Thursday, November 5, 2026
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DV Act: अधूरे फ्लैट को साझा घर नहीं माना जा सकता…किश्त चुकाने के मामले में यह कहा बॉम्बे हाईकोर्ट ने

DV Act: बॉम्बे हाईकोर्ट ने घरेलू हिंसा कानून(Domestic Violence Act-DV Act) की व्याख्या करते हुए एक अहम फैसला दिया है।

निर्माणाधीन फ्लैट को ‘साझा घर’ नहीं मान सकते

कोर्ट ने कहा कि निर्माणाधीन फ्लैट को ‘साझा घर’ नहीं माना जा सकता। इसलिए पति को उसकी पत्नी के निवास अधिकार के लिए उस फ्लैट की बाकी किश्तें चुकाने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।

फ्लैट की बाकी किश्तें चुकाने का निर्देश मांगा था

यह आदेश जस्टिस मंजूषा देशपांडे ने शुक्रवार को दिया। उन्होंने गोरेगांव की 45 वर्षीय महिला की याचिका खारिज कर दी। महिला ने अपने 55 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर पति से, जो अमेरिका में काम करता है, मलाड वेस्ट में बुक किए गए ₹3.52 करोड़ के फ्लैट की बाकी किश्तें चुकाने का निर्देश मांगा था। यह फ्लैट दोनों के नाम पर बुक था। कोर्ट ने कहा कि जब तक फ्लैट का कब्जा नहीं मिल जाता और भुगतान पूरा नहीं होता, तब तक उसे घरेलू हिंसा कानून, 2005 की धारा 2(एस) के तहत ‘साझा घर’ नहीं माना जा सकता।

शादी के बाद अमेरिका गया पति, फिर लौटकर फ्लैट बुक किया

इस दंपती की शादी मई 2013 में हुई थी। शुरुआत में दोनों ठाणे के किराए के फ्लैट में रहते थे। 2019 में पति काम के सिलसिले में अमेरिका चला गया। महिला के मुताबिक, वहां रहते हुए उसका किसी और से संबंध बन गया। हालांकि, जब वह फरवरी 2020 में भारत लौटा और मुंबई में बसने का वादा किया, तो महिला ने रिश्ते को एक और मौका दिया।

मलाड वेस्ट में बुक कराया था फ्लैट

पति ने मलाड वेस्ट में 1,029 वर्गफुट का निर्माणाधीन फ्लैट बुक कराया। लेकिन महिला का आरोप है कि 2021 में जब वे मलाड के एक और किराए के फ्लैट में रहने लगे, तो पति ने फिर से उसे प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। इसके बाद महिला ने बोरीवली मजिस्ट्रेट कोर्ट में घरेलू हिंसा की शिकायत दर्ज कराई।

तीन अदालतों ने याचिका खारिज की

कार्यवाही के दौरान महिला ने मांग की कि पति को मलाड फ्लैट की बाकी किश्तें चुकाने का आदेश दिया जाए, ताकि उसे निवास का अधिकार मिल सके। लेकिन मजिस्ट्रेट कोर्ट ने 3 जून 2024 को यह याचिका खारिज कर दी। फिर डिंडोशी सेशंस कोर्ट ने 19 अक्टूबर 2024 को इस आदेश को बरकरार रखा। इसके बाद महिला ने हाईकोर्ट में अपील की।

कोर्ट ने कहा- कब्जा नहीं, तो साझा घर नहीं

हाईकोर्ट ने महिला की अपील खारिज करते हुए कहा कि घरेलू हिंसा कानून महिला को साझा घर में रहने का अधिकार देता है, लेकिन इसके लिए फ्लैट पर वास्तविक कब्जा या निवास जरूरी है। चूंकि यह फ्लैट अभी निर्माणाधीन है और किसी के कब्जे में नहीं है, इसलिए इसे साझा घर नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने कहा कि पति या उसके नियोक्ता को फ्लैट की बाकी किश्तें चुकाने का आदेश देना कानून की सीमाओं से बाहर होगा। यह घरेलू हिंसा कानून के दायरे से परे की बात होगी।

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