Tuesday, August 18, 2026
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Lokpal Judgment: सेबी की पूर्व प्रमुख माधबी पुरी बुच को लोकपाल से क्लीन चिट…यह है मामला

Lokpal Judgment: सेबी की पूर्व चेयरपर्सन माधबी पुरी बुच को बड़ी राहत मिली है।

कोई ठोस या प्रमाणिक सबूत नहीं है: लोकपाल

भ्रष्टाचार के मामलों की जांच करने वाले लोकपाल ने उनके खिलाफ हिंडनबर्ग रिसर्च रिपोर्ट के आधार पर दर्ज शिकायतों को खारिज कर दिया है। लोकपाल ने कहा कि ये आरोप केवल अनुमान और कल्पनाओं पर आधारित हैं, जिनके समर्थन में कोई ठोस या प्रमाणिक सबूत नहीं है।

तीन लोगों ने दर्ज कराई थी शिकायत

लोकपाल ने अपने आदेश में कहा कि तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा समेत तीन लोगों द्वारा दर्ज की गई शिकायतें एक ऐसे शॉर्ट सेलर की रिपोर्ट पर आधारित थीं, जिसका उद्देश्य अदाणी ग्रुप को निशाना बनाना था। 10 अगस्त 2024 को प्रकाशित इस रिपोर्ट में दावा किया गया था कि बुच और उनके पति की कुछ ऑफशोर फंड्स में हिस्सेदारी है, जिनका इस्तेमाल कथित रूप से अदाणी ग्रुप से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग में हुआ।

बुच ने आरोपों को सिरे से खारिज किया

बुच ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा था कि यह पूंजी बाजार नियामक की साख को नुकसान पहुंचाने और उनकी छवि खराब करने की कोशिश है। अदाणी ग्रुप ने भी इन आरोपों को दुर्भावनापूर्ण और भ्रामक बताया था। लोकपाल की छह सदस्यीय पीठ, जिसकी अध्यक्षता जस्टिस एएम खानविलकर कर रहे थे, ने कहा कि इन शिकायतों में लगाए गए आरोप न तो किसी अपराध की श्रेणी में आते हैं और न ही जांच की जरूरत बनती है। इसलिए इन्हें खारिज किया जाता है।

बुच ने 2 मार्च 2022 को सेबी प्रमुख का पद संभाला था

बुच ने 2 मार्च 2022 को सेबी प्रमुख का पद संभाला था और 28 फरवरी 2024 को अपना कार्यकाल पूरा किया। लोकपाल ने यह भी स्पष्ट किया कि सिर्फ हिंडनबर्ग रिपोर्ट के आधार पर कोई कार्रवाई नहीं की जा सकती। लोकपाल ने कहा कि शिकायतकर्ताओं ने रिपोर्ट से अलग होकर स्वतंत्र आरोप लगाने की कोशिश की, लेकिन जांच में वे आरोप भी निराधार, अप्रमाणित और सतही पाए गए। नवंबर 2023 में लोकपाल ने बुच से इन शिकायतों पर जवाब मांगा था, जिसका उन्होंने दिसंबर में हलफनामे के जरिए जवाब दिया।

बुच और शिकायतकर्ताओं को मौखिक सुनवाई का मौका भी दिया

बुच और शिकायतकर्ताओं को मौखिक सुनवाई का मौका भी दिया गया। सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ताओं ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 और 11 के तहत आरोप लगाए, लेकिन लोकपाल ने पाया कि ये आरोप भी कमजोर और राजनीतिकरण की कोशिश हैं। लोकपाल ने कहा कि शिकायतकर्ताओं ने बिना प्रमाण के आरोप लगाकर इस प्रक्रिया को तुच्छ बना दिया। यह शिकायतें लोकपाल अधिनियम की धारा 46 के तहत दंडनीय हो सकती हैं।

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