Saturday, October 24, 2026
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FSSAI Power: महाराष्ट्र सरकार FSSAI के खिलाफ हाईकोर्ट गई; FSSAI ने असंवैधानिक रूप से समानांतर व्यवस्था खड़ी कर राज्यों के अधिकार हड़पे

मामले की पृष्ठभूमि: क्या है पूरा विवाद?

  1. खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2006 का ढांचा:खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 (FSSA, 2006) के तहत खाद्य विनियमन में विकेंद्रीकरण (Decentralisation) का प्रावधान है। अधिनियम के अनुसार भूमि पर वास्तविक लाइसेंस जारी करने और कानून लागू करने (Enforcement) का अधिकार राज्य के खाद्य सुरक्षा आयुक्तों और उनके नामित अधिकारियों के पास निहित है।
  2. केंद्र द्वारा समानांतर व्यवस्था बनाने का आरोप:राज्य का आरोप है कि FSSAI के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) ने अपने अधिकारों का अतिक्रमण करते हुए ‘सेंट्रल फूड सेफ्टी ऑफिसर’ और ‘सेंट्रल लाइसेंसिंग अथॉरिटी’ जैसे नए पद बना दिए, जो मूल वैधानिक कानून की भावना के विपरीत हैं। राज्य के अनुसार, FSSAI के सीईओ की प्रवर्तन भूमिका केवल आयातित खाद्य पदार्थों (Imported Food) तक सीमित है, न कि घरेलू खाद्य व्यवसायों तक।
  3. 12 मई 2023 का आदेश और विवाद:विवाद तब अधिक गहरा गया जब FSSAI ने 12 मई 2023 को एक निर्देश जारी कर राज्य के खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को उन व्यवसायों/इकाइयों का निरीक्षण (Inspection) करने से रोक दिया, जिनके पास केंद्रीय लाइसेंस (Central License) है।

याचिका में उठाए गए मुख्य कानूनी तर्क

1. FSSAI के CEO के अधिकारों की सीमा:

महाराष्ट्र सरकार का तर्क है कि FSSA, 2006 के तहत राज्य का आयुक्त ही खाद्य कानून के प्रवर्तन का मुख्य केंद्र है। FSSAI ने समानांतर व्यवस्था खड़ी करके राज्यों के संवैधानिक और वैधानिक अधिकारों का हनन किया है।

2. जनरल क्लॉजेज एक्ट की धारा 23 का उल्लंघन:

  • राज्य ने 10 मार्च और 13 मार्च 2026 की उन अधिसूचनाओं को भी चुनौती दी है जिनके द्वारा खाद्य व्यवसायों के लिए टर्नओवर सीमाओं को संशोधित किया गया था। याचिका में दावा किया गया है कि ये संशोधन जनता से आपत्तियां आमंत्रित किए बिना लागू किए गए, जो जनरल क्लॉजेज एक्ट (General Clauses Act) की धारा 23 का सीधा उल्लंघन है।

3. FoSCoS पोर्टल के माध्यम से नियंत्रण:

  • राज्य का दावा है कि ‘फूड सेफ्टी कॉम्प्लायंस सिस्टम’ (FoSCoS) पोर्टल का उपयोग करके खाद्य व्यवसायों को प्रणालीगत रूप से राज्य के नियंत्रण से निकालकर केंद्र के क्षेत्राधिकार में ले जाया जा रहा है।

याचिकाकर्ताओं द्वारा मांगी गई मुख्य राहतें (Relief Sought)

  1. FSSAI के 2011 के लाइसेंसिंग नियम, 2018 के भर्ती नियम और 2026 के संशोधन नियमों को असंवैधानिक घोषित कर रद्द किया जाए।
  2. 12 मई 2023 के उस आदेश पर तुरंत रोक (Stay) लगाई जाए जो राज्य अधिकारियों को केंद्रीय लाइसेंस वाली इकाइयों का निरीक्षण करने से रोकता है।
  3. FSSAI को निर्देश दिया जाए कि वह सभी लाइसेंसिंग डेटाबेस को संबंधित राज्य-नामित अधिकारियों को वापस स्थानांतरित (Transfer) करे।

