At A Glance | एक नजर में
- महिला वकीलों के लिए संदेश: “परिस्थितियों, दूसरों की अपेक्षाओं या उनके संदेहों को अपनी सफलताओं की सीमा तय न करने दें। मैंने भी अपने करियर में इन्हीं बाधाओं का सामना किया है और केवल निरंतर प्रयास ही मुझे आगे ले गया।”
- वरिष्ठों से अपील: हाईकोर्ट या बार में पहले से स्थापित महिला वकीलों से आग्रह किया कि वे आगे बढ़ रही युवा महिला वकीलों का मार्गदर्शन करें और उनका हाथ थामें।
- सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नति: जस्टिस सुनीता अग्रवाल को सोमवार को सुप्रीम कोर्ट का जज नियुक्त किया गया है। वह जस्टिस बेला एम. त्रिवेदी के बाद गुजरात हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट पहुंचने वाली दूसरी महिला जज हैं।
- उपलब्धि का रिकॉर्ड: गुजरात हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में अपने 3 साल और 2 महीने के कार्यकाल के दौरान उन्होंने लगभग 11,129 मामलों का निपटारा किया।
अहमदाबाद: कानूनी पेशे में युवा महिला अधिवक्ताओं के समक्ष आने वाली सामाजिक व पेशेवर चुनौतियों, बार और बेंच में वरिष्ठ महिलाओं द्वारा नई पीढ़ी के मेंटरशिप (मार्गदर्शन) के दायित्व, और न्यायपालिका के संस्थागत आधुनिकीकरण पर गुजरात उच्च न्यायालय की निवर्तमान मुख्य न्यायाधीश सुनीता अग्रवाल ने अपने विदाई संदर्भ (Farewell Reference) में अत्यंत प्रेरक और दूरदर्शी विचार व्यक्त किए हैं। मुख्य न्यायाधीश अग्रवाल को हाल ही में देश के सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court of India) के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया है।
न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल गुजरात उच्च न्यायालय से सर्वोच्च न्यायालय में पदोन्नत होने वाली दूसरी महिला न्यायाधीश बन गई हैं (न्यायमूर्ति बेला एम. त्रिवेदी के बाद)। मुख्य न्यायाधीश के रूप में अपने 3 वर्ष और 2 महीने के कार्यकाल का स्मरण करते हुए उन्होंने इलाहाबाद उच्च न्यायालय बार में अपने शुरुआती संघर्ष के दिनों को याद किया और युवा वकीलों को कड़ी मेहनत, अध्ययनशीलता और विनम्रता को अपने करियर की सबसे स्थायी संपत्ति बनाने की सीख दी।
विदाई भाषण के प्रमुख संदेश एवं प्रेरक मार्गदर्शन
1. ‘संदेहों और परिस्थितियों को उपलब्धियों की सीमा न बनने दें’ युवा महिला अधिवक्ताओं को संबोधित करते हुए न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल ने व्यक्तिगत अनुभवों को साझा करते हुए कहा: “परिस्थितियों, सामाजिक अपेक्षाओं और दूसरों के मन में आपके प्रति उठने वाले संदेहों को अपनी उपलब्धियों की सीमाएं (Limits of your achievements) तय करने की अनुमति कभी न दें। अपने पूरे पेशेवर करियर में मैंने भी उन्हीं बाधाओं का सामना किया है जिनसे आप आज जूझ रही हैं; और यह केवल दृढ़ता एवं निरंतरता (Perseverance) ही थी जो मुझे हर चुनौती से पार ले गई।”
2. स्थापित महिला वकीलों और जजों को मेंटरशिप का आह्वान:
- न्यायमूर्ति अग्रवाल ने कानूनी पेशे या न्यायपालिका में पहले से स्थापित महिलाओं से अपील की कि वे आने वाली पीढ़ी के लिए सीढ़ी बनें:“जो महिलाएं आज इस पेशे में बेंच या बार के किसी भी उच्च पायदान पर खड़ी हैं—उनका हाथ थामें जो अभी ऊपर चढ़ रही हैं; उनका मार्गदर्शन करें, उन्हें संवारें और उन्हें दृढ़ता के साथ आगे बढ़ने का आत्मविश्वास दें।”
3. युवा वकीलों को सलाह: ‘हर केस की तैयारी ऐसे करें जैसे वह आपका पहला केस हो’ अदालती बहस और वकालत की कला पर उन्होंने युवा अधिवक्ताओं को व्यावहारिक मंत्र दिए:
- जो भी अवसर मिले उसे दोनों हाथों से लपकें, व्यापक अध्ययन (Read extensively) करें।
- प्रत्येक मामले की तैयारी इतनी गहनता और बारीकी से करें मानो वह आपके जीवन का पहला केस हो।
