Monday, November 2, 2026
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Diwali Festival: दीवाली पर 7 और 8 नवंबर को दिल्ली-NCR में केवल प्रमाणित ग्रीन पटाखों की सशर्त अनुमति; 9 नवंबर से पूर्ण प्रतिबंध फिर बहाल होगा

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सुप्रीम कोर्ट के प्रमुख दिशानिर्देश और शर्तें

1. ‘साइलेंस जोन’ और नो-क्रैकर जोन:

  • अस्पतालों, नर्सिंग होम, प्राथमिक एवं जिला स्वास्थ्य केंद्रों, वृद्धाश्रमों और शैक्षणिक संस्थानों के 300 मीटर के दायरे में आतिशबाजी पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी।
  • इन क्षेत्रों को धरातल पर चिह्नित करके सार्वजनिक रूप से ‘नो-क्रैकर जोन’ घोषित किया जाएगा।

2. क्यूआर कोड (QR Code) और पैकेजिंग की अनिवार्यता:

  • केवल CSIR-NEERI और PESO द्वारा certified निर्माताओं को ही 2 से 6 नवंबर के बीच स्वीकृत हरित पटाखे बनाने की अनुमति होगी।
  • प्रत्येक डिब्बे पर गैर-हस्तांतरणीय (Non-transferable) क्यूआर कोड होना अनिवार्य है, जिसे स्कैन करने पर निर्माता, पंजीकरण, लाइसेंस, फॉर्मूलेशन और टेस्ट सर्टिफिकेट की जानकारी प्रदर्शित होगी।
  • लड़ियों (Ladis), बेरियम (Barium) युक्त पटाखों और बिना क्यूआर कोड वाले पारंपरिक पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।

3. सख्त वित्तीय प्रतिभूति एवं पुलिस गश्त:

  • सभी निर्माताओं और व्यापारियों से भारी अमानत राशि (Monetary Security) जमा कराई जाएगी। नियमों का उल्लंघन होने पर जमानत राशि तुरंत जब्त कर ली जाएगी और लाइसेंस रद्द होगा।
  • दिल्ली-एनसीआर में प्रवेश करने वाले वाहनों की सघन जांच होगी ताकि गैर-कानूनी पटाखे शहर में प्रवेश न कर सकें।
  • दिल्ली मेट्रो (DMRC) के ऑडियो सिस्टम और मीडिया चैनलों के माध्यम से जन-जागरूकता फैलाई जाएगी।

प्रदूषण निगरानी और अदालत में जवाबदेही

  • CPCB एवं राज्य प्रदूषण बोर्ड की जिम्मेदारी: केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड 2 से 6 नवंबर (दिवाली पूर्व), 7-8 नवंबर (दिवाली) और 9 से 30 नवंबर (दिवाली पश्चात) तक का दैनिक AQI रिपोर्ट तैयार करेगा।
  • अस्पताल डेटा प्रस्तुत करने का आदेश: 30 नवंबर तक वायु प्रदूषण के कारण अस्पतालों में भर्ती मरीजों के आंकड़ों का विवरण हलफनामे के माध्यम से प्रस्तुत करना होगा।
  • सख्त चेतावनी: सर्वोच्च न्यायालय ने चेतावनी दी है कि यदि 14 दिसंबर 2026 तक इन निर्देशों का अनुपालन नहीं किया गया, तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ अवमानना (Contempt of Court) की कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

नई दिल्ली: भारत का संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार एवं प्रदूषण-मुक्त स्वच्छ पर्यावरण का मौलिक अधिकार), अनुच्छेद 25 (धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार—जो सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता एवं स्वास्थ्य के अधीन है), पर्यावरण विधि में सावधानी का सिद्धांत (Precautionary Principle), वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981, विस्फोटक अधिनियम, 1884, तथा पेट्रोलियम एवं विस्फोटक सुरक्षा संगठन (PESO) व राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (CSIR-NEERI) द्वारा विकसित हरित पटाखों (Green Crackers) के विनियामक ढांचे पर सुप्रीम कोर्ट ने दीवाली 2026 के उपलक्ष्य में एक अत्यंत विस्तृत, संतुलित और ऐतिहासिक आदेश पारित किया है।

सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश (Justice M.M. Sundresh) और न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी. वराले (Justice Prasanna B. Varale) की खंडपीठ ने ऐतिहासिक जनहित याचिका अर्जुन गोपाल बनाम भारत संघ में अंतरिम निर्देश जारी करते हुए आगामी दीवाली पर्व पर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (दिल्ली-NCR) में केवल CSIR-NEERI द्वारा अनुमोदित ग्रीन पटाखों के निर्माण, बिक्री और सीमित समय में फोड़ने की सशर्त अनुमति प्रदान की है।

शीर्ष अदालत ने दो-टूक व्यवस्था दी कि 9 नवंबर 2026 से दिल्ली-NCR में पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध (Complete Blanket Ban) स्वतः पुनः बहाल हो जाएगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि पूर्ण प्रतिबंध के बावजूद पिछले वर्षों में चोरी-छिपे पारंपरिक और अत्यधिक प्रदूषणकारी पटाखों की अवैध बिक्री हो रही थी, जबकि जनता को प्रमाणित कम-प्रदूषणकारी ग्रीन पटाखे नहीं मिल पा रहे थे। इस विसंगति को दूर करने और त्योहार के दौरान संतुलन साधने के लिए यह अस्थायी व्यवस्था की गई है, जिसके साथ अत्यंत कठोर विनियामक, पुलिस गश्त और फॉरेंसिक अनुपालन शर्तें जोड़ी गई हैं।

शीर्ष अदालत के मुख्य कानूनी निष्कर्ष एवं न्यायिक टिप्पणियां

1. ‘धार्मिक स्वतंत्रता (अनुच्छेद 25) जनस्वास्थ्य और स्वच्छ पर्यावरण (अनुच्छेद 21) के अधीन है’:

न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने मौलिक अधिकारों के पारस्परिक संतुलन का परीक्षण करते हुए स्पष्ट विधिक व्यवस्था दोहराई: *”संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार कोई निरपेक्ष अधिकार नहीं है; यह अनिवार्य रूप से जनस्वास्थ्य (Public Health), सार्वजनिक व्यवस्था और अनुच्छेद 21 के तहत नागरिकों को प्राप्त प्रदूषण-मुक्त स्वच्छ पर्यावरण के मौलिक अधिकार के अधीन है। हमारा उद्देश्य केवल आगामी स्थिति को विनियमित करना नहीं है, बल्कि एक समग्र बदलाव लाना है जिसके लिए पटाखों के संबंध में सार्वजनिक धारणा (Public Perception) को बदलना अनिवार्य है। हमें केवल संकट उत्पन्न होने के बाद प्रतिक्रिया देने के बजाय समस्याओं को रोकने के लिए सक्रिय होकर ‘एहतियाती सिद्धांत’ (Precautionary Principle) को अपनाना होगा।”*

2. मशहूर हस्तियों, खिलाड़ियों और बार के सदस्यों से जन-जागरूकता की अपील:

  • खंडपीठ ने समाज के प्रभावी वर्गों से जिम्मेदारी उठाने का आह्वान किया:“हम बार के सदस्यों, मशहूर हस्तियों (Celebrities), और खिलाड़ियों से एक ईमानदार अपील करते हैं कि वे एक स्वैच्छिक सार्वजनिक-जागरूकता अभियान के माध्यम से अपनी आवाज और प्रभाव का उपयोग करें। उनकी भागीदारी नागरिकों को आगामी त्योहारों को सुरक्षित, जिम्मेदार और पर्यावरण के प्रति जागरूक तरीके से मनाने के लिए प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है, जिससे न तो जनस्वास्थ्य को नुकसान पहुंचे और न ही पहले से ही संवेदनशील वायु गुणवत्ता और बिगड़े।”

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दिल्ली-NCR हेतु पटाखों की अनुमति: प्रमुख तिथियां एवं समय-सारिणी