मुंबई: खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 (Food Safety and Standards Act, 2006 – FSSA) की धारा 29 एवं 30 (राज्य खाद्य सुरक्षा आयुक्त एवं पदनामित अधिकारियों की वैधानिक शक्तियां), भारत का संविधान के अनुच्छेद 246 व 7वीं अनुसूची की प्रविष्टि 6 (राज्य सूची: सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं स्वच्छता), केंद्र बनाम राज्य संघवाद (Cooperative Federalism), साधारण खंड अधिनियम, 1897 की धारा 23 (नियम बनाने से पूर्व अनिवार्य जन-आपत्तियां आमंत्रित करने का उल्लंघन), तथा केंद्रीय लाइसेंस धारक इकाइयों के निरीक्षण से राज्य अधिकारियों को रोकने के विधिक अधिकार पर महाराष्ट्र सरकार ने बॉम्बे उच्च न्यायालय में एक अत्यंत व्यापक एवं ऐतिहासिक संवैधानिक याचिका दायर की है।

महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के खाद्य सुरक्षा आयुक्त (State Commissioner of Food Safety) के माध्यम से दायर इस याचिका में आरोप लगाया है कि भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) और केंद्र सरकार ने एक असंवैधानिक समानांतर प्रवर्तन तंत्र (Parallel Enforcement Regime) खड़ा करके राज्यों के वैधानिक व संवैधानिक अधिकारों का अतिक्रमण (Usurpation) किया है।

याचिका में 2011 के लाइसेंसिंग विनियमों, 2018 के भर्ती विनियमों, 2026 के संशोधन विनियमों और ऑनलाइन FoSCoS पोर्टल व्यवस्था को निरस्त करने की मांग की गई है। मुख्य न्यायाधीश महेश सी. त्रिपाठी और न्यायमूर्ति अद्वैत सेठना की खंडपीठ इस याचिका पर 26 नवंबर 2026 को सुनवाई करेगी।

महाराष्ट्र सरकार की याचिका के मुख्य कानूनी आधार एवं संवैधानिक तर्क

1. ‘FSSA, 2006 का मूल ढांचा विकेंद्रीकृत है; जमीन पर प्रवर्तन केवल राज्यों का वैधानिक अधिकार’

महाराष्ट्र सरकार ने दलील दी है कि 2006 के अधिनियम का विधायी उद्देश्य खाद्य विनियमन का विकेंद्रीकरण (Decentralisation) था:

  • अधिनियम की धारा 29 और 30 के तहत लाइसेंस जारी करने, पंजीकरण करने, निरीक्षण करने और कानूनी प्रवर्तन की वास्तविक शक्तियां राज्य के खाद्य सुरक्षा आयुक्त (State Food Safety Commissioner) और उनके द्वारा नियुक्त पदनामित अधिकारियों (Designated Officers) व राज्य खाद्य सुरक्षा अधिकारियों (Food Safety Officers) में निहित हैं।
  • केंद्र सरकार और FSSAI ने पिछले कुछ वर्षों में नियमों और परिपत्रों के माध्यम से इस विकेंद्रीकृत व्यवस्था को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है और राज्यों के अधिकार अपने हाथ में ले लिए हैं।

2. ‘सेंट्रल फूड सेफ्टी ऑफिसर’ और ‘सेंट्रल लाइसेंसिंग अथॉरिटी’ के पद गैर-कानूनी:

  • याचिका में तर्क दिया गया है कि FSSAI के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) ने अवैध रूप से अपनी शक्तियों का विस्तार करते हुए ‘सेंट्रल फूड सेफ्टी ऑफिसर’ (CFSO) और ‘सेंट्रल लाइसेंसिंग अथॉरिटी’ (CLA) जैसे नए पदों का सृजन कर दिया है।
  • राज्य का कहना है कि 2006 के मूल अधिनियम के वैधानिक ढांचे में इन केंद्रीय प्रवर्तन पदों का कोई अस्तित्व ही नहीं है। मूल कानून के तहत FSSAI के सीईओ की प्रवर्तन भूमिका केवल ‘आयातित खाद्य पदार्थों’ (Imported Food Articles) तक सीमित है, न कि राज्यों के भीतर घरेलू स्तर पर जमीनी प्रवर्तन (Domestic Ground Enforcement) की।

3. 12 मई 2023 का विवादित निर्देश: राज्य के अधिकारियों पर निरीक्षण की रोक असंवैधानिक:

  • विवाद तब चरम पर पहुंचा जब FSSAI ने 12 मई 2023 को एक निर्देश जारी कर राज्य के खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को उन खाद्य व्यवसायों का निरीक्षण करने से पूरी तरह रोक दिया, जिनके पास केंद्रीय लाइसेंस (Central License) है।
  • राज्य का कहना है कि राज्य के भीतर नागरिकों के स्वास्थ्य और स्वच्छता की रक्षा करना राज्य का संवैधानिक दायित्व है। केंद्र यह तय नहीं कर सकता कि राज्य का अधिकारी अपनी भौगोलिक सीमा में स्थित किसी मिलावटखोर या केंद्रीय लाइसेंस वाले प्रतिष्ठान की जांच नहीं कर सकता।

