मुख्य संकेतक और घटनाक्रम (Key Highlights)
- दिल्ली क्राइम ब्रांच की जांच से हुआ खुलासा:दीपक नंदा ने 2019 में बीए एलएलबी में दाखिला लिया और 2024 में पाठ्यक्रम पूरा किया। प्रवेश के समय उन्होंने 12वीं कक्षा की मार्कशीट प्रस्तुत की थी, जिसे जम्मू-कश्मीर बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन (JKBOSE) द्वारा जारी होना दर्शाया गया था। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच द्वारा एक जांच के दौरान इन दस्तावेजों पर संदेह जताया गया, जिसके बाद यूनिवर्सिटी ने इनका सत्यापन कराया।
- बोर्ड की रिपोर्ट में कोई रिकॉर्ड नहीं मिला:संबंधित बोर्ड ने 19 सितंबर 2026 को विश्वविद्यालय को सूचित किया कि जमा की गई मार्कशीट और प्रमाण पत्र उनके आधिकारिक रिकॉर्ड में मौजूद नहीं हैं।
- धोखाधड़ी और जालसाजी का मुकदमा दर्ज:बोर्ड की सत्यापन रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन के अधिकारी अरुण कुमार ने रजबपुर थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने 28 सितंबर 2026 को नंदा के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचना (जालसाजी) और जाली दस्तावेजों का उपयोग करने की धाराओं में मामला दर्ज किया।
अमरोहा/नई दिल्ली: कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के आपराधिक सिंडिकेट, अवैध हथियार आपूर्ति नेटवर्क और न्यायिक पेशे की शुचिता से जुड़े एक सनसनीखेज घटनाक्रम में बिश्नोई के वकील दीपक नंदा (उर्फ दीपक खत्री) के खिलाफ 12वीं कक्षा के फर्जी शैक्षणिक दस्तावेजों के आधार पर कानून (BA LLB) की डिग्री हासिल करने के आरोप में उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले में आपराधिक प्राथमिकी दर्ज की गई है।
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच द्वारा शुरू की गई जांच के बाद अमरोहा स्थित श्री वेंकटेश्वरा विश्वविद्यालय, गजरौला द्वारा दस्तावेजों के सत्यापन कराए जाने पर यह बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर हुआ। संबंधित स्कूल शिक्षा बोर्ड के रिकॉर्ड में जमा किए गए अंकपत्र और प्रमाण पत्र का कोई अस्तित्व नहीं पाए जाने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन की शिकायत पर रजबपुर पुलिस स्टेशन में धोखाधड़ी, कूटकरण और जाली दस्तावेजों को असली के रूप में इस्तेमाल करने की सुसंगत धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है।
मामले की तथ्यात्मक पृष्ठभूमि एवं जांच का क्रम
- 2019 में लॉ पाठ्यक्रम में दाखिला:
- पुलिस रिकॉर्ड और एफआईआर के अनुसार, दीपक नंदा ने वर्ष 2019 में अमरोहा के रजबपुर थाना क्षेत्र स्थित श्री वेंकटेश्वरा विश्वविद्यालय में 5-वर्षीय एकीकृत बीए एलएलबी (B.A. LL.B.) पाठ्यक्रम में प्रवेश लिया था।
- उसने वर्ष 2024 में यह डिग्री पूरी की और उसी वर्ष बार काउंसिल में पंजीकरण कराकर वकालत का लाइसेंस हासिल किया। The Indian Express
- प्रवेश के समय जमा किए गए दस्तावेज:
- वर्ष 2019 में प्रवेश के समय नंदा ने जम्मू एवं कश्मीर राज्य स्कूल शिक्षा बोर्ड (JKBOSE – Rehari Colony, Jammu) द्वारा कथित रूप से जारी 12वीं कक्षा की मार्कशीट और उत्तीर्ण प्रमाण पत्र को अपनी न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता के प्रमाण के रूप में प्रस्तुत किया था।
- दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच की जांच और यूएपीए (UAPA) मामला:
- दीपक नंदा को अगस्त 2026 में दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने अवैध हथियार सप्लाई सिंडिकेट (गैंगस्टर-हथियार तस्कर गठजोड़) से जुड़े एक बड़े मामले में गिरफ्तार किया था, जहां उसके खिलाफ विधि-विरुद्ध क्रियाकलाप निवारण अधिनियम (UAPA) के तहत भी कार्रवाई की गई थी।
- पूछताछ और पृष्ठभूमि सत्यापन के दौरान उसकी वकालत की डिग्री पर संदेह उत्पन्न हुआ, जिसके बाद दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच के एंटी-रॉबरी एंड स्नैचिंग सेल ने श्री वेंकटेश्वरा विश्वविद्यालय से उसके शैक्षणिक और प्रवेश रिकॉर्ड तलब किए।
बोर्ड सत्यापन में फर्जीवाड़ा उजागर: ‘रिकॉर्ड में कोई विवरण मौजूद नहीं’
विश्वविद्यालय द्वारा नंदा के 12वीं के दस्तावेजों को सत्यापन (Verification) के लिए जम्मू-कश्मीर स्कूल शिक्षा बोर्ड भेजा गया था:
- बोर्ड का लिखित जवाब (19 सितंबर 2026): जेएंडके बोर्ड ने विश्वविद्यालय और जांच एजेंसियों को औपचारिक रूप से सूचित किया कि प्रस्तुत किया गया 12वीं का अंकपत्र और प्रमाण पत्र बोर्ड के आधिकारिक रिकॉर्ड में कहीं भी उपलब्ध नहीं है और यह पूरी तरह फर्जी (Fake/Forged) है।
- क्राइम ब्रांच की सूचना (23 सितंबर 2026): दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच के सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) ने 23 सितंबर को पत्र भेजकर विश्वविद्यालय प्रशासन को बोर्ड सत्यापन के आधिकारिक निष्कर्षों से अवगत कराया।
- विश्वविद्यालय की ओर से पुलिस शिकायत (24 सितंबर 2026): श्री वेंकटेश्वरा विश्वविद्यालय के प्रशासनिक अधिकारी अरुण कुमार ने रजबपुर पुलिस स्टेशन में औपचारिक लिखित तहरीर दी। इसमें आरोप लगाया गया कि दीपक नंदा ने जालसाजी और कूटकरण के माध्यम से तैयार किए गए फर्जी शैक्षणिक दस्तावेजों को असली के रूप में पेश करके विश्वविद्यालय में अवैध रूप से दाखिला हासिल किया और डिग्री प्राप्त की।
- प्राथमिकी पंजीकरण (28 सितंबर 2026): विश्वविद्यालय की शिकायत पर रजबपुर पुलिस ने 28 सितंबर को दीपक नंदा के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज की। उप-निरीक्षक (SI) राजेंद्र कुमार को मामले का विवेचना अधिकारी (Investigating Officer) नियुक्त किया गया है।
बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) और बार काउंसिल पंजीकरण पर प्रभाव
- बीसीआई को पत्राचार: सूत्रों के अनुसार, विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले का संज्ञान लेते हुए बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) और संबंधित स्टेट बार काउंसिल को भी पत्र लिखकर सूचित किया है कि आरोपी ने फर्जी बुनियादी योग्यता (Class 12) के आधार पर कानून में प्रवेश लिया था।
- विधिक परिणाम:
- बार काउंसिल ऑफ इंडिया के विधिक शिक्षा नियम, 2008 (Rules of Legal Education, 2008) के तहत किसी भी 5-वर्षीय लॉ कोर्स में प्रवेश के लिए किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 12वीं उत्तीर्ण होना एक गैर-परक्राम्य और अनिवार्य न्यूनतम योग्यता (Minimum Qualification) है।
