Saturday, November 7, 2026
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Fraudulent Trading: अबू धाबी कोर्ट का फैसला…एनएमसी हेल्थकेयर के संस्थापक और पूर्व सीईओ वित्तीय घोटाले के उत्तरदायी; पढ़िए पूरा केस

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मामले की पृष्ठभूमि और कानूनी घटनाक्रम

  1. एनएमसी का पतन और फंड का विचलन:डॉ. बी.आर. शेट्टी ने 1975 में आबू धाबी में एनएमसी हेल्थ (NMC Health) की स्थापना की थी। 2012 में यह लंदन स्टॉक एक्सचेंज (LSE) पर सूचीबद्ध हुई और FTSE 100 सूचकांक का हिस्सा बनी। दिवालियापन प्रशासकों (Joint Administrators) के अनुसार, प्रबंधन ने भारी उधारी छिपाकर कंपनी के फंड को व्यक्तिगत उपयोग—जैसे निजी विमानों के संचालन, दुबई हिल्स में रियल एस्टेट संपत्तियों और व्योमिंग (Wyoming) के तेल क्षेत्रों में निवेश हेतु मोड़ दिया।
  2. फर्जी सप्लायर सौदे और बैंक ऑफ बड़ौदा समझौता:अदालत ने पाया कि समूह ने फर्जी आपूर्तिकर्ता सौदों (Sham Supplier Transactions) के जरिए उधारी छिपाई, जिसमें बिना किसी माल की डिलीवरी के बिल जारी किए जाते थे और बैंक फाइनेंसिंग के जरिए पैसा वापस ग्रुप में लाया जाता था। मामले में बैंक ऑफ बड़ौदा (Bank of Baroda) पर भी पूर्व प्रमोटरों के साथ सांठगांठ के आरोप लगाए गए थे; हालांकि सुनवाई के अंतिम चरण में बैंक ने जॉइंट एडमिनिस्ट्रेटर्स के साथ समझौता (Settlement) कर लिया, जिसके बाद बैंक के खिलाफ दावे वापस ले लिए गए।
  3. बचाव पक्ष के तर्कों की अस्वीकृति:अदालत ने डॉ. शेट्टी की इस दलील को खारिज कर दिया कि वे स्वयं वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा की गई धोखाधड़ी के शिकार थे। इसी प्रकार, पूर्व सीईओ प्रशांत मंगत के इस दावे को भी खारिज कर दिया गया कि उनके पास वित्तीय मामलों का नियंत्रण नहीं था।

मुख्य विधिक व अंतर्राष्ट्रीय कॉर्पोरेट न्यायशास्त्र निष्कर्ष

1. क्रॉस-बॉर्डर दिवालियापन व प्रमोटर उत्तरदायित्व (Cross-Border Insolvency & Director Liability):

यह निर्णय अंतरराष्ट्रीय वित्तीय केंद्रों (जैसे ADGM) के क्षेत्राधिकार और दिवालियापन कानूनों की ताकत को रेखांकित करता है। कॉर्पोरेट पर्दा (Corporate Veil) उठाकर पतन के लिए जिम्मेदार प्रमोटरों और शीर्ष अधिकारियों की व्यक्तिगत संपत्तियों से रिकवरी का स्पष्ट संदेश दिया गया है।

2. वित्तीय रिपोर्टिंग व प्रकटीकरण मानक (Financial Disclosure Standards):

सूचीबद्ध कंपनियों द्वारा अप्रकट देनदारियों (Undisclosed Borrowings) और फर्जी बिलिंग के माध्यम से लेखापुस्तकों में हेरफेर करने पर अदालतों द्वारा दंडात्मक और भारी मौद्रिक देनदारी तय करने का यह एक लैंडमार्क अंतरराष्ट्रीय उदाहरण है।

