मामले की पृष्ठभूमि: क्या था पूरा विवाद?
- प्राधिकरण द्वारा स्वतः संज्ञान (Suo Motu Examination):CCPA ने ब्रिटानिया द्वारा अपनी ब्रेड के प्रचार में किए जा रहे दावों, जैसे “100% होल व्हीट ब्रेड”, “0% मैदा” और इसे स्वस्थ आहार के अनुकूल बताने वाले बयानों की स्वतः जांच शुरू की थी।
- जांच में हुआ खुलासा:जांच में पाया गया कि ब्रेड के कुल अवयवों में केवल 62% साबुत गेहूं का आटा था। बाकी 38% हिस्से में पानी, खमीर (yeast), गेहूं का चोकर (wheat bran) और अन्य सामग्रियां शामिल थीं।
- ब्रिटानिया का बचाव और तर्क:ब्रिटानिया ने दलील दी कि “100%” अभिव्यक्ति ब्रेड के ‘गेहूं घटक’ (Wheat Component) को संदर्भित करती है, जिसमें बिना किसी मैदा के केवल गेहूं का आटा शामिल था। कंपनी ने छोटे अक्षरों में लिखी डिस्क्लेमर लाइन “Made From 100% Whole Wheat Flour on Flour Basis” का भी हवाला दिया।
CCPA के मुख्य निष्कर्ष और कानूनी तर्क
1. “100% का अर्थ समग्र संरचना से है”:
प्राधिकरण ने कंपनी की इस व्याख्या को पूरी तरह खारिज कर दिया कि प्रतिशत की गणना केवल गेहूं के आटे के आधार पर की जानी चाहिए: “100% की अभिव्यक्ति पूरी संरचना की समग्रता (Totality of composition) को दर्शाती है, न कि किसी एक श्रेणी की सामग्री की चयनात्मक विशिष्टता (Selective Exclusivity) को।”
2. छोटे डिस्क्लेमर से गुमराह करने वाला असर खत्म नहीं होता:
- CCPA ने माना कि पैकेजिंग पर मुख्य रूप से बड़े अक्षरों में “100% Whole Wheat” लिखना और नीचे छोटे अक्षरों में “Flour Basis” लिखना उपभोक्ताओं को भ्रमित करने की एक रणनीति है। छोटा डिस्क्लेमर मुख्य भ्रामक दावे को वैध नहीं बना सकता।
3. FSSAI के नियमों का उल्लंघन:
- प्राधिकरण ने नोट किया कि भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने भी खाद्य व्यवसायों को अपने उत्पादों के विज्ञापनों और लेबलों पर “100%” शब्द का उपयोग करने के प्रति आगाह किया है और इसे भ्रामक माना है।
नई दिल्ली: उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 (Consumer Protection Act, 2019) की धारा 2(28) (भ्रामक विज्ञापन / Misleading Advertisement), धारा 2(47) (अनुचित व्यापार व्यवहार / Unfair Trade Practice), धारा 10 एवं 21 (केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण द्वारा दंड अधिरोपण व विज्ञापनों को वापस लेने की शक्तियां), भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) के लेबलिंग व प्रदर्शन विनियम, तथा एफएमसीजी (FMCG) खाद्य उत्पादों में भ्रामक दावों के खिलाफ ‘अग्रभाग लेबलिंग’ (Front-of-Pack Labeling) के विधिक मानकों पर केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने एक कड़ा विनियामक आदेश पारित किया है।
केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण की मुख्य आयुक्त निधि खरे (Chief Commissioner Nidhi Khare) और आयुक्त अनुपम मिश्रा (Commissioner Anupam Mishra) की पीठ ने 21 अक्टूबर 2026 के अपने आदेश में देश की प्रमुख खाद्य कंपनी ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज लिमिटेड (Britannia Industries Limited) को उपभोक्ताओं को गुमराह करने का दोषी ठहराया।
प्राधिकरण ने पाया कि ब्रिटानिया अपनी ब्रेड में केवल 62% होल व्हीट आटा (Whole Wheat Flour) होने के बावजूद बड़े अक्षरों में “100% होल व्हीट ब्रेड” और “0% मैदा” का भ्रामक प्रचार कर रही थी, जबकि शेष 38% हिस्से में पानी, यीस्ट और व्हीट ब्रैन जैसे अन्य घटक मौजूद थे। प्राधिकरण ने ब्रिटानिया पर ₹1,00,000 (एक लाख रुपये) का मौद्रिक जुर्माना लगाया है और सभी माध्यमों से इन भ्रामक विज्ञापनों और पैकेजिंग को तत्काल बंद कर 15 दिनों के भीतर अनुपालन रिपोर्ट (Compliance Report) प्रस्तुत करने का सख्त निर्देश दिया है।
CCPA के मुख्य विनियामक निष्कर्ष एवं विधिक व्यवस्था
1. ‘100% का अर्थ समग्र संरचना की पूर्णता है, न कि चयनात्मक विशिष्टता’
