Saturday, October 24, 2026
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Pak Court: नाबालिग हिंदू बहनों का जबरन धर्मांतरण और बाल विवाह अवैध; सिंध हाईकोर्ट (हैदराबाद पीठ) ने 13 और 14 वर्षीय बहनों को माता-पिता के पास लौटने की दी अनुमति

घटनाक्रम और कानूनी लड़ाई

  1. अपहरण और जबरन शादी:दोनों नाबालिग बहनों का 29 अगस्त को उनके घर के पास से अपहरण कर लिया गया था। परिजनों का आरोप है कि अपहरण के तुरंत बाद बच्चियों का जबरन धर्मांतरण कराया गया और उनकी अनिच्छा के बावजूद उनकी शादी उम्र में काफी बड़े मुस्लिम व्यक्तियों से कर दी गई।
  2. सत्र अदालत (Session Court) का रुख:सितंबर में पुलिस द्वारा बचाए जाने के बाद दोनों बहनों को टंडो अल्लायार की सत्र अदालत में तीन बार पेश किया गया। दोनों बच्चियों ने रो-रोकर अपने माता-पिता के साथ जाने की गुहार लगाई, लेकिन सत्र न्यायाधीश ने उन्हें उनके माता-पिता के पास भेजने के बजाय महिला शेल्टर होम (Dar-ul-Aman) भेज दिया था।
  3. हाईकोर्ट में सुनवाई और राहत:हिंदू समुदाय कल्याण संगठन ‘पाकिस्तान दरावर इत्तेहाद’ (Pakistan Darawar Ittehad) और पीड़ित परिवार के वकील संजय शर्मा के कड़े कानूनी प्रयासों के बाद मामला सिंध हाईकोर्ट पहुँचा। हाईकोर्ट ने मामले की संवेदनशीलता और बच्चियों की नाबालिग उम्र को देखते हुए उन्हें तुरंत उनके माता-पिता को सौंपने का आदेश दिया।

मानवाधिकार संगठनों की प्रतिक्रिया और मांगें

  • पाकिस्तान दरावर इत्तेहाद के प्रमुख शिवा काछी (Shiva Kaachi) ने कहा कि सिंध में गरीब, हाशिए पर मौजूद और असुरक्षित अल्पसंख्यक समुदायों के अधिकारों की रक्षा के लिए वे लगातार संघर्ष कर रहे हैं।
  • उन्होंने जोर देकर कहा:“नाबालिग लड़कियों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। पाकिस्तान सरकार, पुलिस और संबंधित अधिकारियों को नाबालिग लड़कियों के अपहरण, जबरन धर्म परिवर्तन और बाल विवाह को रोकने के लिए प्रभावी व सख्त कदम उठाने होंगे।”
  • परिवार का प्रतिनिधित्व कर रहे एडवोकेट संजय शर्मा ने बताया कि वे ऐसे कई अन्य हिंदू परिवारों के मामलों में भी कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं, जिनकी बेटियों का अपहरण कर जबरन निकाह कराया गया है।

कराची/हैदराबाद (सिंध): सिंध बाल विवाह निरोधक अधिनियम, 2013 (Sindh Child Marriage Restraint Act, 2013 – धारा 3 एवं 4 के तहत 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों का विवाह संज्ञेय व गैर-जमानती अपराध), पाकिस्तान दंड संहिता (PPC) की धारा 364A / 365B (नाबालिगों का अपहरण और विवाह हेतु विवश करना), अवयस्कों की विधिक कस्टडी (Custody of Minors to Natural Guardians), जबरन धर्मांतरण (Forced Religious Conversion), तथा धार्मिक अल्पसंख्यक समुदायों के संवैधानिक अधिकारों पर सिंध उच्च न्यायालय (हैदराबाद पीठ) ने एक अत्यंत संवेदनशील और महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है।

सिंध उच्च न्यायालय की हैदराबाद सर्किट पीठ ने 13 और 14 वर्ष की दो नाबालिग हिंदू बहनों को उनके माता-पिता के संरक्षण में लौटने की अनुमति दे दी है। इन बच्चियों का कथित तौर पर सिंध प्रांत के टांडो अल्लाहयार से अपहरण कर जबरन इस्लाम में धर्मांतरित किया गया था और उनकी उम्र से काफी बड़े मुस्लिम पुरुषों से जबरन निकाह करा दिया गया था।

अदालत ने सत्र अदालत (Sessions Court) के उस आदेश को दरकिनार किया जिसके तहत बच्चियों द्वारा माता-पिता के साथ जाने की बार-बार गुहार लगाने के बावजूद उन्हें शेल्टर होम (दारुल अमान) में रखा गया था। उच्च न्यायालय ने बच्चियों को उनके माता-पिता के हवाले करने का आदेश दिया और दोनों मुख्य आरोपी पुरुषों के विरुद्ध कानूनी धाराओं में प्राथमिकी दर्ज करने की पुष्टि की।

