FOLLOW US FOR MORE LEGAL UPDATES ON WhatsApp
समाचार पत्र की रिपोर्ट और उजागर हुए गंभीर उल्लंघन
- अवैध और बिना QR कोड वाले पटाखे:अदालत के समक्ष पेश की गई रिपोर्ट के अनुसार, 22 अक्टूबर और 2 नवंबर को दिल्ली के प्रमुख बाजारों (जैसे सदर बाजार, चांदनी चौक आदि) के दौरों में पाया गया कि दुकानदार ‘ग्रीन क्रैकर’ के नाम पर बिना क्यूआर कोड वाले पारंपरिक और प्रतिबंधित पटाखे बेच रहे थे।
- नकली क्यूआर कोड का खेल:कई डिब्बों पर क्यूआर कोड गायब थे, जबकि कुछ डिब्बों पर छपे क्यूआर कोड को स्कैन करने पर वे प्रमाणित CSIR-NEERI डेटाबेस के बजाय ऑनलाइन प्रोडक्ट कैटलॉग पर रीडायरेक्ट कर रहे थे। इसके अलावा, ग्राहक के मांगने पर छुपाकर रखे गए पारंपरिक पटाखों (जैसे लड़ी और बेरियम वाले पटाखे) को भी बेचा जा रहा था।
सुप्रीम कोर्ट के 2 नवंबर के आदेश का संदर्भ
- सीमित छूट: 2 नवंबर को जारी आदेश में पीठ ने केवल CSIR-NEERI और PESO द्वारा certified हरित पटाखों को ही 4 से 6 नवंबर तक निर्धारित स्थानों पर बेचने और 7 तथा 8 नवंबर को निर्धारित घंटों (सुबह 6-7 और रात 8-10) में फोड़ने की सशर्त छूट दी थी।
- पूर्ण बैन की वापसी: 9 नवंबर 2026 से पूरे दिल्ली-एनसीआर में पूर्ण प्रतिबंध पुनः लागू होना तय है।
- अदालत का रुख: पीठ ने टिप्पणी की कि पूर्ण प्रतिबंध का असर यह हो रहा था कि चोरबाजारी के जरिए अवैध पटाखे बेचे जा रहे थे, लेकिन अब सीमित छूट के बाद भी अगर प्रशासन नियमों का कड़ाई से अनुपालन कराने में विफल रहता है तो अधिकारियों पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
नई दिल्ली: भारत का संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन और स्वच्छ पर्यावरण का मौलिक अधिकार), पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986, वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981, विस्फोटक अधिनियम, 1884, तथा सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 2 नवंबर को जारी विस्तृत विनियामक दिशा-निर्देशों के जमीनी क्रियान्वयन पर उच्चतम न्यायालय ने एक बार फिर अत्यंत कड़ा रुख अपनाया है।
सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश (Justice MM Sundresh) और न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी. वराले (Justice Prasanna B Varale) की खंडपीठ ने 3 नवंबर 2026 को अंग्रेजी दैनिक ‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ (Hindustan Times) में छपी एक विस्तृत खोजी रिपोर्ट का संज्ञान लिया। रिपोर्ट में तस्वीरों और जमीनी पड़ताल के साथ उजागर किया गया था कि शीर्ष अदालत द्वारा 2 नवंबर को दी गई सीमित व सशर्त अनुमति के 24 घंटे के भीतर ही दिल्ली के प्रमुख बाजारों में हर प्रकार के प्रतिबंधित, बिना क्यूआर कोड वाले और गैर-प्रमाणित पारंपरिक पटाखे खुलेआम बिक रहे हैं।
पीठ ने केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) ऐश्वर्या भाटी (Aishwarya Bhati) को सीधे संबोधित करते हुए इस घोर उल्लंघन पर तत्काल प्रशासनिक संज्ञान लेने और कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा। अदालत ने रेखांकित किया कि आदेश का उद्देश्य वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित ग्रीन पटाखों को सख्त निगरानी में उपलब्ध कराना था, न कि अवैध पटाखों की खुली बिक्री का लाइसेंस देना।
