीन रहे; दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) और बीएचयू (BHU) के विधि संकायों की रूपरेखा तैयार की; नेपाल के संविधान का मसौदा तैयार करने में मुख्य भूमिका निभाई। |
| प्रो. वी. एन. शुक्ला (Prof. V.N. Shukla) | प्रो. आर. यू. सिंह के शिष्य; भारतीय संविधान पर सर्वाधिक प्रामाणिक मानी जाने वाली विधिक पुस्तक (V.N. Shukla’s Constitution of India) के मूल लेखक। |
| जस्टिस ए. एस. आनंद (Former CJI A.S. Anand) | लखनऊ विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र रहे, जिन्होंने भारत के 33वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्य किया। |
| जस्टिस सगीर अहमद एवं जस्टिस बृजेश कुमार | लखनऊ विश्वविद्यालय के विधि संकाय के पूर्व छात्र रहे, जो बाद में भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश बने। |
कॉलेज से जुड़ाव और पारिवारिक पृष्ठभूमि
- शिया पीजी कॉलेज से गहरा भावनात्मक संबंध:15 अप्रैल 2022 को शिया पीजी कॉलेज के ‘हजरत इमाम मोहम्मद तकी भवन’ का उद्घाटन करते हुए सुप्रीम कोर्ट जज के रूप में न्यायमूर्ति नाथ ने अपने छात्र जीवन को याद किया था। उन्होंने कहा था:“मेरी सफलता में इस कॉलेज का अभूतपूर्व योगदान रहा है। यदि शिया कॉलेज न होता, तो आज मैं कुछ भी न होता।”
- पारिवारिक पृष्ठभूमि:न्यायमूर्ति विक्रम नाथ की पत्नी प्रो. संगीता श्रीवास्तव भी उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षा जगत में एक प्रतिष्ठित शिक्षाविद और प्रशासनिक नेतृत्वकर्ता हैं। वे वर्तमान में इलाहाबाद विश्वविद्यालय की कुलपति (Vice-Chancellor) के रूप में अपने दूसरे कार्यकाल में कार्यरत हैं।
परिवार और प्रारंभिक शिक्षा: वकीलों की चौथी पीढ़ी
जस्टिस विक्रम नाथ का जन्म 24 सितंबर 1962 को उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले (तत्कालीन इलाहाबाद क्षेत्र) में हुआ था। उनका परिवार कानून के पेशे से गहरा जुड़ाव रखता है। वह अपने परिवार में कानून की पढ़ाई करने वाले चतुर्थ पीढ़ी (Fourth-Generation Lawyer) के सदस्य हैं।
- प्रारंभिक एवं उच्च शिक्षा: उन्होंने वर्ष 1983 में विज्ञान में स्नातक (B.Sc.) की डिग्री हासिल की।
- कानूनी पढ़ाई (LL.B.): इसके बाद उन्होंने उत्तर प्रदेश के सुप्रसिद्ध शिक्षण संस्थान लखनऊ विश्वविद्यालय (शिया पीजी कॉलेज/विधि संकाय) से वर्ष 1986 में कानून (LL.B.) की डिग्री पूरी की।
- बार में नामांकन: 30 मार्च 1987 को उन्होंने उत्तर प्रदेश बार काउंसिल में एक अधिवक्ता के रूप में अपना पंजीकरण कराया और इलाहाबाद उच्च न्यायालय में अपनी प्रैक्टिस शुरू की।
गुजरात हाई कोर्ट में ऐतिहासिक डिजिटल क्रांति
जस्टिस विक्रम नाथ के न्यायिक करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक भारतीय न्यायपालिका में तकनीक और पारदर्शिता का एकीकरण है।
- लाइव स्ट्रीमिंग की शुरुआत: जब 2020 में कोविड-19 महामारी के कारण अदालतें बंद थीं, तब गुजरात उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में उन्होंने कोर्ट की कार्यवाही को यूट्यूब (YouTube) पर लाइव-स्ट्रीम करने का ऐतिहासिक कदम उठाया।
- ऐसा करने वाले वे भारत के पहले हाई कोर्ट चीफ जस्टिस बने। इस कदम ने “खुली अदालत” (Open Court) के सिद्धांत को डिजिटल युग में अमलीजामा पहनाया।
सुप्रीम कोर्ट में महत्वपूर्ण फैसले एवं न्यायिक योगदान
सर्वोच्च न्यायालय में अपने कार्यकाल के दौरान जस्टिस विक्रम नाथ कई ऐतिहासिक पीठों (Benches) का हिस्सा रहे हैं और उन्होंने 290 से अधिक फैसले लिखे हैं। उनके कुछ प्रमुख फैसले निम्नलिखित हैं:
- अनुसूचित जाति (SC) उप-वर्गीकरण (2024): 7-न्यायाधीशों की संविधान पीठ का हिस्सा रहते हुए उन्होंने फैसला सुनाया कि राज्य सरकारों के पास सबसे पिछड़े वर्गों को लाभ पहुंचाने के लिए SC श्रेणी के भीतर उप-वर्गीकरण करने का संवैधानिक अधिकार है।
- दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना (DSPE) अधिनियम का धारा 6A निर्णय (2023): 5-न्यायाधीशों की संविधान पीठ के लिए फैसला लिखते हुए उन्होंने माना कि भ्रष्टाचार के मामलों में वरिष्ठ अधिकारियों को दी जाने वाली पूर्व-अनुमति (Immunity) की सुरक्षा को रद्द करने का फैसला भूतपेक्षी (Retrospective) रूप से लागू होगा।
- बाल अपराध एवं मानसिक क्षमता (Barun Chandra Thakur Case): उन्होंने माना कि किसी बच्चे की किसी कार्य के परिणामों को समझने की संज्ञानात्मक क्षमता (Cognitive Awareness) और उसकी भावनात्मक परिपक्वता (Emotional Competence) में अंतर होता है।
- भोपाल गैस त्रासदी अतिरिक्त मुआवजा मामला (2023): केंद्र सरकार की उस याचिका को खारिज करने वाली संविधान पीठ का हिस्सा रहे जिसमें यूनियन कार्बाइड से अतिरिक्त मुआवजे की मांग की गई थी।
प्रशासनिक एवं संस्थागत भूमिकाएं
न्यायिक निर्णयों के अलावा जस्टिस विक्रम नाथ ने न्यायपालिका की प्रशासनिक और ई-समिति संबंधी व्यवस्थाओं में अहम भूमिका निभाई है:
- NALSA के कार्यकारी अध्यक्ष: नवंबर 2025 में उन्होंने राष्ट्रीय कानूनी सेवा प्राधिकरण (NALSA) के कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में पदभार ग्रहण किया, जहाँ वे देश के गरीब और वंचित वर्गों तक मुफ्त कानूनी सहायता पहुँचाने का कार्य कर रहे हैं।
- e-Committee अध्यक्ष: मई 2025 से वे सुप्रीम कोर्ट की ई-समिति (e-Committee) के अध्यक्ष हैं, जो पूरे देश की अदालतों के डिजिटलीकरण का संचालन करती है।
- मध्यस्थता (Mediation) समिति: वे ‘मेडिएटशन एंड कॉन्सिलिएशन प्रोजेक्ट कमेटी’ (MCPC) के अध्यक्ष के रूप में मध्यस्थता के माध्यम से मुकदमों के शीघ्र निपटारे पर बल दे रहे हैं।