4. FoSCoS पोर्टल के माध्यम से राज्यों के अधिकारों का केंद्रीकरण:

  • याचिका में आरोप लगाया गया है कि ऑनलाइन खाद्य सुरक्षा अनुपालन प्रणाली (Food Safety Compliance System – FoSCoS) पोर्टल को इस प्रकार डिजाइन और तैनात किया गया है कि राज्यों के अधिकार क्षेत्र में आने वाले व्यवसायों को सुनियोजित तरीके से केंद्रीय नियंत्रण के अधीन लाया जा सके।

5. साधारण खंड अधिनियम की धारा 23 का उल्लंघन:

  • याचिका में 10 मार्च और 13 मार्च 2026 को जारी उन केंद्रीय अधिसूचनाओं को भी चुनौती दी गई है, जिनके माध्यम से खाद्य व्यवसाय लाइसेंसिंग के टर्नओवर थ्रेशोल्ड (Turnover Thresholds) को संशोधित किया गया था।
  • राज्य का दावा है कि ये संशोधन जनता से आपत्तियां और सुझाव मांगे बिना (Without Prior Notice Inviting Public Objections) जल्दबाजी में लागू किए गए, जो साधारण खंड अधिनियम, 1897 की धारा 23 के वैधानिक आदेश का सीधा उल्लंघन है।

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केंद्र बनाम राज्य खाद्य प्रवर्तन विवाद का प्रक्रियात्मक कालक्रम

चरण / विवाद का विषयमहाराष्ट्र सरकार का पक्ष एवं वैधानिक आधार
चुनौती के अधीन विनियम1. खाद्य सुरक्षा एवं मानक (लाइसेंसिंग और पंजीकरण) विनियम, 2011
2. FSSAI (भर्ती एवं पद) विनियम, 2018
3. खाद्य सुरक्षा एवं मानक (संशोधन) विनियम, 2026
FSSAI का विवादित आदेश (12.05.2023)राज्य के खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे किसी भी केंद्रीय लाइसेंस प्राप्त इकाई (जैसे बड़े होटल, निर्माता आदि) का निरीक्षण नहीं कर सकते, जिससे राज्य का प्रवर्तन तंत्र पंगु हो गया।
टर्नओवर अधिसूचनाएं (मार्च 2026)10 मार्च और 13 मार्च 2026 की अधिसूचनाओं द्वारा टर्नओवर की सीमाएं बदलकर राज्य के दायरे से व्यवसाय बाहर किए गए; बिना पूर्व प्रकाशन के लागू होने से प्रक्रियागत अवैधता का आरोप।
मांगी गई मुख्य राहतें1. FSSAI के असंवैधानिक व अल्ट्रा वायर्स विनियमों को रद्द किया जाए।
2. 12 मई 2023 के उस आदेश पर अंतरिम रोक लगाई जाए जो राज्य अफसरों को निरीक्षण से रोकता है।
3. FoSCoS पोर्टल का संपूर्ण लाइसेंसिंग डेटाबेस संबंधित राज्य पदनामित अधिकारियों को वापस हस्तांतरित करने का निर्देश दिया जाए।
सुनवाई की अगली तिथि26 नवंबर 2026 (मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ के समक्ष)।

विधिक एवं संवैधानिक विश्लेषण: संघवाद और सार्वजनिक स्वास्थ्य की सीमाएं

  • संविधान की 7वीं अनुसूची और राज्य सूची की प्रविष्टि 6:
    • संविधान की 7वीं अनुसूची के तहत ‘सार्वजनिक स्वास्थ्य, स्वच्छता, अस्पताल और औषधालय’ राज्य सूची का विषय है।
    • यद्यपि संसद को समवर्ती सूची की प्रविष्टि 33 (खाद्य पदार्थों का व्यापार व वाणिज्य) के तहत कानून बनाने का अधिकार है, किंतु जब मूल कानून (FSSA, 2006) ने प्रवर्तन का दायित्व राज्य के खाद्य सुरक्षा आयुक्तों को सौंपा है, तो FSSAI प्रशासनिक आदेशों या अधीनस्थ विनियमों के जरिए इस विधायी संतुलन को पलट नहीं सकता।
  • प्रत्यायोजित विधान (Delegated Legislation) की विधिक सीमा:
    • सुस्थापित प्रशासनिक सिद्धांत है कि अधीनस्थ नियम या विनियम मूल अधिनियम (Parent Act) के दायरे से बाहर नहीं जा सकते।
    • 2006 के अधिनियम में ‘केंद्रीय खाद्य सुरक्षा अधिकारी’ या ‘केंद्रीय लाइसेंसिंग प्राधिकरण’ जैसे किसी संवर्ग का प्रावधान नहीं है। FSSAI द्वारा विनियमों के माध्यम से ऐसे पदों का गठन करना और उन्हें राज्य के संप्रभु अधिकारियों के ऊपर वरीयता देना विधायी शक्तियों के अतिक्रमण (Excessive Delegation) का मामला बनता है।