शीर्ष अदालत के मुख्य कानूनी बिंदु एवं न्यायिक टिप्पणियां
1. ‘कल के आदेश के बावजूद दुकानों पर सब कुछ खुलेआम बिक रहा है’:
न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश ने केंद्र सरकार की विधि अधिकारी का ध्यान समाचार पत्र की रिपोर्ट की ओर आकर्षित करते हुए कहा: “आज के हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट में एक तस्वीर है, जिसमें वे कह रहे हैं कि हमारे कल के आदेश के बावजूद अब (पटाखा) दुकानों में सब कुछ उपलब्ध है। कृपया इस पर तुरंत ध्यान दें। वे कह रहे हैं कि बाजार में हर दूसरा पटाखा—चाहे वह लाइसेंस प्राप्त हो या बिना लाइसेंस वाला, क्यूआर कोड वाला हो या बिना क्यूआर कोड वाला—सब कुछ धड़ल्ले से बिक रहा है। कृपया इसे गंभीरता से नोट करें और आवश्यक कदम उठाएं।”
2. नियमों की धज्जियां उड़ाने पर प्रशासन की निष्क्रियता पर चिंता:
- खंडपीठ ने मौखिक रूप से व्यक्त किया कि अदालत ने 2 नवंबर के आदेश में स्पष्ट किया था कि:
- बिक्री केवल 4 से 6 नवंबर 2026 के बीच होगी,
- केवल प्रशासन द्वारा चिह्नित विशिष्ट स्थानों (Designated Locations) पर होगी,
- और प्रत्येक डिब्बे पर CSIR-NEERI का उत्पाद-विशिष्ट क्यूआर कोड अनिवार्य होगा।
- 3 नवंबर को ही सामान्य बाजारों (जैसे चांदनी चौक, सदर बाजार) में पटाखों का प्रदर्शन और बिक्री शुरू हो जाना यह दर्शाता है कि पुलिस और स्थानीय प्रशासनिक मशीनरी जमीनी स्तर पर अदालती आदेशों को लागू करने में तुरंत शिथिल पड़ गई है।
मामले की तथ्यात्मक पृष्ठभूमि एवं प्रक्रियात्मक विवरण
| संदर्भ / विवरण | तथ्यात्मक स्थिति एवं पक्षों के दावे |
|---|---|
| फोरम / न्यायालय | भारत का सर्वोच्च न्यायालय (संवैधानिक जनहित याचिका क्षेत्राधिकार) |
| पीठ | न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश एवं न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी. वराले |
| संज्ञान की तिथि | 3 नवंबर 2026 |
| मूल आदेश (2 नवंबर 2026) | अदालत ने दिल्ली-NCR में 4 से 6 नवंबर 2026 के लिए प्रमाणित ग्रीन पटाखों की बिक्री और 7 व 8 नवंबर को निर्धारित घंटों (सुबह 6-7 और रात 8-10) में आतिशबाजी की अनुमति दी थी; 9 नवंबर से पूर्ण प्रतिबंध बहाल करने और 14 दिसंबर तक अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया गया था। |
| संज्ञान में ली गई मीडिया रिपोर्ट | ‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ (3 नवंबर 2026 अंक) में प्रकाशित खोजी रिपोर्ट, जिसमें 22 अक्टूबर और 2 नवंबर को दिल्ली के विभिन्न बाजारों के जमीनी दौरे का ब्योरा दिया गया था। |
| प्रभावित बाजार (जहाँ अवैध बिक्री पाई गई) | 1. चांदनी चौक (Chandni Chowk) 2. सदर बाजार (Sadar Bazaar) 3. शास्त्री नगर (Shastri Nagar) 4. सरोजिनी नगर (Sarojini Nagar) 5. न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी (New Friends Colony) |
| रिपोर्ट में उजागर की गई प्रमुख विसंगतियां | • फर्जी लेबलिंग: दुकानदार सामान्य पटाखों पर भी “प्रदूषण-मुक्त”, “जीरो पॉल्यूशन” और “ग्रीन क्रैकर” का अनधिकृत लेबल लगाकर खुले में प्रदर्शित कर रहे थे। • QR कोड का अभाव/धोखाधड़ी: कई बक्सों पर कोई क्यूआर कोड नहीं था; जिन पर क्यूआर कोड थे, वे NEERI के सर्टिफिकेशन पोर्टल पर जाने के बजाय दुकानदारों के ऑनलाइन कैटलॉग खोल रहे थे। • पारंपरिक पटाखों की गुप्त बिक्री: दुकानों में पारंपरिक और अत्यधिक प्रदूषणकारी पटाखों को छुपाकर रखा गया था और ग्राहकों द्वारा मांगने पर अंदर से निकालकर बेचा जा रहा था। |