सिंध उच्च न्यायालय के मुख्य कानूनी बिंदु एवं निर्देश

1. नाबालिगों की कस्टडी प्राकृतिक अभिभावकों (माता-पिता) का वैधानिक अधिकार

  • अदालत ने माना कि 13 और 14 वर्ष की आयु में बच्चियां कानूनन अवयस्क (Minor) हैं।
  • कानून के अनुसार, किसी भी अवयस्क की सहमति का कोई विधिक मूल्य नहीं होता और उन्हें उनके प्राकृतिक अभिभावकों (Natural Guardians) के संरक्षण से अलग नहीं रखा जा सकता, विशेषकर जब वे स्वयं अपने माता-पिता के साथ जाने की इच्छा प्रकट कर रही हों।
  • सत्र अदालत द्वारा बच्चियों को तीन बार पेश किए जाने के बाद भी महिला आश्रय गृह (Women’s Shelter Home) में भेजने का निर्णय अनुचित था, जिसे उच्च न्यायालय ने सुधारते हुए तत्काल पारिवारिक पुनर्मिलन का आदेश दिया।

2. बाल विवाह निरोधक कानून के तहत विवाह स्वतः अमान्य:

  • सिंध प्रांत में लागू सिंध बाल विवाह निरोधक अधिनियम, 2013 के तहत 18 वर्ष से कम आयु के किसी भी व्यक्ति (लड़का या लड़की) का विवाह पूर्णतः प्रतिबंधित और दंडनीय अपराध है।
  • चूंकि दोनों बच्चियों की आयु क्रमशः 13 और 14 वर्ष है, इसलिए कथित धर्मांतरण के बाद किए गए निकाह की कोई कानूनी मान्यता नहीं है और यह कानून की दृष्टि में शून्य (Void ab initio) है।

3. आरोपियों के विरुद्ध आपराधिक अभियोजन:

  • उच्च न्यायालय ने अपहरण और अवैध विवाह के आरोपी दोनों पुरुषों के खिलाफ दर्ज FIR के तहत त्वरित और निष्पक्ष जांच जारी रखने का निर्देश दिया।

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मामले की तथ्यात्मक पृष्ठभूमि एवं प्रक्रियात्मक कालक्रम

चरण / विवरणतथ्यात्मक स्थिति एवं पक्षों की भूमिका
पीड़ित बच्चियों का विवरणदो सगी हिंदू बहनें, जिनकी आयु क्रमशः 13 वर्ष और 14 वर्ष है।
अपहरण की घटना29 अगस्त को सिंध प्रांत के टांडो अल्लाहयार (Tando Allahyar) स्थित इब्राहिम कॉलोनी में उनके घर के पास से दोनों बहनों का अपहरण कर लिया गया था।
जबरन निकाह व धर्मांतरणअपहर्ताओं ने दोनों नाबालिग बहनों का जबरन धर्म परिवर्तन कराया और उनकी मर्जी के खिलाफ उनसे काफी बड़ी उम्र के दो मुस्लिम पुरुषों से उनका निकाह करा दिया।
सत्र अदालत (Sessions Court) का रुखसितंबर में पुलिस द्वारा बरामद किए जाने के बाद दोनों बहनों को टांडो अल्लाहयार की सत्र अदालत में तीन बार पेश किया गया। दोनों ने रोते हुए न्यायाधीश से अपने माता-पिता के साथ घर जाने की प्रार्थना की, किंतु अदालत ने उन्हें परिवार को सौंपने के बजाय सरकारी महिला शेल्टर होम भेज दिया।
मानवाधिकार संगठनों का हस्तक्षेपअल्पसंख्यक कल्याण हेतु कार्यरत गैर-सरकारी संगठन ‘पाकिस्तान दरावर इत्तेहाद’ (Pakistan Darawar Ittehad) के अध्यक्ष शिवा काछी और पीड़ित परिवार के वकील अधिवक्ता संजय शर्मा ने मामले को सिंध उच्च न्यायालय (हैदराबाद पीठ) के समक्ष उठाया।
उच्च न्यायालय का अंतिम निर्णयहाईकोर्ट ने बच्चियों को उनके माता-पिता के संरक्षण में वापस भेजने का आदेश दिया और कानूनी औपचारिकताएं पूरी कर उन्हें घर भेजा गया।

