सुप्रीम कोर्ट के मुख्य निर्देश और चेतावनियां
1. 16,726 अवैध निर्माणों पर बुलडोजर कार्रवाई:
कोर्ट को सौंपी गई रिपोर्ट के अनुसार, अकेले ज़ोन-A में ही 16,726 अवैध ढांचे पाए गए हैं, जिनमें:
- 12,907 आवासीय (Residential)
- 2,945 गैर-आवासीय/कमर्शियल (Non-Residential)
- 874 मिश्रित (Residential-cum-Non-Residential) निर्माण शामिल हैं।
पीठ ने अधिकारियों को आदेश दिया कि पहले इन इमारतों को खाली कराया जाए, फिर सील किया जाए और उसके बाद तुरंत ध्वस्त किया जाए।
2. कमर्शियल इस्तेमाल में लाई जा रही अवैध इमारतें:
शास्त्री नगर और अन्य क्षेत्रों में आवासीय भूखंडों पर अवैध रूप से चल रहे 44 कमर्शियल परिसरों (जिनमें 6 स्कूल, 6 अस्पताल, 4 बैंक्वेट हॉल, 3 राष्ट्रीयकृत बैंक और 1 NBFC शामिल थे) में से 20 को पहले ही गिराया जा चुका है। कोर्ट ने शेष 24 परिसरों को तुरंत गिराने का आदेश दिया।
3. उल्देपुर में अवैध कॉलोनियां और ‘जस्टिस धूलिया आयोग’:
मेरठ के बाहरी इलाके उल्देपुर में सैकड़ों अवैध कॉलोनियों के पनपने पर शीर्ष अदालत ने गहरा दुख और आश्चर्य व्यक्त किया।
- अदालत ने पूर्व न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की अध्यक्षता में एक आयोग का गठन किया जो यह जांच करेगा कि:
- यह जमीन सरकारी थी या निजी?
- मेरठ विकास प्राधिकरण (MDA – Meerut Development Authority) के अधिकारी 5 वर्षों से अधिक समय तक मौन क्यों रहे?
- क्या इसमेंMDA अधिकारियों की मिलीभगत/सांठगांठ थी?
- उत्तर प्रदेश सरकार को आयोग के शुरुआती खर्च के रूप में ₹35 लाख सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री में जमा करने का आदेश दिया गया है।
नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर में अवैध निर्माणों, स्वीकृत नक्शों के उल्लंघन और रिहायशी कॉलोनियों के अंधाधुंध व्यवसायीकरण पर देश की सुप्रीम कोर्ट ने अब तक का सबसे बड़ा और कठोर हंटर चलाया है।
न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन की खंडपीठ ने 21 सितंबर 2026 को पारित अपने विस्तृत आदेश में अधिकारियों को स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि इन जर्जर और अवैध निर्माणों के गिरने से किसी निर्दोष नागरिक की जान जाती है, तो संबंधित प्रशासनिक और MDA अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार (Personally Liable) ठहराया जाएगा। सर्वोच्च न्यायालय ने मेरठ प्रशासन और मेरठ विकास प्राधिकरण (MDA) को जोन-ए (Zone-A) में चिन्हित 16,726 अनधिकृत ढांचों को तत्काल खाली कराने, सील करने और चरणबद्ध तरीके से ढहाने (Demolition) का सख्त आदेश दिया है। इसके साथ ही, मेरठ के बाहरी इलाके उल्देपुर (Uldepur) में सैकड़ों अवैध कॉलोनियां बसने पर गहरा सदमा और चिंता व्यक्त करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच के लिए शीर्ष अदालत के सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस सुधांशू धूलिया की अध्यक्षता में एक सदस्यीय न्यायिक जांच आयोग (Judicial Commission) गठित कर दिया है।
सुप्रीम कोर्ट का ध्वस्तीकरण आदेश: संख्या और श्रेणियों का विवरण
अदालत ने जोन-ए में चिन्हित 16,726 अवैध ढांचों पर तत्काल कार्रवाई करने का निर्देश देते हुए प्रक्रिया तय की: “हम संबंधित अधिकारियों को निर्देश देते हैं कि वे जोन-ए में इन सभी 16,726 अवैध ढांचों के खिलाफ यथाशीघ्र उचित कार्रवाई करने के लिए आगे बढ़ें। इस प्रक्रिया का पहला कदम यह होगा कि इन परिसरों के अधिभोगियों (Occupants) को परिसर खाली करने के लिए कहा जाए और इन सभी 16,726 अवैध ढांचों को तत्काल प्रभाव से सील किया जाए। हम तदनुसार निर्देश जारी करते हैं।”
