Sunday, November 1, 2026
HomeLaw Firms & Assoc.SCBA Seeks: वकील न्याय प्रशासन का अभिन्न व अनिवार्य हिस्सा; दिल्ली में...

SCBA Seeks: वकील न्याय प्रशासन का अभिन्न व अनिवार्य हिस्सा; दिल्ली में बाहरी नॉन-BS-VI वाहनों पर पाबंदी से अधिवक्ताओं को छूट देने की मांग की

FOLLOW US FOR MORE LEGAL UPDATES ON WhatsApp

SCBA के पत्र की मुख्य दलीलें

  1. एनसीआर (NCR) से आने वाले वकीलों की कठिनाई:SCBA ने ध्यान दिलाया कि सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस करने वाले बड़ी संख्या में वकील नोएडा, गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश), गुरुग्राम और फरीदाबाद (हरियाणा) जैसे पड़ोसी क्षेत्रों से रोजाना दिल्ली आवागमन करते हैं। जूनियर वकीलों सहित कई अधिवक्ता अदालती कार्यवाहियों में शामिल होने और अपने व्यावसायिक दायित्वों को पूरा करने के लिए अपने व्यक्तिगत वाहनों पर निर्भर हैं।
  2. न्याय प्रशासन में रुकावट की आशंका:पत्र में कहा गया है कि प्रस्तावित प्रतिबंधों से बार के सदस्यों को अत्यधिक कठिनाई होगी, जिससे न्याय के सुचारू प्रशासन (Smooth Administration of Justice) में बाधा उत्पन्न हो सकती है। “अधिवक्ता न्याय प्रशासन का एक अभिन्न और अनिवार्य हिस्सा हैं। सुप्रीम कोर्ट तक उनकी दैनिक आवाजाही को प्रभावित करने वाले किसी भी प्रतिबंध का सीधा असर उनके पेशेवर दायित्वों के प्रभावी निर्वहन पर पड़ेगा।” — SCBA का पत्र
  3. सुप्रीम कोर्ट के पूर्ववर्ती आदेशों का संदर्भ:SCBA ने स्पष्ट किया कि सर्वोच्च न्यायालय ने अपने पहले के आदेशों के माध्यम से निर्धारित शर्तों के अधीन पूर्व उत्सर्जन मानकों (जैसे BS-IV) के अनुरूप वाहनों के संचालन की अनुमति दी थी। (उल्लेखनीय है कि दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने भी इससे पहले वकीलों के लिए ऐसी ही छूट मांगी थी)।

नई दिल्ली: भारत का संविधान के अनुच्छेद 19(1)(g) (विधि व्यवसाय के सुचारू निर्वहन की स्वतंत्रता), अनुच्छेद 21 (त्वरित न्याय और स्वच्छ पर्यावरण का संतुलन), मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के उत्सर्जन मानक नियम, तथा ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) व वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) द्वारा दिल्ली-एनसीआर में लागू शीतकालीन प्रदूषण नियंत्रण कार्ययोजना के विधिक परिप्रेक्ष्य में सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम उठाया है।

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने दिल्ली सरकार द्वारा 1 नवंबर 2026 से 31 जनवरी 2027 तक दिल्ली के बाहर पंजीकृत गैर-BS-VI (Non-BS-VI compliant) चार पहिया वाहनों के प्रवेश पर लगाए गए प्रतिबंध से सुप्रीम कोर्ट में वकालत करने वाले वकीलों को उचित छूट या शिथिलता (Exemption / Relaxation) प्रदान करने हेतु सुप्रीम कोर्ट प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

SCBA की मानद सचिव प्रज्ञा बघेल (Pragya Baghel, Honorary Secretary) ने 31 अक्टूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट के महासचिव (Secretary General) को एक औपचारिक पत्र लिखकर आग्रह किया है कि वे इस संवेदनशील विषय को दिल्ली सरकार और संबंधित परिवहन प्राधिकारियों के समक्ष उठाएं, ताकि पड़ोसी राज्यों (उत्तर प्रदेश और हरियाणा) के एनसीआर शहरों से रोजाना सुप्रीम कोर्ट आने वाले अधिवक्ताओं के वाहनों को इस पाबंदी से राहत मिल सके।