| अदालत का निर्देश | अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी को इन उल्लंघनों की तुरंत जांच करने, पुलिस व जिला प्रशासन को सतर्क करने और आदेश का शत-प्रतिशत जमीनी अनुपालन सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया गया। |
विधिक एवं प्रशासनिक विश्लेषण: ‘विनियमन की विफलता बनाम अवमानना का खतरा’
- छूट के विधिक आधार पर सीधा आघात:
- सर्वोच्च न्यायालय ने 2 नवंबर को अपने आदेश में स्पष्ट तर्क दिया था कि पिछले वर्षों के संपूर्ण प्रतिबंध (Blanket Ban) के कारण पारंपरिक पटाखों की कालाबाजारी बढ़ गई थी और लोगों को वैध विकल्प नहीं मिल पा रहा था।
- इसी कारण अदालत ने ‘परीक्षण आधार’ (Test Case) पर CSIR-NEERI प्रमाणित ग्रीन पटाखों को अनुमति दी थी। किंतु यदि बाजार में ग्रीन पटाखों की आड़ में बेरियम युक्त और पारंपरिक पटाखे ही बेचे जाएंगे, तो यह अदालत के विश्वास और आदेश की भावना के साथ सीधा धोखा है।
- समय-सीमा और स्थान संबंधी शर्तों का उल्लंघन:
- अदालत ने आदेश दिया था कि बिक्री केवल 4 से 6 नवंबर तक होगी और वह भी केवल प्रशासन द्वारा निर्धारित खुले मैदानों/चिह्नित स्थानों पर।
- 3 नवंबर को ही सदर बाजार और चांदनी चौक की संकरी और भीड़भाड़ वाली दुकानों में पटाखों का बिकना दिल्ली पुलिस और नगर निगम के प्रवर्तन तंत्र की विफलता को उजागर करता है।
- फर्जी क्यूआर कोड और आपराधिक दायित्व:
- 2 नवंबर के आदेश के अनुसार, क्यूआर कोड को स्कैन करने पर NEERI पंजीकरण, PESO लाइसेंस और रासायनिक फॉर्मूलेशन दिखना अनिवार्य है।
- निजी वेबसाइट या कैटलॉग खोलने वाले फर्जी क्यूआर कोड लगाना सीधे तौर पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत धोखाधड़ी (Cheating), जालसाजी (Forgery) और विस्फोटक अधिनियम के तहत गंभीर संज्ञेय अपराध है, जिसमें तुरंत जब्ती और गिरफ्तारी की जानी चाहिए।
- अधिकारियों पर अवमानना की तलवार:
- खंडपीठ ने 2 नवंबर के आदेश में पहले ही आगाह किया था कि 14 दिसंबर तक अनुपालन हलफनामा पेश न होने या नियमों की अनदेखी पाए जाने पर संबंधित जिलों के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और जिलाधिकारियों के विरुद्ध अवमानना अधिनियम के तहत सीधी कार्रवाई की जाएगी। 3 नवंबर को पीठ का यह संज्ञान प्रशासनिक मशीनरी के लिए अंतिम चेतावनी की तरह है।
विधिक विवरण एवं संदर्भ
- न्यायालय: भारत का सर्वोच्च न्यायालय, नई दिल्ली (संवैधानिक जनहित याचिका क्षेत्राधिकार)
- केस संदर्भ: अर्जुन गोपाल व अन्य बनाम भारत संघ व अन्य [Writ Petition (Civil) No. 728 / 2015]
- पीठ: न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश एवं न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी. वराले
- संज्ञान/टिप्पणी की तिथि: 3 नवंबर 2026
- कार्यवाही का स्वरूप: मीडिया रिपोर्ट के आधार पर मौखिक न्यायिक संज्ञान; एएसजी को तत्काल कार्रवाई व प्रवर्तन का निर्देश।
विधिक प्रतिनिधित्व:
- केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार व CAQM की ओर से: अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) ऐश्वर्या भाटी (Additional Solicitor General Aishwarya Bhati)।
- मूल याचिकाकर्ताओं की ओर से: वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन (Senior Advocate Gopal Sankaranarayanan)।
- प्रासंगिक कानून एवं विधिक प्रावधान:
- भारत का संविधान — अनुच्छेद 21 (जीवन व स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार) एवं अनुच्छेद 142 (पूर्ण न्याय हेतु असाधारण शक्तियां)
- पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 एवं वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981
- विस्फोटक अधिनियम, 1884 एवं विस्फोटक नियम, 2008 (PESO विनियामक दिशानिर्देश)
- न्यायालय की अवमानना अधिनियम, 1971 (Contempt of Courts Act, 1971)
- संबद्ध न्यायिक सिद्धांत:
- न्यायिक आदेशों के प्रभावी प्रवर्तन का विधिक मानक: ‘पर्यावरण संरक्षण और जनस्वास्थ्य से जुड़े न्यायिक निर्देशों का अनुपालन केवल कागजी आश्वासनों या अधिसूचनाओं तक सीमित नहीं रह सकता; जब अदालत किसी संवेदनशील विषय (पटाखों का विनियमन) पर सशर्त ढील देती है, तो प्रवर्तन एजेंसियों (पुलिस व जिला प्रशासन) का यह प्राथमिक विधिक दायित्व है कि वे आदेश की हर शर्त—जैसे क्यूआर कोड सत्यापन, निर्धारित बिक्री केंद्र, और समय-सीमा—का कड़ाई से पालन कराएं; मीडिया द्वारा उजागर किए गए खुले उल्लंघनों पर आंखें मूंदना अदालत के प्राधिकार की अवहेलना है, जिसे रोकने हेतु राज्य प्राधिकारियों को तुरंत छापे, जब्ती और दंडात्मक अभियोजन शुरू करना होगा।’
- वर्तमान स्थिति व तात्कालिक विधिक प्रभाव: सुप्रीम कोर्ट की इस कड़ी टिप्पणी के बाद अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी द्वारा दिल्ली पुलिस आयुक्त और जिला मजिस्ट्रेटों को तत्काल आपात बैठक बुलाने और संयुक्त गश्ती दलों को आज ही (3 नवंबर की शाम से) सदर बाजार, चांदनी चौक, शास्त्री नगर सहित सभी बाजारों में औचक छापेमारी करने के निर्देश जारी किए जा रहे हैं; बिना क्यूआर कोड वाले या पारंपरिक पटाखों को तुरंत जब्त कर सील किया जाएगा और कल (4 नवंबर) से केवल अधिकृत मैदानों पर ही लाइसेंसधारी ग्रीन पटाखों की बिक्री सुनिश्चित कराई जाएगी।
Cracker In Market: मामले का संक्षिप्त विवरण (At A Glance)
| विवरण | जानकारी |
| संबंधित अदालत | भारत का सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court of India) |
| पीठ | न्यायमूर्ति एम. एम. सुंदरेश एवं न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी. वराले |
| मामला/संदर्भ | अर्जुन गोपाल बनाम भारत संघ (Arjun Gopal v. UOI) – दिल्ली-एनसीआर पटाखा बैन/विनियमन मामला। |
| अदालत का संज्ञान | 3 नवंबर 2026 के समाचार पत्र (Hindustan Times) की खोजी रिपोर्ट जिसमें चांदनी चौक, सदर बाजार, शास्त्री नगर, सरोजिनी नगर और न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी में अवैध पटाखों की खुलेआम बिक्री का खुलासा हुआ। |
| अदालत का निर्देश | केंद्र व दिल्ली सरकार (ASG ऐश्वर्या भाटी) को तुरंत हस्तक्षेप करने और अदालती पाबंदियों के उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई करने का आदेश। |