चरण / तारीखअनुमत गतिविधियां एवं विधिक शर्तें
पटाखा फोड़ने की अनुमति (Bursting Timings)7 नवंबर और 8 नवंबर 2026 (दीवाली के अवसर पर):
• सुबह का स्लॉट: प्रातः 6:00 बजे से 7:00 बजे तक (1 घंटा)।
• रात का स्लॉट: रात्रि 8:00 बजे से 10:00 बजे तक (2 घंटे)।
(निर्धारित घंटों के अतिरिक्त किसी भी समय आतिशबाजी पूर्णतः अवैध व दंडनीय होगी।)
ग्रीन पटाखों का निर्माण (Manufacturing Window)2 नवंबर से 6 नवंबर 2026: केवल वे निर्माता जिनके पास CSIR-NEERI का वैध प्रमाणन और PESO का लाइसेंस है, वे ही केवल NEERI वेबसाइट पर अपलोड किए गए अनुमोदित फॉर्मूलेशन का उत्पादन कर सकेंगे।
लाइसेंस की बहाली व बिक्री (Sale Window)4 नवंबर से 6 नवंबर 2026: पूर्व में रद्द किए गए पटाखा व्यापारियों के लाइसेंस केवल इन 3 दिनों के लिए अस्थायी रूप से बहाल किए गए हैं ताकि वे NEERI-प्रमाणित निर्माताओं से खरीदे गए वैध ग्रीन पटाखे बेच सकें।
पूर्ण प्रतिबंध की वापसी (Complete Ban)9 नवंबर 2026 से: सभी प्रकार की छूट समाप्त हो जाएगी और दिल्ली-NCR में पटाखों के निर्माण, बिक्री, परिवहन, भंडारण और फोड़ने पर पूर्व की भांति पूर्ण प्रतिबंध (Year-round Blanket Ban) स्वतः प्रभावी हो जाएगा।

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सर्वोच्च न्यायालय के 10 कड़े सुरक्षा, विनियामक एवं निगरानी निर्देश

1. संवेदनशील क्षेत्रों में 300 मीटर का ‘नो-क्रैकर ज़ोन’ (No-Cracker Zones):

  • अस्पतालों, नर्सिंग होम, प्राथमिक व जिला स्वास्थ्य केंद्रों, वृद्धाश्रमों और अधिसूचित शांत क्षेत्रों (Silence Zones) के 300 मीटर के दायरे में किसी भी प्रकार का पटाखा फोड़ना पूर्णतः निषिद्ध होगा।
  • यह प्रतिबंध सभी शैक्षणिक संस्थानों पर भी समान रूप से लागू होगा।
  • जिला प्रशासन इन क्षेत्रों को जमीन पर पीले/लाल चिह्नों से स्पष्ट रूप से ‘नो-क्रैकर ज़ोन’ के रूप में चिह्नित करेगा और व्यापक प्रचार करेगा ताकि बीमार व्यक्तियों को कोई असुविधा न हो।

2. बेरियम पर पूर्ण पाबंदी और ‘लड़ी/माला’ पटाखों पर प्रतिबंध:

  • किसी भी प्रकार के बेरियम साल्ट (Barium Salts) युक्त पटाखों के निर्माण और बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध जारी रहेगा।
  • आपस में जुड़ी हुई पटाखों की लड़ियां (Joined in series / Ladis) और माला पटाखों का निर्माण, बिक्री व उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।

3. अनिवार्य क्यूआर कोड (QR Code) और सीलबंद डिब्बे:

  • ग्रीन पटाखों के प्रत्येक डिब्बे को पूरी तरह सील किया जाना अनिवार्य है ताकि पारंपरिक पटाखों की मिलावट न की जा सके।
  • प्रत्येक बॉक्स पर एक उत्पाद एवं बैच-विशिष्ट नॉन-ट्रांसफरेबल क्यूआर कोड चस्पा होगा।
  • क्यूआर कोड स्कैन करने पर निर्माता का नाम, NEERI पंजीकरण, PESO/DM लाइसेंस संख्या, रासायनिक फॉर्मूला और परीक्षण प्रमाण पत्र की पुष्टि होनी चाहिए। फर्जी क्यूआर कोड बेचने या स्थानांतरित करने पर लाइसेंस तुरंत रद्द होगा और आपराधिक केस दर्ज होगा।

4. निर्माताओं व व्यापारियों द्वारा ‘मौद्रिक सुरक्षा जमा’ (Monetary Security Deposit):