- यदि बुनियादी प्रवेश ही जालसाजी पर आधारित पाया जाता है, तो कानून की डिग्री अकृत व शून्य (Void ab initio) हो जाती है और अधिवक्ता अधिनियम, 1961 की धारा 26(1) के तहत राज्य बार काउंसिल को नामांकन सूची (Roll of Advocates) से संबंधित व्यक्ति का नाम स्वतः निरस्त करने का पूरा वैधानिक अधिकार प्राप्त है।
- अतिरिक्त एफआईआर की संभावना: सूत्रों के संकेत के अनुसार, जाली प्रमाण पत्र तैयार करने के संबंध में जम्मू-कश्मीर पुलिस द्वारा भी अलग से कूटकरण का मामला दर्ज किया जा सकता है।
विधिक विवरण
- केस संदर्भ: श्री वेंकटेश्वरा विश्वविद्यालय शिकायत बनाम दीपक नंदा / दीपक खत्री [अपराध संख्या / एफआईआर – थाना रजबपुर, जिला अमरोहा, उत्तर प्रदेश] Indiatimes
- जांच अधिकारी: उप-निरीक्षक राजेंद्र कुमार (रजबपुर पुलिस)
- संबंधित पूर्ववर्ती मामला: दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच आर्म्स व UAPA सिंडिकेट मामला (अगस्त 2026)
- प्रासंगिक कानून एवं विधिक धाराएं:
- भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) [पूर्ववर्ती IPC]:
- धारा 318(4) [पुराना IPC 420] — धोखाधड़ी और बेईमानी से संपत्ति/डिग्री प्राप्त करना
- धारा 336(3) [पुराना IPC 468] — धोखाधड़ी के उद्देश्य से दस्तावेजों की जालसाजी व कूटकरण
- धारा 340(2) [पुराना IPC 471] — कूटरचित या जाली दस्तावेज को असली के रूप में प्रस्तुत करना
- अधिवक्ता अधिनियम, 1961 (Advocates Act, 1961):
- धारा 24 (अधिवक्ता के रूप में नामांकित होने की अनिवार्य शैक्षणिक अर्हताएं)
- धारा 26(1) (गलत बयानी या धोखाधड़ी से प्राप्त नामांकन को बार काउंसिल द्वारा रद्द करने की शक्ति)
- धारा 35 (व्यावसायिक कदाचार और निष्कासन)
- बीसीआई विधिक शिक्षा नियमावली, 2008 (मान्यता प्राप्त 10+2 योग्यता की अनिवार्यता)
- भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) [पूर्ववर्ती IPC]:
- संबद्ध न्यायिक सिद्धांत व नजीरें:
- आर. विश्वनाथ पिल्लई बनाम केरल राज्य (2004, सुप्रीम कोर्ट) — ‘यदि प्रारंभिक प्रवेश या नियुक्ति ही जाली और फर्जी दस्तावेजों पर आधारित है, तो उसके आधार पर प्राप्त की गई डिग्री या पद कानून की नजर में शून्य (Nullity) है और उस पर किसी भी अधिकार का दावा नहीं किया जा सकता।’
- बार काउंसिल ऑफ इंडिया बनाम बोनी एफओआई लॉ कॉलेज (2023, सुप्रीम कोर्ट संविधान पीठ) — ‘कानूनी पेशे के उच्च नैतिक मानकों को बनाए रखने के लिए बुनियादी शैक्षणिक योग्यताओं की शुचिता अक्षुण्ण रहना अनिवार्य है।’
- वर्तमान स्थिति: रजबपुर पुलिस द्वारा जांच जारी; फोरेंसिक और बोर्ड रिकॉर्ड जुटाए जा रहे हैं; रिपोर्ट के आधार पर आरोप पत्र (Chargesheet) दाखिल करने तथा बार काउंसिल द्वारा लाइसेंस निरस्तीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
Lawrence Gang: मामले का संक्षिप्त विवरण (At A Glance)
| विवरण | जानकारी |
| आरोपी | दीपक नंदा (गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के वकील) |
| विश्वविद्यालय | श्री वेंकटेश्वर यूनिवर्सिटी, अमरोहा (उत्तर प्रदेश) |
| संबंधित पाठ्यक्रम | बीए एलएलबी (BA LLB) — सत्र 2019 से 2024 |
| फर्जी दस्तावेज | जेएंडके बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन (JKBOSE) की 12वीं की फर्जी मार्कशीट और सर्टिफिकेट |
| शिकायतकर्ता | अरुण कुमार (प्रशासनिक अधिकारी, श्री वेंकटेश्वर यूनिवर्सिटी) |
| प्राथमिकी तिथि | 28 सितंबर 2026 (रजबपुर पुलिस स्टेशन) |

