Tuesday, August 4, 2026
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Court News: वकीलों को डराना न्याय व्यवस्था की नींव पर हमला…इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी

Court News: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि वकीलों को उनके पेशेवर कर्तव्यों के लिए डराना न्याय व्यवस्था की नींव को हिला देता है।

जनहित याचिका पर सुनवाई

हाईकोर्ट ने एक जनहित याचिका (PIL) के मामले में 90 वर्षीय याचिकाकर्ता और उनके वकील को धमकाने के आरोपों को बेहद गंभीर मानते हुए यूपी पुलिस पर सख्त टिप्पणी की है। कहा, अगर आरोप सही पाए गए तो इसमें आपराधिक अवमानना की सबसे सख्त सजा दी जाएगी।

यह है मामला

यह मामला जौनपुर जिले के बदगांव गांव की ग्राम सभा की जमीन पर कथित अतिक्रमण से जुड़ा है। याचिकाकर्ता गौरी शंकर सरोज की ओर से 3 जुलाई 2025 को सुनवाई के दौरान उनके वकील ने कोर्ट को बताया कि पुलिस ने याचिकाकर्ता को धमकाया और उनके बेटे को थाने ले जाने की कोशिश की, जिसे गांव के प्रधान ने रोका। आरोप है कि पुलिस याचिका वापस लेने का दबाव बना रही थी।

नाली विवाद पर शिकायत की बात पुलिस ने कही

कोर्ट ने इसे गंभीर मानते हुए जौनपुर के एसपी से व्यक्तिगत हलफनामा मांगा। 8 जुलाई को एसपी की ओर से दाखिल हलफनामे में कहा गया कि एडिशनल एसपी (ग्रामीण) ने जांच की और संबंधित कांस्टेबल को क्लीन चिट दी। रिपोर्ट में बताया गया कि याचिकाकर्ता और विपक्षी पक्ष के बीच जमीन विवाद है और पुलिस सिर्फ नाली विवाद की शिकायत पर कार्रवाई कर रही थी।

पुलिस की रिपोर्ट से कोर्ट संतुष्ट नहीं

हालांकि, कोर्ट इस रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं हुआ। याचिकाकर्ता गौरी शंकर सरोज और उनके पोते रजनीश सरोज ने कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से पेश होकर पुलिस द्वारा की गई प्रताड़ना की समान बातें बताईं। कोर्ट ने माना कि पुलिस की मंशा पहले से तय थी और वे एक पूर्व सैनिक बुजुर्ग को याचिका वापस लेने के लिए मजबूर कर रहे थे। आरोप यह भी है कि कांस्टेबल पंकज मौर्य ने याचिकाकर्ता के पोते से गिरफ्तारी की धमकी देकर पैसे वसूले।

एसपी ने पुलिस की गलती स्वीकार की

कोर्ट ने एडिशनल एसपी की जांच को महत्वहीन मानते हुए एसपी जौनपुर को दोबारा जांच कर 11 जुलाई तक व्यक्तिगत हलफनामा देने का आदेश दिया। 11 जुलाई को एसपी डॉ. कौस्तुभ ने हलफनामा दाखिल किया, जिसमें पुलिसकर्मियों की गलती स्वीकार की गई।

वकील के घर पर छापा, कोर्ट ने जताई नाराजगी

याचिकाकर्ता के वकील विष्णु कांत तिवारी ने कोर्ट को बताया कि 9 जुलाई की रात पुलिस ने उनके घर पर छापा मारा और उनके पिता से बदसलूकी की। पुलिस यह पूछ रही थी कि वे जौनपुर मुख्यालय क्यों गए थे। वकील ने अपने हलफनामे में कहा कि जब उन्होंने फोन नहीं उठाया तो पुलिस बल के साथ उनके घर पहुंच गई और रात में उन्हें गिरफ्तार करने का दबाव बनाया।

वकील को परेशान करने पर कड़ी प्रतिक्रिया

कोर्ट ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी और कहा कि देशभर में यह खतरनाक प्रवृत्ति देखी जा रही है कि वकीलों को उनके केस के लिए परेशान किया जा रहा है। कोर्ट ने इसे न्याय व्यवस्था पर हमला बताया और यूपी सरकार के अपर मुख्य सचिव (गृह) को मामले में पक्षकार बनाया।

वकील और परिवार को सुरक्षा देने का आदेश

कोर्ट ने वकील विष्णु कांत तिवारी और उनके परिवार की सुरक्षा के लिए विस्तृत आदेश जारी किया। आदेश में कहा गया कि कोई भी पुलिसकर्मी वकील या उनके परिवार से संपर्क नहीं करेगा, उन्हें धमकाएगा, गिरफ्तार या परेशान नहीं करेगा और उनके घर में प्रवेश नहीं करेगा। यदि कोई पुलिस कार्रवाई करनी हो तो पहले कोर्ट से अनुमति लेनी होगी।

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