  • दिल्ली-NCR के सभी पटाखा निर्माताओं और व्यापारियों को संबंधित जिला प्रशासन द्वारा निर्धारित एक पर्याप्त मौद्रिक सुरक्षा राशि (Substantial Security Deposit) अग्रिम रूप से जमा करनी होगी।
  • न्यायालय के किसी भी निर्देश या प्रदूषण मानक के उल्लंघन की स्थिति में यह पूरी सुरक्षा राशि तुरंत जब्त (Forfeited) कर ली जाएगी और लाइसेंस हमेशा के लिए निरस्त होगा।

5. ऑनलाइन बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध; केवल चिह्नित स्थानों पर स्टॉल:

  • फ्लिपकार्ट, अमेज़न या किसी भी ई-कॉमर्स व सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से पटाखों की ऑनलाइन बिक्री पर 100% प्रतिबंध रहेगा।
  • जिला कलेक्टर/कमिश्नर पुलिस अधीक्षकों के परामर्श से शहरों में केवल विशिष्ट और खुले स्थानों को चिह्नित (Designated Locations) करेंगे, केवल वहीं अधिकृत ग्रीन पटाखों की भौतिक बिक्री हो सकेगी। आवासीय कॉलोनियों या संकरी गलियों में बिक्री पूर्णतः वर्जित होगी।

6. पुलिस गश्ती दल, सीमाओं पर नाकेबंदी और छापे:

  • जिला प्रशासन और पुलिस मिलकर संयुक्त गश्ती दल (Patrolling Teams) गठित करेंगे, जिन्हें NEERI के ग्रीन पटाखों और क्यूआर कोड सत्यापन का तकनीकी प्रशिक्षण दिया जाएगा।
  • ये टीमें बिक्री केंद्रों पर नियमित औचक निरीक्षण करेंगी।
  • दिल्ली-NCR की सभी अंतर-राज्यीय सीमाओं पर प्रवेश करने वाले वाहनों की सघन जांच होगी ताकि पड़ोसी राज्यों से अवैध या पारंपरिक पटाखों की तस्करी को रोका जा सके। अवैध पटाखे पाए जाने पर उन्हें तुरंत जब्त कर नष्ट किया जाएगा और मुकदमों की शुरुआत होगी।

7. दुकानों पर अनिवार्य जागरूकता बैनर और अदालती आदेश का प्रदर्शन:

  • प्रत्येक बिक्री स्थल और दुकान पर प्रमुखता से बड़े बैनर लगाए जाएंगे, जिन पर:
    1. CSIR-NEERI अनुमोदित ग्रीन पटाखों की पहचान के तरीके,
    2. सीलबंद डिब्बे की अनिवार्यता,
    3. पटाखे फोड़ने की अनुमत तारीखें और समय (सुबह 6-7 और रात 8-10), और
    4. उल्लंघनकर्ताओं के खिलाफ पुलिस व कंट्रोल रूम में शिकायत दर्ज कराने के हेल्पलाइन नंबर लिखे होंगे।
  • दुकानदारों को अपनी दुकानों के बाहर सर्वोच्च न्यायालय के इस आदेश की प्रतियां भी प्रदर्शित करनी होंगी।

8. CPCB और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों द्वारा दैनिक वायु गुणवत्ता (AQI) निगरानी:

  • केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) और NCR के संबंधित राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तीन चरणों में दैनिक AQI रिपोर्ट तैयार करेंगे:
    • प्री-दीवाली रिपोर्ट: 2 नवंबर से 6 नवंबर तक की दैनिक वायु गुणवत्ता।
    • दीवाली रिपोर्ट: 7 और 8 नवंबर की वायु गुणवत्ता।
    • पोस्ट-दीवाली रिपोर्ट: 9 नवंबर से 30 नवंबर तक की दैनिक वायु गुणवत्ता।
  • तुलनात्मक वैज्ञानिक विश्लेषण हेतु इस अवधि के दौरान मिट्टी/रेत और पानी के नमूने एकत्र किए जाएंगे। खराब पड़े सभी AQI मॉनिटरिंग स्टेशनों की तत्काल मरम्मत करने का आदेश दिया गया है।
  • दीवाली के तुरंत बाद अपशिष्ट प्रबंधन और सर्वाधिक प्रदूषित हॉटस्पॉट्स पर वाटर स्प्रिंकलर्स (पानी के छिड़काव) से सफाई की जाएगी।