अबू धाबी / नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय कॉर्पोरेट प्रशासन, अबू धाबी ग्लोबल मार्केट (ADGM) दिवाला विनियम, 2022 (ADGM Insolvency Regulations, 2022) के तहत कपटपूर्ण व्यापार (Fraudulent Trading) एवं अनुचित व्यापार (Wrongful Trading), कॉर्पोरेट फंड्स का व्यक्तिगत खातों में विपथन (Misappropriation of Company Funds), लंदन स्टॉक एक्सचेंज (LSE) व एफटीएसई 100 (FTSE 100) सूचीबद्धता नियमों के घोर उल्लंघन, तथा फर्जी आपूर्तिकर्ता इनवॉइस (Sham Invoices) के जरिए गुप्त बैंक ऋण जुटाने के वैश्विक वित्तीय न्यायशास्त्र के अंतर्गत अबू धाबी की वाणिज्यिक अदालत ने एक अत्यंत युगांतकारी निर्णय सुनाया है।

अबू धाबी ग्लोबल मार्केट (ADGM) कोर्ट ऑफ फर्स्ट इंस्टेंस के न्यायाधीश जस्टिस सर एंड्रयू स्मिथ (Justice Sir Andrew Smith) ने 5 नवंबर 2026 को दिए अपने विस्तृत निर्णय में यूएई के सबसे बड़े स्वास्थ्य सेवा नेटवर्क एनएमसी हेल्थकेयर (NMC Healthcare) के भारतीय मूल के संस्थापक डॉ. बावागुथू रघुराम शेट्टी (Dr. B.R. Shetty) और कंपनी के पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) प्रशांत मंगत (Prasanth Manghat) को कपटपूर्ण व अनुचित व्यापार का दोषी ठहराते हुए व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायी (Liable) करार दिया।

अदालत ने कंपनी की परिसंपत्तियों में शेट्टी और मंगत द्वारा दिए जाने वाले वित्तीय अंशदान (Financial Contributions) के निर्धारण हेतु $5.397 बिलियन (लगभग ₹45,000 करोड़ से अधिक) को प्रारंभिक आधार बिंदु (Starting Point) माना है। जांच में सामने आया कि 500 से अधिक बैंक हस्तांतरणों के माध्यम से कंपनी के फंड से एईडी 4.18 बिलियन शेट्टी के निजी बैंक खातों में भेजे गए, जिनका उपयोग दुबई हिल्स में विला, निजी जेट विमानों और अमेरिका के वायोमिंग स्थित तेल क्षेत्रों में व्यक्तिगत निवेश हेतु किया गया। हालांकि, अदालत ने भारतीय सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक ऑफ बड़ौदा (Bank of Baroda) के विरुद्ध कोई प्रतिकूल आदेश पारित करने से इनकार कर दिया, क्योंकि सुनवाई के अंतिम चरण में बैंक ने कंपनी के संयुक्त प्रशासकों के साथ औपचारिक समझौता (Settlement) कर लिया था।

ADGM न्यायालय के मुख्य कानूनी निष्कर्ष एवं न्यायिक टिप्पणियां

1. ‘शेट्टी और मंगत दोनों जानबूझकर धोखाधड़ी से कारोबार चलाने में भागीदार थे’:

जस्टिस सर एंड्रयू स्मिथ ने कंपनी के पतन और वित्तीय हेराफेरी के साक्ष्यों का परीक्षण करते हुए अपने निर्णय में स्पष्ट कहा: “मैं इस निष्कर्ष पर पहुंचा हूं कि डॉ. शेट्टी और मिस्टर मंगत दोनों ही जानबूझकर कंपनी के व्यवसाय को धोखाधड़ीपूर्ण तरीके (Party to the business being carried on fraudulently) से चलाने में शामिल थे। दोनों ने 30 अप्रैल 2012 से ही सुनियोजित धोखाधड़ी में सक्रिय रूप से भाग लिया, जिसके चलते ADGM इनसॉल्वेंसी रेगुलेशंस, 2022 के तहत उन पर कपटपूर्ण व्यापार (Fraudulent Trading) और अनुचित व्यापार (Wrongful Trading) का विधिक दायित्व आकर्षित होता है।”

2. ‘एफटीएसई 100 कंपनी का सीईओ कहे कि उसे वित्तीय जानकारी नहीं थी, यह अस्वीकार्य है’:

  • पूर्व सीईओ प्रशांत मंगत के इस बचाव को कि वित्तीय मामलों पर उनका नियंत्रण नहीं था, अदालत ने सिरे से खारिज करते हुए कहा:“एक एफटीएसई 100 (FTSE 100) कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) रहे व्यक्ति की ओर से ऐसा तर्क दिया जाना पूरी तरह अस्वाभाविक और अविश्वसनीय है। यह पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों के सर्वथा विपरीत है, और मैं इसे पूरी तरह अस्वीकार करता हूं।”

3. बी.आर. शेट्टी के ‘विक्टिम कार्ड’ को अदालत ने नकारा:

  • डॉ. बी.आर. शेट्टी ने अपना बचाव करते हुए दलील दी थी कि वे स्वयं अपने वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा की गई धोखाधड़ी के शिकार (Victim of Fraud) हुए हैं और उन्हें हेराफेरी की भनक नहीं थी।
  • अदालत ने इसे खारिज करते हुए पाया कि 500 से अधिक अनधिकृत बैंक ट्रांसफर सीधे शेट्टी के निजी बैंक खातों में किए गए थे। निवल रूप से AED 2.6 बिलियन की भारी-भरकम राशि शेट्टी के खातों में ही बची रही, जिससे वे इस वृहद हेराफेरी से अनभिज्ञ होने का दावा नहीं कर सकते।

4. $5.397 बिलियन की वित्तीय देनदारी की रूपरेखा:

  • अदालत ने तय किया कि कंपनी के परिसमापक/प्रशासक (Joint Administrators) को हुए नुकसान की भरपाई हेतु $5.397 बिलियन ($5,397,000,000) को आधार माना जाएगा।
  • ब्याज, कानूनी लागत और अंतिम वसूली राशि तय करने के लिए अदालत शीघ्र ही एक अगली औपचारिक सुनवाई आयोजित करेगी।

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मामले की तथ्यात्मक पृष्ठभूमि एवं प्रक्रियात्मक कालक्रम (1975–2026)