मुख्य आयुक्त निधि खरे और आयुक्त अनुपम मिश्रा की पीठ ने विज्ञापनों में “100%” शब्द के उपयोग का सूक्ष्म विधिक विश्लेषण करते हुए दर्ज किया: “विपक्षी पक्ष (ब्रिटानिया) ने न केवल विवादित उत्पाद में साबुत गेहूं (Whole Wheat) के वास्तविक अनुपात को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया है, बल्कि ऐसे उत्पाद नामकरण (Product Nomenclature) का प्रयोग किया है जो स्थापित तथ्यों के आधार पर विहित संरचनात्मक आवश्यकताओं (Prescribed Compositional Requirements) के पूरी तरह असंगत है। ‘100%’ शब्द का उपयोग उत्पाद की समग्र संरचना की पूर्णता (Totality of Composition) को दर्शाता है, न कि किसी एक सामग्री श्रेणी की चयनात्मक विशिष्टता (Selective Exclusivity of a Single Category) को।”
2. छोटे अक्षरों में लिखा डिस्क्लेमर भ्रामक दावे को वैध नहीं बना सकता:
- ब्रिटानिया ने बचाव में तर्क दिया था कि उसने पैकेट पर छोटे अक्षरों में यह स्पष्टीकरण (Disclaimer) लिखा है: “Made From 100% Whole Wheat Flour on Flour Basis” (यानी आटे के घटक के आधार पर 100% गेहूं का आटा)।
- CCPA ने इस बचाव को सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि पैकेट के अग्रभाग पर प्रमुखता से प्रदर्शित “100% होल व्हीट ब्रेड” का जो भ्रामक प्रभाव एक सामान्य उपभोक्ता के मन पर पड़ता है, उसे पीछे या नीचे बहुत छोटे अक्षरों में लिखा कोई तकनीकी स्पष्टीकरण ठीक नहीं कर सकता।
3. FSSAI के दिशा-निर्देशों और 75% न्यूनतम सीमा का उल्लंघन:
- प्राधिकरण ने नोट किया कि खाद्य संरक्षा एवं मानक (लेबलिंग एवं प्रदर्शन) विनियमों के अनुसार, किसी भी ब्रेड को “होल व्हीट ब्रेड” के रूप में विपणन करने के लिए उसमें कम से कम 75% होल व्हीट आटा होना अनिवार्य है। ब्रिटानिया की जांच में केवल 62% निकला।
- इसके अतिरिक्त, FSSAI ने पूर्व में ही एक स्पष्ट परामर्श (Advisory) जारी कर खाद्य व्यवसायों को अपने लेबल और विज्ञापनों में “100%” शब्द के भ्रामक उपयोग से बचने की सख्त हिदायत दी थी।
4. ‘तीन स्लाइस = एक रोटी’ के पोषण दावे पर भी सवाल:
- प्राधिकरण ने ब्रिटानिया के उस प्रचार अभियान पर भी गंभीर आपत्ति जताई जिसमें यह दावा किया गया था कि इस ब्रेड की तीन स्लाइस एक पारंपरिक रोटी के बराबर डाइटरी फाइबर प्रदान करती हैं और यह स्वास्थ्यवर्धक आहार (Healthy Diet) के लिए आदर्श है। सीसीपीए ने पाया कि ऐसे तुलनात्मक दावे उपभोक्ताओं को गलत आहार धारणा की ओर धकेलते हैं।
तथ्यात्मक संरचना एवं जांच निष्कर्ष
| घटक / पैरामीटर | ब्रिटानिया का दावा बनाम वास्तविक विधिक स्थिति |
| उत्पाद का नाम | ब्रिटानिया 100% होल व्हीट ब्रेड (Britannia 100% Whole Wheat Bread) |
| जांच में पाया गया अनुपात | कुल वजन का 62% होल व्हीट आटा; शेष 38% में पानी, यीस्ट, व्हीट ब्रैन व अन्य घटक। |
| कंपनी का विधिक बचाव | कंपनी ने तर्क दिया कि “100%” का संदर्भ ब्रेड में इस्तेमाल किए गए आटे से था, यानी आटे में कोई मैदा नहीं मिलाया गया और पूरा आटा साबुत गेहूं का था। |
| प्राधिकरण का खंडन | उपभोक्ता ब्रेड खरीदते समय पूरे उत्पाद को देखता है, न कि केवल आटे के अनुपात को। जब तक पूरी ब्रेड केवल और केवल उसी घटक से न बनी हो, तब तक “100%” लिखना भ्रामक है। |
| FSSAI मानक | होल व्हीट ब्रेड कहलाने के लिए कम से कम 75% साबुत गेहूं अनिवार्य है; 62% पर ऐसा नामकरण गैर-कानूनी है। |
| अधिरोपित दंड | ₹1 लाख का जुर्माना; विज्ञापनों को सभी टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया से तत्काल हटाने का आदेश; 15 दिन में अनुपालन हलफनामा। |
प्रक्रियात्मक कालक्रम: स्वतः संज्ञान से विनियामक कार्रवाई तक
विधिक एवं उपभोक्ता न्यायशास्त्र: भ्रामक विज्ञापन और उपभोक्ता संरक्षण कानून
- भ्रामक विज्ञापन (Misleading Advertisement) का विधिक मानक:
- उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 2(28) स्पष्ट रूप से कहती है कि कोई भी विज्ञापन भ्रामक माना जाएगा यदि वह किसी उत्पाद की सामग्री, गुणवत्ता या उसके प्रभाव के बारे में असत्य गारंटी देता है या महत्वपूर्ण जानकारी को छिपाकर उपभोक्ता को गुमराह करता है।
- ब्रेड के पैकेट पर “100% होल व्हीट” लिखना एक आम उपभोक्ता को यह विश्वास दिलाता है कि वह एक शुद्ध गेहूं उत्पाद खरीद रहा है, जबकि उसमें 38% अन्य सामग्री मौजूद होती है।
- अनुचित व्यापार व्यवहार (Unfair Trade Practice):
- धारा 2(47) के तहत किसी उत्पाद की विशिष्टताओं को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करना ताकि बाजार में अनुचित वाणिज्यिक लाभ (Unfair Commercial Advantage) प्राप्त किया जा सके, एक दंडनीय कृत्य है।
- उपभोक्ता अधिकार और पारदर्शिता:
- आज के स्वास्थ्य-सचेत युग में नागरिक मैदा रहित और शुद्ध साबुत अनाज के उत्पादों के लिए अतिरिक्त मूल्य चुकाने को तैयार रहते हैं। ऐसे में ब्रांडों द्वारा शब्दों के खेल (Wordplay / Semantic Tricks) के जरिए उपभोक्ताओं की भावनाओं और स्वास्थ्य प्राथमिकताओं का दोहन करना उपभोक्ता अधिकारों का सीधा हनन है।
विधिक विवरण एवं उपस्थित अधिवक्ता
- अधिकरण: केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA), नई दिल्ली
- पीठ: निधि खरे (मुख्य आयुक्त) एवं अनुपम मिश्रा (आयुक्त)
- आदेश की तिथि: 21 अक्टूबर 2026
- संबंधित कंपनी: ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज लिमिटेड (Britannia Industries Limited)
- अनुपालन समय-सीमा: 15 दिन
विधिक प्रतिनिधित्व:
- ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज लिमिटेड की ओर से: अधिवक्ता संदीप कुमार, मोहम्मद मोहसिन बेग, ताहिर निजाम एवं सिद्धार्थ जैन
- प्रासंगिक कानून एवं विधिक प्रावधान:
- उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 — धारा 2(28) (भ्रामक विज्ञापन), धारा 2(47) (अनुचित व्यापार व्यवहार), धारा 10 (CCPA की स्थापना) एवं धारा 21 (भ्रामक विज्ञापनों के विरुद्ध कार्रवाई व जुर्माना)
- खाद्य संरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 (FSS Act) — लेबलिंग, पैकेजिंग एवं प्रदर्शन विनियम
- FSSAI परामर्श दिशानिर्देश — विज्ञापनों और खाद्य पैकेटों पर “100%” के उपयोग पर प्रतिबंध
- संबद्ध विनियामक सिद्धांत:
- खाद्य लेबलिंग में पूर्णता का सिद्धांत: ‘खाद्य उत्पादों के अग्रभाग पर “100%” का दावा उत्पाद की समग्र सामग्री संरचना को दर्शाता है; यदि किसी उत्पाद में 38% अन्य घटक शामिल हैं, तो तकनीकी व्याख्याओं या सूक्ष्म डिस्क्लेमर्स के आधार पर 100% का प्रचार करना उपभोक्ताओं को धोखा देना और कानूनन भ्रामक विज्ञापन है।’
- अंतिम परिणाम: ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज पर ₹1,00,000 का जुर्माना अधिरोपित; भ्रामक “100% होल व्हीट ब्रेड” और “0% मैदा” वाले विज्ञापनों को सभी प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल माध्यमों से तत्काल वापस लेने का आदेश; कंपनी को 15 दिनों के भीतर प्राधिकरण के समक्ष अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश।
Britannia Industries: मामले का संक्षिप्त विवरण (At A Glance)
| विवरण | जानकारी |
| संबंधित प्राधिकरण | केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) |
| प्राधिकरण पीठ | मुख्य आयुक्त निधि खरे एवं आयुक्त अनुपम मिश्रा |
| कंपनी / प्रतिवादी | ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज लिमिटेड (Britannia Industries Limited) |
| भ्रामक दावा | ब्रेड को “100% Whole Wheat Bread” और “0% Maida” बताकर प्रचारित करना। |
| वास्तविक संरचना | उत्पाद में केवल 62% होल व्हीट आटा था, जबकि शेष 38% अन्य सामग्री (पानी, ईस्ट, गेहूं का चोकर/Bran आदि) थी। |
| आदेश / जुर्माना | ₹1 लाख का जुर्माना; सभी मीडिया से भ्रामक विज्ञापन तुरंत हटाने और 15 दिनों के भीतर अनुपालन रिपोर्ट (Compliance Report) सौंपने का निर्देश। |