9. अस्पतालों में भर्ती होने वाले मरीजों का अनिवार्य डेटा:

  • शीर्ष अदालत ने स्वास्थ्य प्रशासन को निर्देश दिया है कि वह एक विस्तृत हलफनामा दाखिल कर यह बताए कि दीवाली के बाद 30 नवंबर 2026 तक दिल्ली-NCR के अस्पतालों, क्लीनिकों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में सांस, दमा और आंखों की बीमारियों से पीड़ित कितने अतिरिक्त मरीज (In-patient Admissions) भर्ती हुए।
  • यह डेटा अदालत को यह तय करने में मदद करेगा कि क्या भविष्य में ऐसी छूट जारी रखी जानी चाहिए या नहीं।

10. दिल्ली मेट्रो व स्कूलों में जन-जागरूकता अभियान:

  • शिक्षा विभाग के सचिवों को स्कूली बच्चों को प्रदूषण के खतरों के प्रति संवेदनशील बनाने के निर्देश दिए गए हैं।
  • दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) को अपनी सभी ट्रेनों और स्टेशनों के ऑडियो सिस्टम के माध्यम से पर्यावरण और स्वास्थ्य पर पटाखों के दुष्प्रभावों के बारे में लगातार जागरूकता संदेश प्रसारित करने का निर्देश दिया गया है।

विधिक एवं प्रक्रियात्मक विश्लेषण: ‘न्यायिक आत्मसंयम बनाम अनुपालन की कठोरता’

  • अदालत के समक्ष तर्कों का टकराव:
    • याचिकाकर्ताओं व न्यायमित्र (Amicus Curiae) की दलील: वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन और वरिष्ठ अधिवक्ता उत्तरा बब्बर ने दलील दी कि बार-बार अदालती आदेशों का उल्लंघन होता है और प्रतिबंधों के बावजूद बाजार में बेरियम युक्त पटाखे आ जाते हैं, अतः किसी भी प्रकार की ढील न दी जाए।
    • व्यापारियों व निर्माताओं की दलील: वरिष्ठ अधिवक्ता जे. साई दीपक ने तर्क दिया कि वैध लाइसेंस प्राप्त कारोबारियों को रोकने से अवैध और अत्यधिक खतरनाक पटाखों का काला बाजार पनपता है; ग्रीन पटाखों की अनुमति से उपभोक्ता वैध उत्पाद खरीद सकेंगे।
    • सरकार का रुख: अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) ऐश्वर्या भाटी ने केंद्र, दिल्ली सरकार और CAQM की ओर से विंटर एक्शन प्लान और सख्त प्रवर्तन का आश्वासन दिया।
  • जवाबदेही और अनुपालन की समय-सीमा:
    • सर्वोच्च न्यायालय ने चेतावनी दी है कि सभी संबंधित राज्य और प्रशासनिक प्राधिकारी 14 दिसंबर 2026 तक अपने विस्तृत अनुपालन हलफनामे (Compliance Affidavits) रजिस्ट्री में जमा कराएं।
    • यदि किसी भी जिले में इन दिशा-निर्देशों का खुला उल्लंघन पाया गया, तो संबंधित जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस आयुक्त/वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के विरुद्ध न्यायालय की अवमानना अधिनियम के तहत कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

विधिक विवरण एवं संदर्भ

  • न्यायालय: भारत का सर्वोच्च न्यायालय (संवैधानिक जनहित याचिका क्षेत्राधिकार)
  • केस संदर्भ: अर्जुन गोपाल व अन्य बनाम भारत संघ व अन्य [Writ Petition (Civil) No. 728 / 2015]
  • पीठ: न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश एवं न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी. वराले
  • आदेश की तिथि: 2 नवंबर 2026 (अनुवर्ती विस्तृत निर्देश)
  • अगली सुनवाई (अनुपालन समीक्षा): 16 दिसंबर 2026