- अपनी पूरी जिरह और बहस के दौरान सतर्क, सजग और विनम्र (Humble) बने रहें।
- उन्होंने रेखांकित किया:“बार में सफलता अलग-अलग रूपों में और विभिन्न चरणों में मिल सकती है; परंतु सत्यनिष्ठा (Integrity), कठोर परिश्रम (Hard work) और विनम्रता (Humility) के बल पर जो प्रतिष्ठा आप अर्जित करते हैं, वही आपकी सबसे स्थायी संपत्ति रहेगी।”
संस्थागत परिवर्तन: डिजिटलीकरण और 11,129 मुकदमों का ऐतिहासिक निस्तारण
- कार्यकाल की उपलब्धियां (3 वर्ष और 2 महीने):
- गुजरात के महाधिवक्ता (Advocate General) कमल त्रिवेदी ने विदाई संदर्भ में जानकारी दी कि मुख्य न्यायाधीश के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल ने लगभग 11,129 मामलों का अंतिम निस्तारण (Disposal) किया।
- पेपरलेस कोर्ट और डिजिटलीकरण:
- उनके नेतृत्व में गुजरात हाईकोर्ट में बड़े पैमाने पर स्वचालन (Automation) और डिजिटलीकरण की शुरुआत हुई, जिसमें पायलट प्रोजेक्ट के रूप में पेपरलेस कोर्ट (Paperless Court) की स्थापना प्रमुख रही।
- संस्था को निजीकरण से मुक्त रखना:
- न्यायमूर्ति अग्रवाल ने कहा:“हमने अपने सामूहिक प्रयासों से जो भी बदलाव किए हैं, वे सभी हर कार्य को व्यक्तिगत बनाने के बजाय उसे संस्थागत (Institutionalizing rather than personalizing) करके न्यायपालिका को मजबूत बनाने की दिशा में निर्देशित थे।”
इलाहाबाद बार से सुप्रीम कोर्ट तक का सफर
- शुरुआती दिनों का संघर्ष:
- उन्होंने इलाहाबाद उच्च न्यायालय बार में अपने शुरुआती वर्षों को याद करते हुए बताया कि उस दौर में काम बहुत कम मिलता था और करियर किस दिशा में जाएगा, इसे लेकर अनिश्चितता बनी रहती थी।
- उन्होंने कहा: “आज मैं जो कुछ भी हूँ और जो कुछ भी मैंने हासिल किया है, उसके लिए मैं उस संस्था की ऋणी हूँ जिसने मुझे अपनाया, संवारा और संरक्षण दिया।”
- संस्थागत विरासत की सीख:
- उन्होंने अपने संबोधन का समापन करते हुए कहा:“हम सभी इस संस्था के इतिहास के पन्ने हैं और उन पर क्या लिखा जाता है, यह हमारे हाथों में है। पद बदलते हैं और उपाधियां दूसरों को हस्तांतरित हो जाती हैं; जो शेष रह जाता है वह है हमारी विरासत, जो आने वाली अगली पीढ़ी के लिए मार्ग प्रशस्त करती है।”
विधिक एवं प्रशासनिक संदर्भ
- पद और संदर्भ: गुजरात उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश का औपचारिक विदाई संदर्भ (Full Court Farewell Reference)
- अखिल भारतीय पदोन्नति:
- न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल को 5 अक्टूबर 2026 को भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया।
- उनके साथ दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और त्रिपुरा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश अपरेश कुमार सिंह को भी सुप्रीम कोर्ट में नियुक्त किया गया है।
- ऐतिहासिक महत्ता: गुजरात उच्च न्यायालय से सर्वोच्च न्यायालय पहुंचने वाली दूसरी महिला न्यायाधीश (न्यायमूर्ति बेला एम. त्रिवेदी के बाद)।
Justice Speech: Key Indicators | मुख्य बिंदु
| संकेत बिंदु | विवरण |
| संबंधित न्यायाधीश | जस्टिस सुनीता अग्रवाल (पूर्व मुख्य न्यायाधीश, गुजरात हाईकोर्ट) |
| सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नति | मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और मुख्य न्यायाधीश अपरेश कुमार सिंह के साथ |
| करियर की शुरुआत | इलाहाबाद हाईकोर्ट बार से शुरुआत; शुरुआती दिनों में अवसरों की कमी का सामना किया |
| संस्थागत सुधार | अदालत का स्वचालन (Automation), डिजिटलीकरण और पेपरलेस कोर्ट (Paperless Court) की पायलट शुरुआत |
| मुख्य मंत्र | विनम्रता, व्यापक अध्ययन और ईमानदारी से बनाई गई प्रतिष्ठा ही सबसे स्थायी संपत्ति है। |