संदर्भ / विवरणतथ्यात्मक स्थिति एवं पक्षों के दावे
फोरम / न्यायालयअबू धाबी ग्लोबल मार्केट (ADGM) कोर्ट्स — कोर्ट ऑफ फर्स्ट इंस्टेंस (वाणिज्यिक व दिवाला क्षेत्राधिकार)
पीठासीन न्यायाधीशजस्टिस सर एंड्रयू स्मिथ (Justice Sir Andrew Smith)
निर्णय की तिथि5 नवंबर 2026
केस संदर्भएनएमसी हेल्थकेयर लिमिटेड (प्रशासकों के अधीन) व संयुक्त प्रशासक बनाम डॉ. बावागुथू रघुराम शेट्टी, प्रशांत मंगत, बैंक ऑफ बड़ौदा व अन्य [ADGM Commercial/Insolvency Proceedings]
वादी पक्ष (Claimants)एनएमसी हेल्थकेयर (NMC Healthcare) तथा इसके संयुक्त प्रशासक (Joint Administrators — अल्वारेज एंड मार्सल / क्विन इमैनुएल द्वारा प्रतिनिधित्व)।
प्रतिवादी 1डॉ. बी.आर. शेट्टी (Dr. B.R. Shetty) — संस्थापक एवं पूर्व गैर-कार्यकारी अध्यक्ष।
प्रतिवादी 2प्रशांत मंगत (Prasanth Manghat) — पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO)।
प्रतिवादी 3 (पूर्व)बैंक ऑफ बड़ौदा (Bank of Baroda) — पूर्व प्रबंध निदेशक पी.एस. जयकुमार के कार्यकाल के दौरान कथित लेन-देन को लेकर प्रतिवादी (समझौते के बाद नाम हटाया गया)।
घोटाले का कुल वित्तीय पैमाना$5.397 बिलियन (लगभग ₹45,000 करोड़ से अधिक) — जिसे अदालत ने क्षतिपूर्ति वसूली हेतु प्राथमिक आधार बिंदु स्वीकार किया।
व्यक्तिगत खातों में विपथनशेट्टी के व्यक्तिगत बैंक खातों में 500 से अधिक अलग-अलग बैंक लेनदेन किए गए, जिनका कुल मूल्य AED 4.18 बिलियन था। समूह को लौटाए गए पैसों का समायोजन करने के बाद भी लगभग AED 2.6 बिलियन की शुद्ध धनराशि शेट्टी के निजी लाभ में गई।
निजी उपभोग के मदकॉर्पोरेट फंड्स का उपयोग विलासितापूर्ण निजी विमानों (Private Aircraft), दुबई हिल्स में लक्जरी संपत्तियों और संयुक्त राज्य अमेरिका के वायोमिंग (Wyoming) में तेल क्षेत्रों की खरीद व निवेश में किया गया।
वित्तीय विवरणियों में जालसाजीदिसंबर 2018 तक समूह ने केवल $1.99 बिलियन की ऋण देनदारी सार्वजनिक रूप से घोषित की थी, जबकि वास्तव में बैंकों से $3.88 बिलियन से अधिक का अघोषित गुप्त कर्ज (Undisclosed Borrowings) लिया जा चुका था।
कपट की कार्यप्रणाली (Modus Operandi)फर्जी आपूर्तिकर्ता लेन-देन (Sham Supplier Transactions): शेल कंपनियों और फर्जी वेंडरों से सामान की आपूर्ति के बिना इनवॉइस जारी कराए जाते थे; बैंक उन इनवॉइसों को डिस्काउंट/फाइनेंस करते थे, और वह पैसा अंततः घूमकर एनएमसी समूह और प्रमोटरों के निजी खातों में पहुंच जाता था।
अदालत का अंतिम आदेशडॉ. बी.आर. शेट्टी और प्रशांत मंगत को फ्रॉडुलेंट ट्रेडिंग का दोषी ठहराया गया; $5.397 बिलियन की देनदारी का आधार निर्धारित; बैंक ऑफ बड़ौदा के खिलाफ समझौता होने के कारण कार्यवाही बंद।

बैंक ऑफ बड़ौदा (Bank of Baroda) से जुड़ा विवाद और समझौता

इस अंतरराष्ट्रीय मुकदमे में भारत के प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक—बैंक ऑफ बड़ौदा (Bank of Baroda)—को भी शुरू में प्रतिवादी बनाया गया था, जिस पर गंभीर आरोप लगे थे:

  • प्रशासकों के आरोप:
    • वादी पक्ष (संयुक्त प्रशासकों) ने आरोप लगाया था कि डॉ. बी.आर. शेट्टी और बैंक ऑफ बड़ौदा के तत्कालीन प्रबंध निदेशक एवं सीईओ पी.एस. जयकुमार (PS Jayakumar) के बीच एक गुप्त समझौता हुआ था।
    • आरोप के अनुसार, बैंक इस बात पर सहमत हुआ था कि वह ऑडिटरों के समक्ष एनएमसी के बैंक खातों और भारी कर्जों की वास्तविक स्थिति को उजागर नहीं करेगा, और इसके बदले में एनएमसी समूह बैंक ऑफ बड़ौदा की देनदारियों को अन्य बैंकों से पहले प्राथमिकता के आधार पर चुकता करेगा।
  • अदालत का रुख और समझौते का प्रभाव:
    • यद्यपि जस्टिस सर एंड्रयू स्मिथ ने अपने निर्णय में स्वीकार किया कि प्रशासकों ने इस संबंध में काफी ठोस और आश्वस्त करने वाले तर्क प्रस्तुत किए थे, किंतु अदालत ने बैंक या जयकुमार के विरुद्ध कोई भी प्रतिकूल विधिक निष्कर्ष देने से साफ मना कर दिया:“बैंक ऑफ बड़ौदा और व्यक्तिगत रूप से मिस्टर जयकुमार के विरुद्ध इस स्तर पर कोई प्रतिकूल निष्कर्ष निकालना पूरी तरह अनुचित (Unfair) होगा।”
    • मुकदमे के दौरान समझौता: सुनवाई के अंतिम चरण में बैंक ऑफ बड़ौदा और एनएमसी के प्रशासकों के बीच एक औपचारिक सहमति-समझौता (Settlement) हो गया, जिसके तहत बैंक के विरुद्ध सभी दावे वापस ले लिए गए और कार्यवाही समाप्त कर दी गई।
    • बैंक ऑफ बड़ौदा की ओर से भारत के पूर्व सॉलिसिटर जनरल एवं विख्यात न्यायविद हरीश साल्वे केसी (Harish Salve KC) के नेतृत्व में अंतरराष्ट्रीय वकीलों की टीम ने पक्ष रखा था।

