LIVE IN case: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि भारतीय मध्यम वर्गीय समाज में लिव-इन रिलेशनशिप का कॉन्सेप्ट तय कानून के खिलाफ है।
युवक ने मामले में दी जमानत
कोर्ट ने यह टिप्पणी एक युवक को जमानत देते हुए की, जिस पर शादी का झांसा देकर नाबालिग से शारीरिक संबंध बनाने और फिर शादी से इनकार करने का आरोप है। कोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा लिव-इन रिलेशनशिप को कानूनी मान्यता देने के बाद ऐसे मामलों की संख्या तेजी से बढ़ी है। कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि अब ऐसे केस बड़ी संख्या में अदालतों में आ रहे हैं, क्योंकि यह कॉन्सेप्ट भारतीय मध्यम वर्गीय समाज के तय कानून और सामाजिक ढांचे से मेल नहीं खाता।
महिलाओं को ज्यादा नुकसान
कोर्ट ने कहा कि लिव-इन रिलेशनशिप का सबसे ज्यादा नुकसान महिलाओं को होता है। पुरुष ऐसे रिश्तों के खत्म होने के बाद आगे बढ़ जाते हैं और शादी कर लेते हैं, लेकिन महिलाओं के लिए ब्रेकअप के बाद नया जीवनसाथी ढूंढना मुश्किल हो जाता है।
जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान की टिप्पणी
यह टिप्पणी कोर्ट ने 24 जून को आरोपी शेन आलम की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए की। आरोपी पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) और पॉक्सो एक्ट (POCSO) की धाराओं के तहत केस दर्ज है। आरोप है कि उसने एक नाबालिग लड़की को शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाए और बाद में शादी से इनकार कर दिया।
दोनों ने साथ में कई जगह की यात्रा
आरोपी के वकील ने कोर्ट में कहा कि पीड़िता और आरोपी ने साथ में कई जगहों की यात्रा की थी। उन्होंने यह भी बताया कि आरोपी 22 फरवरी से जेल में है और उसका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है।
पीड़िता की जिंदगी बर्बाद कर दी: वादी पक्ष
वहीं, वादी पक्ष के वकील ने कहा कि आरोपी ने लड़की की जिंदगी बर्बाद कर दी है। अब कोई उससे शादी नहीं करेगा।
युवाओं को आकर्षित कर रहा लिव-इन, लेकिन परिणाम गंभीर
कोर्ट ने कहा कि लिव-इन रिलेशनशिप का कॉन्सेप्ट युवाओं को बहुत आकर्षित कर रहा है, लेकिन इसके परिणाम गंभीर होते हैं। यह केस भी इसका उदाहरण है।