जोन-ए में चिन्हित 16,726 अवैध निर्माणों का वर्गीकरण:
- विशुद्ध रिहायशी (Residential): 12,907 निर्माण
- रिहायशी-सह-गैर-रिहायशी (Residential-cum-Non-Residential): 874 निर्माण
- गैर-रिहायशी/व्यावसायिक (Non-Residential): 2,945 निर्माण
अनिवार्य सेटबैक (Setback Areas) और अवैध व्यावसायिक संपत्तियों पर कार्रवाई:
- सेटबैक क्षेत्रों का अतिक्रमण: पूर्व में चिन्हित 201 संपत्तियों में से 63 को पहले ही हटाया जा चुका था। अदालत ने शेष 138 संपत्तियों में अनिवार्य सेटबैक क्षेत्रों में किए गए अवैध निर्माणों को भी तुरंत ढहाने का आदेश दिया।
- अवैध रूप से कंवर्ट की गई 44 संपत्तियां:
- अप्रैल 2026 की सुनवाई में अदालत को बताया गया था कि रिहायशी क्षेत्रों में 44 ऐसी संपत्तियां थीं जिन्हें अवैध रूप से व्यावसायिक रूप दे दिया गया था (जिनमें 6 स्कूल, 6 अस्पताल, 4 बैंक्वेट हॉल, 3 राष्ट्रीयकृत बैंक और 1 NBFC शामिल थे)।
- इनमें से 20 संपत्तियों को पहले ही गिरा दिया गया है। अदालत ने शेष 24 संपत्तियों, जिन पर सील लगाई जा चुकी है, को जल्द से जल्द पूरी तरह ध्वस्त करने का आदेश दिया।
उल्देपुर में अवैध कॉलोनियों का जाल: ‘जस्टिस धूलिया आयोग’ का गठन
मेरठ के बाहरी इलाके उल्देपुर (Uldepur) में नियमों को ताक पर रखकर विकसित की गई सैकड़ों अवैध आवासीय कॉलोनियों का खुलासा होने पर खंडपीठ ने गहरा रोष व्यक्त किया:
- न्यायिक जांच के बिंदु (Terms of Reference)
- पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस सुधांशू धूलिया की अध्यक्षता वाला आयोग यह जांच करेगा कि ये कॉलोनियां किस प्रकार अस्तित्व में आईं।
- भूमि सरकारी है या निजी व्यक्तियों की, और मूल भूस्वामियों तथा खरीदारों के बीच लेनदेन कैसे और किन नियमों के तहत हुआ।
- MDA की संदिग्ध चुप्पी: मेरठ विकास प्राधिकरण (MDA) 5 वर्षों से अधिक समय तक इन अवैध कॉलोनियों के निर्माण पर मूकदर्शक क्यों बना रहा?
- क्या ये अवैध बस्तियां एमडीए अधिकारियों की सांठगांठ या मिलीभगत (Collusion and Connivance) से बसाई गईं? आयोग दोषी अधिकारियों की पहचान कर उनकी जवाबदेही तय करेगा।
- आयोग का खर्च: राज्य सरकार को निर्देश दिया गया कि वह आयोग के अध्यक्ष (जस्टिस सुधांशू धूलिया) और नामित सदस्यों के मानदेय व व्यय हेतु सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री में तत्काल ₹35,00,000 (पैंतीस लाख रुपये) जमा कराए।
- दैनिक आधार पर मलबा हटाने का आदेश: जांच लंबित रहने के दौरान अदालत ने उल्देपुर में चिन्हित प्रत्येक अवैध ढांचे को गिराने और उसके मलबे (Debris) को दैनिक आधार पर साफ करने का आदेश दिया।
‘हादसा हुआ तो अफसर व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे’
शीर्ष अदालत ने प्रशासन को चेताया कि अवैध निर्माणों में देरी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी: “यह पूरी तरह संभव है कि इनमें से कुछ ढांचे अत्यंत जर्जर स्थिति (Dilapidated Condition) में हों और उनके अचानक ढह जाने से जान-माल का भारी नुकसान हो जाए। हम किसी भी कीमत पर ऐसा नहीं होने दे सकते। इसलिए, तत्काल कार्रवाई अनिवार्य है। हम निर्देश देते हैं कि सभी चारों जोनों (All Four Zones) के संबंध में त्वरित कार्रवाई की जाए। हम स्पष्ट करते हैं कि यदि कल को कोई अप्रिय घटना घटती है और निर्दोष लोगों की जान जाती है, तो संबंधित सरकारी अधिकारी को इसके लिए व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायी (Personally Liable) ठहराया जाएगा।”