SCBA के पत्र के मुख्य विधिक एवं तथ्यात्मक बिंदु

1. ‘वकील न्याय व्यवस्था का अभिन्न अंग; पाबंदी से न्याय प्रशासन में बाधा आएगी’:

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने महासचिव को भेजे गए पत्र में वकीलों की संवैधानिक और संस्थागत भूमिका को रेखांकित करते हुए दर्ज किया: “वकील न्याय प्रशासन का एक अभिन्न और अनिवार्य हिस्सा (Integral and indispensable part of the administration of justice) हैं, और सुप्रीम कोर्ट में उनके दैनिक आवागमन को प्रभावित करने वाली किसी भी पाबंदी का उनके पेशेवर दायित्वों के प्रभावी निर्वहन पर सीधा असर पड़ेगा। प्रस्तावित प्रतिबंधों से बार के सदस्यों, विशेष रूप से कनिष्ठ अधिवक्ताओं (Junior Lawyers) को भारी कठिनाई का सामना करना पड़ेगा और इससे न्याय प्रक्रिया के सुचारू संचालन में भी गंभीर व्यवधान (Disruption in the smooth administration of justice) उत्पन्न हो सकता है।”

2. NCR के शहरों से रोजाना आवागमन करने वाले हजारों वकीलों का संकट:

  • एसोसिएशन ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट में नियमित रूप से वकालत करने वाले अधिवक्ताओं की एक बहुत बड़ी संख्या दिल्ली से सटे एनसीआर क्षेत्रों—नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश) और गुरुग्राम, फरीदाबाद (हरियाणा) में निवास करती है।
  • ये वकील प्रतिदिन फाइलों, ब्रीफ्स और कोर्ट गाउन के साथ अपने निजी वाहनों से सुप्रीम कोर्ट पहुंचते हैं।
  • विशेष रूप से युवा और कनिष्ठ वकीलों के पास अचानक नए BS-VI वाहन खरीदने की वित्तीय क्षमता नहीं होती। यदि उनके नॉन-BS-VI पेट्रोल/डीजल वाहनों के दिल्ली प्रवेश पर सीधा प्रतिबंध और ₹20,000 का भारी चालान लगाया जाएगा, तो वे समय पर मामलों की पैरवी करने में असमर्थ हो जाएंगे।

3. सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व आदेशों और सुरक्षा का हवाला:

  • SCBA ने अपने प्रतिवेदन में यह भी स्पष्ट किया कि सर्वोच्च न्यायालय ने अपने पूर्ववर्ती न्यायिक आदेशों में निर्धारित शर्तों के अधीन पुराने उत्सर्जन मानकों वाले वाहनों के उपयोग की अनुमति प्रदान की थी।
  • बार एसोसिएशन ने रजिस्ट्री से अनुरोध किया कि वह दिल्ली सरकार के साथ समन्वय स्थापित कर अधिवक्ताओं के वाहनों के लिए एक व्यावहारिक व्यवस्था (जैसे वैध बार काउंसिल/SCBA पास के आधार पर छूट) तैयार कराए।

Also Read; Court Contempt: बॉम्बे हाईकोर्ट में महिला Client ने जज पर पर्स फेंकने का किया प्रयास; जस्टिस माधव जामदार ने शुरू की आपराधिक अवमानना, कोर्ट रिसीवर नियुक्त

दिल्ली सरकार की विवादित विनियामक नीति (1 नवंबर 2026 – 31 जनवरी 2027)

राष्ट्रीय राजधानी में सर्दियों के दौरान वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) के ‘गंभीर’ श्रेणी में जाने और वाहनों से होने वाले धुएं (PM2.5) को नियंत्रित करने के उद्देश्य से दिल्ली परिवहन विभाग ने यह कड़ा विनियामक आदेश लागू किया है:

संदर्भ / विवरणविनियामक प्रावधान एवं तथ्यात्मक स्थिति
प्रतिबंध की अवधि1 नवंबर 2026 से 31 जनवरी 2027 (कुल 3 महीने)।
प्रतिबंधित श्रेणीदिल्ली के बाहर (NCR एवं अन्य राज्यों) में पंजीकृत ऐसे सभी हल्के मोटर वाहन (कारें) और मालवाहक वाहन, जो BS-VI उत्सर्जन मानकों को पूरा नहीं करते (अर्थात BS-III और BS-IV पेट्रोल व डीजल वाहन)।
छूट प्राप्त श्रेणियां1. सभी दोपहिया वाहन।
2. सीएनजी (CNG) और इलेक्ट्रिक वाहन (EV)।
3. एम्बुलेंस, पुलिस और अन्य आपातकालीन सेवाएं।
प्रभावित क्षेत्रनोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत और झज्जर से दिल्ली में प्रवेश करने वाले 10 लाख से अधिक निजी व व्यावसायिक वाहन।
दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन (DHCBA) का रुखSCBA से पूर्व, दिल्ली उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन ने भी दिल्ली के उपराज्यपाल और परिवहन विभाग को पत्र लिखकर वकीलों के वाहनों को इस प्रतिबंध से मुक्त रखने की औपचारिक मांग उठाई थी।

विधिक एवं प्रशासनिक विश्लेषण: ‘स्वच्छ पर्यावरण (अनुच्छेद 21) बनाम न्याय तक पहुंच (Access to Justice)’

  • न्याय प्रशासन और वकीलों की विशिष्ट विधिक स्थिति:
    • भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने अनीता कुशवाहा बनाम पुष्पा सदन [(2016) 8 SCC 509] में यह सुस्थापित सिद्धांत दिया है कि ‘न्याय तक पहुंच’ (Access to Justice) संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 के तहत एक बुनियादी मौलिक अधिकार है।
    • जब किसी मुवक्किल की जमानत, फांसी की सजा पर रोक, या विध्वंस के खिलाफ अंतरिम रोक याचिका सुप्रीम कोर्ट की पहली अदालत में सुबह 10:30 बजे लगी हो, तो उसके वकील का अदालत कक्ष में उपस्थित होना सीधे नागरिक के जीवन और स्वतंत्रता से जुड़ जाता है। यदि दिल्ली की सीमाओं पर वकील की कार को BS-VI न होने के कारण रोक दिया जाता है या भारी जुर्माना किया जाता है, तो इसका सीधा खामियाजा जेल में बंद या पीड़ित वादकारी को भुगतना पड़ता है।
  • संवेदनशील प्रशासनिक समाधान की आवश्यकता:
    • SCBA का यह रुख पर्यावरण कानूनों को चुनौती देना नहीं है, बल्कि एक व्यावहारिक संतुलन (Proportionality Balance) बनाना है।
    • दिल्ली सरकार डॉक्टरों, आपातकालीन वाहनों और आवश्यक सेवाओं को जैसे छूट प्रदान करती है, उसी तर्ज पर बार काउंसिल ऑफ इंडिया अथवा बार एसोसिएशन के वैध स्टिकर/आईडी कार्ड धारक अधिवक्ताओं के वाहनों को कार्यदिवसों में कोर्ट समय (सुबह 8:00 बजे से शाम 6:00 बजे तक) के दौरान दिल्ली में प्रवेश की सीमित छूट दी जा सकती है, जिससे प्रदूषण नियंत्रण के व्यापक उद्देश्य को क्षति पहुंचाए बिना न्याय का पहिया निर्बाध रूप से चलता रहे।

