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Adoption Policy: गोद लेने से पहले और बाद में अब काउंसलिंग जरूरी…CARA ने सभी राज्यों को निर्देश दिए

Adoption Policy: गोद लेने की प्रक्रिया को भावनात्मक रूप से बेहतर और स्थायी बनाने के लिए निर्देश दिए हैं।

जैविक माता-पिता के लिए साइकोसोशल सपोर्ट सिस्टम मजबूत करें

केंद्र सरकार की शीर्ष संस्था सेंट्रल अडॉप्शन रिसोर्स अथॉरिटी (CARA) ने सभी राज्यों से कहा कि वे गोद लेने वाले माता-पिता, गोद लिए गए बच्चों और बच्चे को सौंपने वाले जैविक माता-पिता के लिए साइकोसोशल सपोर्ट सिस्टम मजबूत करें। इसके तहत गोद लेने से पहले, प्रक्रिया के दौरान और बाद में काउंसलिंग अनिवार्य की गई है।

सभी राज्य अडॉप्शन एजेंसियों (SARA) को निर्देश दिए

CARA ने 7 जुलाई को जारी एक ऑफिस मेमोरेंडम में कहा कि अडॉप्शन रेगुलेशन 2022 के तहत यह जरूरी है कि गोद लेने से जुड़ी सभी पार्टियों को प्रोफेशनल और लगातार काउंसलिंग दी जाए। इसके लिए सभी राज्य अडॉप्शन एजेंसियों (SARA) को निर्देश दिए गए हैं कि वे जिला और राज्य स्तर पर प्रशिक्षित काउंसलर नियुक्त करें या पैनल में शामिल करें। ये काउंसलर चाइल्ड साइकोलॉजी, सोशल वर्क या मेंटल हेल्थ के क्षेत्र में प्रशिक्षित होने चाहिए।

गोद लेने से पहले की काउंसलिंग अनिवार्य

CARA ने कहा कि गोद लेने की प्रक्रिया शुरू करने से पहले, होम स्टडी रिपोर्ट के दौरान संभावित दत्तक माता-पिता को काउंसलिंग देना जरूरी होगा। वहीं, बड़े बच्चों को गोद लेने से पहले और प्रक्रिया के दौरान भावनात्मक सहयोग दिया जाएगा।

जैविक माता-पिता को भी दी जाएगी काउंसलिंग

CARA ने राज्यों को यह भी निर्देश दिए हैं कि जो जैविक माता-पिता अपने बच्चे को गोद देने के लिए सौंपते हैं, उन्हें यह स्पष्ट रूप से समझाया जाए कि 60 दिन बाद यह फैसला अंतिम हो जाता है और वे इसे वापस नहीं ले सकते। साथ ही, बच्चे को भविष्य में अपनी जड़ों की तलाश का अधिकार भी बताया जाए।

हर काउंसलिंग का रिकॉर्ड रखना होगा

CARA ने कहा कि सभी काउंसलिंग सेशन और साइकोसोशल हस्तक्षेप का पूरा रिकॉर्ड विशेष अडॉप्शन एजेंसी और जिला बाल संरक्षण इकाई स्तर पर रखा जाए। साथ ही, सभी जिलों, बाल देखभाल संस्थानों और संबंधित विभागों में इन निर्देशों का पालन सुनिश्चित किया जाए।

इन स्थितियों में भी जरूरी होगी काउंसलिंग

  • जब गोद लिया गया बच्चा अपनी जैविक जड़ों की तलाश शुरू करे
  • जब बच्चा और गोद लेने वाले परिवार के बीच तालमेल न बन पाए
  • जब गोद लेने की प्रक्रिया में कोई बाधा या टूटने के संकेत दिखें
  • जब किसी भी स्थिति में साइकोसोशल हस्तक्षेप की जरूरत हो
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