विधिक विवरण

  • केस संदर्भ: महाराष्ट्र राज्य बनाम भारत संघ एवं अन्य [रिट याचिका – बॉम्बे उच्च न्यायालय]
  • पीठ: मुख्य न्यायाधीश महेश सी. त्रिपाठी एवं न्यायमूर्ति अद्वैत सेठना (खंडपीठ)
  • याचिका दायर करने की तिथि: अक्टूबर 2026
  • सुनवाई की तिथि: 26 नवंबर 2026
  • याचिकाकर्ता: महाराष्ट्र राज्य (खाद्य सुरक्षा आयुक्त के माध्यम से)
  • प्रतिवादी: भारत संघ (स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय) एवं भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI)

प्रासंगिक कानून एवं विधिक प्रावधान:

  • खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 (FSSA) — धारा 29 (अधिनियम का प्रवर्तन), धारा 30 (राज्य खाद्य सुरक्षा आयुक्त के कर्तव्य व शक्तियां), धारा 36 (पदनामित अधिकारी), धारा 37 (खाद्य सुरक्षा अधिकारी) एवं धारा 47 (नमूना लेने की प्रक्रिया)
  • भारत का संविधान — अनुच्छेद 246 सहपठित 7वीं अनुसूची (राज्य सूची प्रविष्टि 6 – सार्वजनिक स्वास्थ्य; समवर्ती सूची प्रविष्टि 33 – खाद्य पदार्थ), अनुच्छेद 14 (मनमानी के विरुद्ध संरक्षण) एवं अनुच्छेद 226 (उच्च न्यायालय का रिट क्षेत्राधिकार)
  • साधारण खंड अधिनियम, 1897 (General Clauses Act) — धारा 23 (पूर्व प्रकाशन की शर्तों के अधीन नियम बनाने के प्रावधान)
  • संबद्ध संवैधानिक सिद्धांत:
    • सहकारी संघवाद और खाद्य सुरक्षा प्रवर्तन का विकेंद्रीकरण: ‘खाद्य सुरक्षा कानून का प्रवर्तन राज्यों के लोक स्वास्थ्य ढांचे से अविभाज्य है; केंद्र मानक तय करने वाली शीर्ष संस्था हो सकती है, किंतु अधीनस्थ नियमों के माध्यम से राज्यों के वैधानिक अधिकारियों को निरीक्षण से वंचित करना और समानांतर केंद्रीय तंत्र बनाना अधिनियम के मूल विकेंद्रीकृत ढांचे और सहकारी संघवाद के सिद्धांत का उल्लंघन है।’
  • वर्तमान स्थिति: रिट याचिका विचारार्थ स्वीकार; अंतरिम राहत और विनियमों की वैधता पर मुख्य न्यायाधीश की पीठ द्वारा 26 नवंबर 2026 को विस्तृत सुनवाई की जाएगी।

FSSAI Power: मामले का संक्षिप्त विवरण (At A Glance)

विवरणजानकारी
संबंधित अदालतबॉम्बे उच्च न्यायालय (Bombay High Court)
पीठमुख्य न्यायाधीश महेश सी. त्रिपाठी एवं न्यायमूर्ति अद्वैत सेठना
याचिकाकर्तामहाराष्ट्र राज्य (खाद्य सुरक्षा आयुक्त के माध्यम से)
प्रतिवादीभारत संघ (केंद्र सरकार) और FSSAI (Food Safety and Standards Authority of India)
मुख्य कानूनी मुद्दाFSSA, 2006 के तहत राज्यों के लाइसेंसिंग और निरीक्षण अधिकारों का FSSAI द्वारा कथित अतिक्रमण (Usurping State’s Powers)।
चुनौती दिए गए नियम1. लाइसेंसिंग विनियम 2011, भर्ती विनियम 2018 और 2026 संशोधन नियम।
2. FSSAI का 12 मई 2023 का निर्देश (सेंट्रल लाइसेंस धारकों के निरीक्षण पर राज्य का बैन)।
3. FoSCoS ऑनलाइन पोर्टल व्यवस्था और मार्च 2026 की टर्नओवर सीमा संबंधी अधिसूचनाएं।
सुनवाई की तारीख26 नवंबर 2026
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