विधिक एवं सामाजिक विश्लेषण: अल्पसंख्यक नाबालिगों के अधिकार

  • सिंध बाल विवाह निरोधक कानून, 2013 की धारा 3 व 4:
    • सिंध पाकिस्तान का एकमात्र ऐसा प्रांत है जहाँ विवाह की न्यूनतम कानूनी आयु लड़के और लड़की दोनों के लिए 18 वर्ष निर्धारित है।
    • इस कानून के तहत यदि कोई वयस्क व्यक्ति 18 वर्ष से कम आयु की लड़की से विवाह करता है, या जो कोई ऐसा विवाह संपन्न कराता है (जैसे काजी या मौलवी), वह 3 वर्ष तक के कठोर कारावास और जुर्माने से दंडनीय है। यह अपराध संज्ञेय, गैर-जमानती और गैर-शमनीय है।
  • कथित सहमति और नाबालिग की विधिक अक्षमता:
    • जबरन धर्मांतरण और बाल विवाह के मामलों में अक्सर आरोपियों द्वारा यह दलील दी जाती है कि लड़की ने अपनी मर्जी से धर्म बदला और निकाह किया।
    • कानूनी न्यायशास्त्र के अनुसार, 13-14 वर्ष की बालिका विधि की दृष्टि में अपनी सहमति देने के लिए सक्षम (Competent to consent) नहीं होती। अतः किसी भी धार्मिक प्रमाण पत्र या हलफनामे के आधार पर बाल विवाह को वैध नहीं ठहराया जा सकता।
  • पाकिस्तान दरावर इत्तेहाद की भूमिका:
    • संगठन के प्रमुख शिवा काछी और अधिवक्ता संजय शर्मा ने रेखांकित किया कि ग्रामीण सिंध में गरीब और हाशिए पर खड़े हिंदू परिवारों की नाबालिग लड़कियों का अपहरण और जबरन निकाह एक गंभीर सामाजिक और विधिक संकट बन चुका है।
    • उन्होंने मांग की कि पुलिस और न्यायिक तंत्र को शेल्टर होम भेजने की औपचारिकता के बजाय ऐसे मामलों में तुरंत अपहरण और बाल विवाह कानूनों के तहत आरोपियों को गिरफ्तार कर सख्त सजा दिलानी चाहिए।

विधिक विवरण

  • न्यायालय: सिंध उच्च न्यायालय (हैदराबाद सर्किट पीठ, पाकिस्तान)
  • आदेश की तिथि: अक्टूबर 2026
  • संबद्ध अधिकार क्षेत्र: टांडो अल्लाहयार, सिंध प्रांत

पक्षकारों का विधिक विवरण:

  • पीड़ित: दो नाबालिग हिंदू सगी बहनें (आयु 13 वर्ष एवं 14 वर्ष)
  • पीड़ित परिवार के विधिक प्रतिनिधि: अधिवक्ता संजय शर्मा (Advocate Sanjay Sharma)
  • सहयोगी मानवाधिकार संस्था: पाकिस्तान दरावर इत्तेहाद (अध्यक्ष: शिवा काछी)
  • आरोपी: दो स्थानीय वयस्क पुरुष (जिनके विरुद्ध धारा 365B PPC व बाल विवाह अधिनियम के तहत FIR दर्ज)
  • प्रासंगिक कानून एवं विधिक प्रावधान:
    • सिंध बाल विवाह निरोधक अधिनियम, 2013 (Sindh Child Marriage Restraint Act, 2013) — धारा 2(a) (18 वर्ष से कम आयु के बच्चे की परिभाषा) एवं धारा 3 व 4 (बाल विवाह हेतु दंड)
    • पाकिस्तान दंड संहिता (PPC) — धारा 365B (विवाह आदि हेतु विवश करने के उद्देश्य से किसी महिला का अपहरण)
    • अभिभावक एवं प्रतिपाल्य अधिनियम, 1890 (Guardians and Wards Act, 1890) — धारा 17 व 25 (माता-पिता की कस्टडी का अधिकार)
  • संबद्ध न्यायिक सिद्धांत:
    • नाबालिग का संरक्षण और बाल विवाह का निषेध: ’18 वर्ष से कम आयु की अवयस्क बालिकाओं का विवाह कानूनन शून्य है; कथित धर्मांतरण की आड़ में नाबालिगों को उनके माता-पिता के संरक्षण से वंचित नहीं किया जा सकता; यदि नाबालिग माता-पिता के साथ जाना चाहती हैं, तो उन्हें शेल्टर होम में रखने के बजाय सीधे उनके प्राकृतिक अभिभावकों को सौंपा जाना अनिवार्य है।’
  • अंतिम परिणाम: सिंध उच्च न्यायालय की हैदराबाद पीठ ने दोनों नाबालिग हिंदू बहनों को उनके माता-पिता के संरक्षण में घर लौटने की पूर्ण अनुमति दी; बच्चियों को परिवार से मिलाया गया; आरोपियों के विरुद्ध दर्ज प्राथमिकी के तहत आपराधिक जांच जारी रखने का निर्देश।

Pak Court:मामले का संक्षिप्त विवरण (At A Glance)

विवरणजानकारी
संबंधित अदालतसिंध उच्च न्यायालय – हैदराबाद पीठ (Sindh High Court)
पीड़ितों का विवरण13 और 14 वर्ष की दो नाबालिग हिंदू बहनें
घटनास्थलइब्राहिम कॉलोनी, टंडो अल्लायार (Tando Allahyar), सिंध प्रांत, पाकिस्तान
घटना की तिथि29 अगस्त (अपहरण की तिथि)
मुख्य कानूनी मुद्देअल्पसंख्यकों का जबरन धर्मांतरण, नाबालिगों का अपहरण, और बाल विवाह (Child Marriage)।
अदालत का अंतिम आदेशमाता-पिता को सुपुर्दगी; दोनों बच्चियों को घर लौटने की अनुमति और आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज।
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