विधिक विवरण एवं संदर्भ

  • संस्था: सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA), नई दिल्ली
  • प्रतिवेदन की तिथि: 31 अक्टूबर 2026
  • प्राप्तकर्ता: महासचिव, भारत का सर्वोच्च न्यायालय (Secretary General, Supreme Court of India)
  • प्रतिनिधित्वकर्ता: प्रज्ञा बघेल, मानद सचिव, SCBA
  • विषय: दिल्ली में 1 नवंबर 2026 से प्रभावी गैर-BS-VI वाहनों के प्रवेश प्रतिबंध से वकीलों के वाहनों को छूट प्रदान करने हेतु प्रशासनिक हस्तक्षेप.
  • प्रासंगिक कानून एवं विधिक प्रावधान:
    • भारत का संविधान — अनुच्छेद 19(1)(g) (व्यवसाय की स्वतंत्रता), अनुच्छेद 21 (जीवन व न्याय तक पहुंच), एवं अनुच्छेद 145 (सुप्रीम कोर्ट की कार्यप्रणाली)
    • मोटर वाहन अधिनियम, 1988 सहपठित केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 — भारत स्टेज VI (BS-VI) उत्सर्जन मानक अधिदेश
    • दिल्ली-एनसीआर वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग अधिनियम, 2021 (CAQM Act, 2021) — ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) और शीतकालीन प्रदूषण दिशा-निर्देश
  • संबद्ध विधिक सिद्धांत:
    • न्यायिक कार्यप्रणाली और प्रशासनिक पाबंदियों का संतुलनकारी मानक: ‘अधिवक्ता न्यायपालिका के अधिकारी (Officers of the Court) हैं और न्याय प्रशासन के सुचारू संचालन में अनिवार्य भूमिका निभाते हैं; प्रदूषण नियंत्रण के लिए लागू की जाने वाली सामान्य यातायात पाबंदियों से यदि संवैधानिक अदालतों में मुकदमों की सुनवाई और वादकारियों के मौलिक अधिकारों का निर्वहन बाधित होता हो, तो कार्यपालिका को वकीलों के आवागमन हेतु उचित व संतुलित छूट प्रदान करने पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करना चाहिए।’
  • वर्तमान स्थिति व भावी प्रक्रिया: SCBA के इस प्रतिवेदन के बाद अब सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री इस मुद्दे को दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव और परिवहन विभाग के समक्ष उठाएगी; 1 नवंबर 2026 से दिल्ली की सीमाओं पर लागू होने वाली इस जांच के बीच यदि सरकार कोई स्पष्ट छूट अधिसूचना या राहत निर्देश जारी नहीं करती, तो बार एसोसिएशन इस मामले को न्यायिक समीक्षा हेतु सक्षम पीठ के समक्ष मेंशन करने का विकल्प भी खुला रख सकती है।

SCBA Seeks: मामले का संक्षिप्त विवरण (At A Glance)

विवरणजानकारी
संबंधित संस्थासुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (Supreme Court Bar Association – SCBA)
पत्र जारीकर्तामानद सचिव प्रज्ञा बघेल (Pragya Baghel)
प्राप्तकर्तामहासचिव, भारत का सर्वोच्च न्यायालय (Secretary General, Supreme Court of India)
मूल विवाददिल्ली सरकार का शीतकालीन प्रदूषण नियंत्रण नियम, जिसके तहत 1 नवंबर 2026 से गैर-BS-VI (जैसे BS-IV) गैर-दिल्ली वाहनों का दिल्ली में प्रवेश प्रतिबंधित है।
मांगसुप्रीम कोर्ट आने वाले अधिवक्ताओं, विशेषकर नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद से आने वाले वकीलों के वाहनों को इस नियम से छूट दी जाए।
RELATED ARTICLES

Most Popular

Patna
few clouds
24.5 ° C
24.5 °
24.5 °
83 %
2.1kmh
22 %
Sun
24 °
Mon
30 °
Tue
31 °
Wed
30 °
Thu
30 °

Recent Comments