Monday, August 10, 2026
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Forum hunting: मुवक्किल इनचार्ज कोर्ट से आदेश नहीं चाहते…महिला वकील की टिप्पणी पर यह कहा कोर्ट ने

Forum hunting: बॉम्बे हाईकोर्ट ने पुणे की एक महिला वकील के खिलाफ सेशंस कोर्ट के जज द्वारा की गई कुछ टिप्पणियों को हटाने से इनकार कर दिया है।

संबंधित वकील ने बिना शर्त माफी का दिया आवेदन

कोर्ट ने कहा कि आमतौर पर अदालतें वकीलों की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाली टिप्पणियों से बचती हैं, लेकिन इस मामले में जज की टिप्पणी याचिकाकर्ता द्वारा बार-बार इनचार्ज कोर्ट से बचने की कोशिश के चलते की गई प्रतीत होती है। हालांकि, जस्टिस रेवती मोहिते डेरे और डॉ. नीला गोखले की बेंच ने कहा कि संबंधित वकील पुणे के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश के समक्ष बिना शर्त माफी के साथ आवेदन देकर टिप्पणी हटाने की मांग कर सकती हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि ऐसा आवेदन किया जाता है तो संबंधित अदालत उसे स्वतंत्र रूप से, इस आदेश की टिप्पणियों से प्रभावित हुए बिना, तय करेगी।

यह है मामला

यह याचिका एक वकील ने दायर की थी, जो एक 19 वर्षीय युवक की जमानत याचिका से जुड़े पुणे सेशंस कोर्ट के आदेशों को चुनौती दे रही थीं। वकील शिकायतकर्ता की ओर से पेश हो रही थीं और उनका कहना था कि यह महिला केंद्रित मामला है, इसलिए इसे नियमित कोर्ट में ही सुना जाना चाहिए। चूंकि नियमित कोर्ट के जज छुट्टी पर थे, इसलिए मामला इनचार्ज कोर्ट में चल रहा था। वकील की ओर से पेश हुए एडवोकेट प्रियल सरडा ने हाईकोर्ट को बताया कि महिला वकील ने स्पष्ट कर दिया था कि वह इनचार्ज कोर्ट में बहस नहीं करना चाहतीं। उन्होंने कहा कि चूंकि नियमित कोर्ट कुछ ही दिनों में उपलब्ध होने वाला था, इसलिए इनचार्ज कोर्ट को आदेश पारित करने की जरूरत नहीं थी। सरडा ने यह भी कहा कि जिन टिप्पणियों को हटाने की मांग की जा रही है, वे याचिकाकर्ता की सामाजिक और पेशेवर प्रतिष्ठा को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती हैं।

पुणे कोर्ट की टिप्पणियां

हाईकोर्ट ने पुणे कोर्ट के रिकॉर्ड का अवलोकन किया और पाया कि 2 जनवरी 2025 को कोर्ट ने वकील की दलीलों को निष्पक्ष रूप से दर्ज किया था। लेकिन अगले दिन जब वकील ने फिर से यह कहते हुए स्थगन मांगा कि उनके मुवक्किल इनचार्ज कोर्ट से आदेश नहीं चाहते, तो कोर्ट ने टिप्पणी की कि यह कोर्ट को आदेश पारित करने से रोकने की कोशिश है। 4 जनवरी 2025 को भी वकील ने यही प्रक्रिया अपनाई, जिसके बाद पुणे के जज ने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता जानबूझकर मामले में देरी करना चाहती हैं या उपयुक्त मंच की तलाश में हैं (फोरम हंटिंग)। आदेश में यह भी कहा गया कि याचिकाकर्ता का व्यवहार ऐसा था मानो वह कोर्ट को आदेश न देने का निर्देश दे रही हों।

कोर्ट को डराने की कोशिश

हाईकोर्ट की बेंच ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि जज को डराने और आदेश पारित करने से रोकने के लिए परिस्थितियां बनाई जा रही थीं। बेंच ने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसा कोई नियम नहीं है कि जमानत याचिका केवल नियमित कोर्ट में ही सुनी जाए, जबकि इनचार्ज कोर्ट सुनवाई के लिए तैयार हो। बेंच ने कहा कि पुणे के जज की अधिकतर टिप्पणियां न्यायिक मर्यादा के दायरे में थीं, सिवाय उस टिप्पणी के जिसमें कहा गया था कि वकील का व्यवहार बार एसोसिएशन को रिपोर्ट करने योग्य है। कोर्ट ने यह भी देखा कि याचिकाकर्ता को इनचार्ज कोर्ट में बहस न करने की जिद के पीछे अपना पक्ष रखने का पूरा मौका दिया गया था।

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