विधिक एवं कॉर्पोरेट न्यायशास्त्र: ‘फ्रॉडुलेंट ट्रेडिंग और कॉर्पोरेट आवरण का भेदन’

  • कपटपूर्ण व्यापार (Fraudulent Trading) का विधिक मानक:
    • सामान्य कॉर्पोरेट कानून में कंपनी की देनदारियों के लिए शेयरधारकों या निदेशकों की व्यक्तिगत संपत्ति उत्तरदायी नहीं होती (सीमित दायित्व का सिद्धांत / Limited Liability).
    • किंतु यूके इनसॉल्वेंसी एक्ट और ADGM इनसॉल्वेंसी रेगुलेशंस के तहत यदि यह साबित हो जाए कि कंपनी का कारोबार लेनदारों को धोखा देने (Defraud Creditors) के इरादे से चलाया जा रहा था, तो अदालत कॉर्पोरेट आवरण का भेदन (Piercing the Corporate Veil) कर देती है।
    • इस स्थिति में प्रमोटरों और निदेशकों का सीमित दायित्व समाप्त हो जाता है और वे कंपनी के संपूर्ण नुकसान के लिए असीमित व्यक्तिगत देनदारी (Unlimited Personal Liability) के भागीदार बन जाते हैं।
  • शैम ट्रांजैक्शंस (Sham Invoices) और मनी लॉन्ड्रिंग सिंडिकेट:
    • अदालत ने पाया कि एनएमसी हेल्थकेयर में अपनाया गया ‘सप्लायर फाइनेंसिंग मॉडल’ पूरी तरह से फर्जी था।
    • वास्तविक दवाओं या चिकित्सा उपकरणों की खरीद नहीं होती थी, बल्कि केवल कागजों पर फर्जी बिल तैयार कर अंतरराष्ट्रीय व खाड़ी के बैंकों से अरबों डॉलर की क्रेडिट लाइन उठाई जाती थी। यह प्रक्रिया सीधे तौर पर वित्तीय धोखाधड़ी और जालसाजी के दायरे में आती है।

विधिक प्रतिनिधित्व एवं उपस्थित वरिष्ठ बैरिस्टर (Counsel Details)

इस बहु-अरब डॉलर के वैश्विक मुकदमे में इंग्लैंड और यूएई के शीर्ष किंग्स काउंसल (KC) और विधि फर्मों ने पैरवी की:

पक्षकारविधिक प्रतिनिधित्व (Counsel & Solicitors)
एनएमसी हेल्थकेयर व संयुक्त प्रशासक (Joint Administrators)बैरिस्टर्स: बंकिम थानकी केसी (Bankim Thanki KC), हेनरी किंग केसी (Henry King KC), रॉबिन लूफ (Robin Lööf), एलेक्जेंड्रा व्हेलन, डेमियन ब्रूनो, जेरोम स्क्वायर्स, अली अल ऐदारौस एवं अली अल हाशमी।
लॉ फर्म: क्विन इमैनुएल उर्कहार्ट एंड सुलिवन यूके एलएलपी (Quinn Emanuel Urquhart & Sullivan UK LLP)।
अबू धाबी कमर्शियल बैंक (ADCB – प्रमुख लेनदार बैंक)बैरिस्टर्स: राजेश पिल्लई केसी (Rajesh Pillai KC), स्कॉट राल्स्टन, रेबेका जमान, लुकास जोन्स, अली अल ऐदारौस एवं अली अल हाशमी।
लॉ फर्म: होलमैन फेनविक विलन एलएलपी (Holman Fenwick Willan LLP)।
प्रतिवादी 1: डॉ. बी.आर. शेट्टीबैरिस्टर: काजेतान वांडोविज़ (Kajetan Wandowicz)।
निर्देशन: विश्वजीत दुबे (Bishwajit Dubey)।
प्रतिवादी 2: प्रशांत मंगतबैरिस्टर: पैट्रिक हेनेसी (Patrick Hennessey) (प्रत्यक्ष निर्देश)।
प्रतिवादी 3: बैंक ऑफ बड़ौदा (समझौते से पूर्व)प्रमुख वरिष्ठ बैरिस्टर्स: हरीश साल्वे केसी (Harish Salve KC), विक्टोरिया विंडल केसी (Victoria Windle KC), सारा ट्रेसमैन, सीलिया रूनी, टिमोथी लाउ, मारिया कैनेडी, मार्क बाल्डॉक, हबीब अल मुल्ला, हनी माहेर, करेन सेफ, अहमद अल जाबी एवं शिबली मल्लत।

विधिक विवरण एवं संदर्भ

  • न्यायालय: अबू धाबी ग्लोबल मार्केट (ADGM) कोर्ट्स — कोर्ट ऑफ फर्स्ट इंस्टेंस (वाणिज्यिक एवं दिवाला क्षेत्राधिकार, संयुक्त अरब अमीरात)
  • केस संदर्भ: NMC Healthcare Ltd (in administration) & Ors v. Dr. Bavaguthu Raghuram Shetty, Prasanth Manghat, Bank of Baroda & Ors [ADGM Court Judgment Dated 05.11.2026]
  • पीठासीन न्यायाधीश: जस्टिस सर एंड्रयू स्मिथ (Justice Sir Andrew Smith)
  • निर्णय की तिथि: 5 नवंबर 2026
  • कार्यवाही का परिणाम: डॉ. बी.आर. शेट्टी और प्रशांत मंगत कपटपूर्ण व्यापार (Fraudulent Trading) के दोषी करार; $5.397 बिलियन की प्राथमिक क्षतिपूर्ति देनदारी तय; ब्याज, लागत और अंतिम वसूली आदेश हेतु आगे की सुनवाई नियत; बैंक ऑफ बड़ौदा के साथ समझौता होने के कारण उसके विरुद्ध कार्यवाही समाप्त।
  • प्रासंगिक कानून एवं विधिक उपबंध:
    • ADGM इनसॉल्वेंसी रेगुलेशंस, 2022 (ADGM Insolvency Regulations, 2022) — कपटपूर्ण व्यापार (धारा 256) एवं अनुचित व्यापार (धारा 257)
    • लंदन स्टॉक एक्सचेंज लिस्टिंग रूल्स एवं यूके कंपनी अधिनियम, 2006 (वित्तीय विवरणियों का प्रकटीकरण)
    • अंतरराष्ट्रीय दिवाला विधि — कॉर्पोरेट आवरण का भेदन एवं लेनदारों के विरुद्ध धोखाधड़ी
  • संबद्ध न्यायिक सिद्धांत:
    • कपटपूर्ण व्यापार, प्रमोटरों का व्यक्तिगत दायित्व और कॉर्पोरेट दिवालियापन का विधिक मानक: ‘जब किसी सार्वजनिक सूचीबद्ध समूह का प्रबंधन जानबूझकर फर्जी चालानों, गुप्त बैंक ऋणों और वित्तीय विवरणियों में हेरफेर के माध्यम से लेनदारों और निवेशकों को धोखा देने की योजना में लिप्त पाया जाता है, तो कंपनी की अलग विधिक पहचान का आवरण (Corporate Veil) पूरी तरह समाप्त हो जाता है; कंपनी के संस्थापक-अध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) यह कहकर अपने दायित्व से नहीं बच सकते कि वे वित्तीय मामलों से अनभिज्ञ थे अथवा वे स्वयं अधीनस्थ अधिकारियों की धोखाधड़ी के शिकार हैं; 500 से अधिक अनधिकृत बैंक लेन-देन के जरिए अरबों डॉलर की धनराशि प्रमोटर के निजी बैंक खातों, निजी जेट्स और विदेशी संपत्तियों में भेजा जाना कपटपूर्ण व्यापार (Fraudulent Trading) को अचूक रूप से सिद्ध करता है; ऐसे दोषी अधिकारी कंपनी की परिसंपत्तियों में संपूर्ण नुकसान की भरपाई करने के लिए व्यक्तिगत रूप से असीमित उत्तरदायित्व के अधीन होते हैं; तथा जहाँ किसी प्रतिवादी बैंक के साथ प्रशासकों का स्वतंत्र समझौता हो जाता है, वहाँ न्यायालय उस बैंक के संबंध में कोई प्रतिकूल विधिक निष्कर्ष दिए बिना दावे का निस्तारण कर सकती है।’
  • वर्तमान स्थिति व अंतिम प्रभाव: अबू धाबी ग्लोबल मार्केट कोर्ट के इस फैसले के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बी.आर. शेट्टी और प्रशांत मंगत की भारत, यूएई, ब्रिटेन और अमेरिका में स्थित व्यक्तिगत संपत्तियों, विला, बैंक खातों और निवेशों की जब्ती और कुर्की की प्रक्रिया तेज होगी; प्रशासक $5.397 बिलियन की इस वसूली डिक्री को विभिन्न देशों की अदालतों (विशेषकर भारत और ब्रिटेन) में निष्पादित (Execution of Foreign Decree) कराने के लिए आगे बढ़ेंगे। वहीं, बैंक ऑफ बड़ौदा के लिए यह समझौता बड़ी विधिक राहत लेकर आया है, जिससे उस पर मंडरा रहा अरबों डॉलर के दावों और अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा के नुकसान का जोखिम समाप्त हो गया है।