मामले की पृष्ठभूमि एवं कानूनी संदर्भ
- शास्त्री नगर योजना से शुरुआत: यह पूरा मामला मूल रूप से मेरठ की पॉश कॉलोनी शास्त्री नगर (Shastri Nagar) के एक रिहायशी प्लॉट पर अवैध व्यावसायिक निर्माण से शुरू हुआ था। इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा अवैध निर्माण गिराने और दोषी अफसरों पर कार्रवाई के आदेश के बाद यह विवाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था।
- अप्रैल 2026 में सख्ती: सुप्रीम कोर्ट ने अप्रैल 2026 में ही 859 संपत्तियों के सेटबैक में अवैध निर्माणों को गिराने का आदेश दिया था और स्पष्ट कर दिया था कि ऐसे उल्लंघनों को कम्पाउंड (Compounded / शमनीय) नहीं किया जा सकता।
- समानांतर विधिक मिसाल (लोगनाथन बनाम तमिलनाडु राज्य): हाल ही में सुप्रीम कोर्ट की एक अन्य पीठ (जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की अध्यक्षता में) ने भी रिहायशी क्षेत्रों में लैंड-यूज (Land-use Permissions) का उल्लंघन कर व्यावसायिक गतिविधियां चलाने पर देशव्यापी रोक लगाते हुए ऐसी सभी संपत्तियों को तुरंत सील करने का निर्देश दिया था।
विधिक विवरण
- केस संदर्भ: मेरठ विकास प्राधिकरण क्षेत्र में अनधिकृत निर्माणों की निगरानी का मामला [सिविल अपील / विविध आवेदन – भारत का सर्वोच्च न्यायालय]
- प्रासंगिक कानून एवं विधिक धाराएं:
- उत्तर प्रदेश नगर योजना एवं विकास अधिनियम, 1973 (UP Urban Planning and Development Act, 1973) की धारा 27 (अवैध निर्माणों का ध्वस्तीकरण) एवं धारा 28-A (अवैध निर्माणों की सीलिंग की शक्ति)
- उत्तर प्रदेश विकास प्राधिकरण भवन उपविधियां एवं जोनिंग रेगुलेशंस (Building Bye-laws & Zoning Regulations)
- भारत का संविधान – अनुच्छेद 142 (पूर्ण न्याय करने की सर्वोच्च न्यायालय की शक्ति)
- जांच आयोग अधिनियम, 1952 (Commissions of Inquiry Act, 1952)
- पीठ: न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन (सर्वोच्च न्यायालय)
- विशेष आयोग प्रमुख: न्यायमूर्ति सुधांशू धूलिया (पूर्व न्यायाधीश, भारत का सर्वोच्च न्यायालय)
- अंतिम निर्देश: जोन-ए के 16,726 अवैध निर्माणों पर तत्काल बेदखली, सीलिंग और ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू की जाए; उल्देपुर मामले में न्यायिक आयोग विस्तृत रिपोर्ट सौंपेगा।
Sealing Process-I: मामले का संक्षिप्त विवरण (At a Glance)
| विवरण | जानकारी |
| संबंधित अदालत | भारत का सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court of India) |
| पीठ | न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला एवं न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन |
| क्षेत्र/स्थान | मेरठ, उत्तर प्रदेश (विशेष रूप से ज़ोन-ए, शास्त्री नगर और उल्देपुर) |
| मुख्य निर्देश | 1. ज़ोन-A के 16,726 अवैध निर्माणों को खाली कराकर, सील कर ढहाया जाए। 2. अनिवार्य सेटबैक (Setback Area) का उल्लंघन करने वाली 138 संपत्तियों को ध्वस्त किया जाए। 3. अवैध रूप से कमर्शियल इस्तेमाल की जा रही 24 शेष इमारतों (अस्पताल, स्कूल, बैंक्वेट हॉल) को गिराया जाए। 4. उल्देपुर की अवैध कॉलोनियों की जांच के लिए जस्टिस धूलिया आयोग का गठन। |