प्रमुख विधिक प्रतिनिधित्व:

  • याचिकाकर्ताओं की ओर से: वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन (Senior Advocate Gopal Sankaranarayanan)।
  • न्यायमित्र (Amicus Curiae): वरिष्ठ अधिवक्ता उत्तरा बब्बर (Senior Advocate Uttara Babbar)।
  • निर्माताओं व व्यापारियों की ओर से: वरिष्ठ अधिवक्ता जे. साई दीपक (Senior Advocate J Sai Deepak)।
  • केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार व CAQM की ओर से: अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) ऐश्वर्या भाटी (Additional Solicitor General Aishwarya Bhati)।
  • प्रासंगिक कानून एवं विधिक प्रावधान:
    • भारत का संविधान — अनुच्छेद 21 (स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार) एवं अनुच्छेद 25 (धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार)
    • पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 एवं वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981
    • विस्फोटक अधिनियम, 1884 एवं विस्फोटक नियम, 2008 (PESO विनियामक दिशानिर्देश)
    • भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) — सार्वजनिक उपद्रव व निषेधाज्ञा का क्रियान्वयन
  • संबद्ध न्यायिक सिद्धांत:
    • दीवाली पर पटाखों के नियमन का विधिक मानक: ‘धार्मिक उत्सव मनाने का अधिकार जनस्वास्थ्य और नागरिकों के जीवन के अधिकार (अनुच्छेद 21) के अधीन है; संपूर्ण प्रतिबंध के व्यावहारिक क्रियान्वयन की सीमाओं को देखते हुए CSIR-NEERI द्वारा प्रमाणित ग्रीन पटाखों की सीमित अवधि (दीवाली के दिन सुबह 6-7 और रात 8-10) के लिए सशर्त अनुमति दी जा सकती है; तथापि, यह छूट सख्त विनियामक शर्तों (सीलबंद डिब्बे, विशिष्ट क्यूआर कोड, मौद्रिक सुरक्षा जमा, अस्पताल के निकट 300 मीटर नो-क्रैकर जोन, और ऑनलाइन बिक्री पर पूर्ण रोक) के अधीन है; 9 नवंबर 2026 से पूर्ण प्रतिबंध पुनः प्रभावी रहेगा।’
  • वर्तमान स्थिति व तात्कालिक प्रभाव: दिल्ली-NCR के सभी जिला प्रशासनों और पुलिस विभागों को आदेश का त्वरित क्रियान्वयन शुरू करने का निर्देश दिया गया है; 4 से 6 नवंबर तक केवल निर्धारित खुले मैदानों/स्थानों पर अस्थायी दुकानों से अधिकृत ग्रीन पटाखों की बिक्री हो सकेगी; आम जनता केवल 7 और 8 नवंबर को निर्धारित तीन घंटों (सुबह 1 घंटा, रात 2 घंटे) में ही ग्रीन आतिशबाजी कर सकेगी; 9 नवंबर से किसी भी प्रकार के पटाखे फोड़ने पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

Diwali Festival: मामले का संक्षिप्त विवरण (At A Glance)

विवरणजानकारी
संबंधित अदालतभारत का सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court of India)
पीठन्यायमूर्ति एम. एम. सुंदरेश एवं न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी. वराले
मामला/साइटेशनअर्जुन गोपाल बनाम यूनियन ऑफ इंडिया (Arjun Gopal and Ors. v. UOI & Ors.)
आतिशबाजी की अवधि7 नवंबर 2026: सुबह 6:00 से 7:00 और रात 8:00 से 10:00 बजे तक।
8 नवंबर 2026: सुबह 6:00 से 7:00 और रात 8:00 से 10:00 बजे तक।
बिक्री की अनुमति4 नवंबर से 6 नवंबर 2026 तक (केवल निर्धारित स्थानों पर; ऑनलाइन बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित)।
पूर्ण प्रतिबंध की वापसी9 नवंबर 2026 से पूरे दिल्ली-एनसीआर में पूर्ण प्रतिबंध पुनः लागू।
अनुपालन रिपोर्ट जमा करने की तिथि14 दिसंबर 2026 तक (अगली सुनवाई 16 दिसंबर 2026)।
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