Fraudulent Trading: मामले का संक्षिप्त विवरण (At A Glance)

विवरणजानकारी
संबंधित अदालतआबू धाबी ग्लोबल मार्केट प्रथम दृष्टया न्यायालय (ADGM Court of First Instance, UAE)
न्यायाधीशजस्टिस सर एंड्रयू स्मिथ (Justice Sir Andrew Smith)
उत्तरदायी व्यक्तिडॉ. बी.आर. शेट्टी (संस्थापक, NMC) एवं प्रशांत मंगत (पूर्व सीईओ, NMC)
मूल्यांकन आधार राशि$5.397 बिलियन (कंपनी परिसंपत्तियों की क्षतिपूर्ति का प्रारंभिक बिंदु)
प्रमुख पक्षकार/प्रतिनिधित्वNMC प्रशासक पक्ष: बैंकिम थंकी KC, हेनरी किंग KC आदि | बी.आर. शेट्टी पक्ष: काजेतन वांडोविच | बैंक ऑफ बड़ौदा पक्ष: हरीश साल्वे KC
कथित वित्तीय विसंगतियां1. शेट्टी के व्यक्तिगत खातों में 500 से अधिक भुगतानों के जरिए AED 4.18 बिलियन का हस्तांतरण (शुद्ध भुगतान ~AED 2.6 बिलियन)।
2. दिसंबर 2018 तक $3.88 बिलियन की अप्रकट उधारी को केवल $1.99 बिलियन दिखाना।
अदालत का अंतिम आदेशधोखाधड़ी हेतु उत्तरदायी (Liable for Fraudulent Trading): अंतिम मौद्रिक क्षतिपूर्ति, ब्याज और अदालती खर्चों के निर्धारण हेतु पृथक सुनवाई का निर्णय; बैंक ऑफ बड़ौदा के साथ समझौता होने के कारण उसके खिलाफ मामला बंद।
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