Child testimony: अलीगढ़ में पत्नी की दहेज के लिए हत्या करने वाले आरोपी को स्थानीय अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई है।
वारदात के घर में मौजूद था चार साल का बेटा
यह फैसला 4 साल के बेटे की गवाही के आधार पर हुआ, जो वारदात के वक्त घर में मौजूद था। अतिरिक्त जिला जज संजय यादव ने 14 जुलाई को यह फैसला सुनाते हुए आरोपी अखिलेश को उसकी 32 वर्षीय पत्नी सावित्री की हत्या का दोषी ठहराया। यह घटना 10 फरवरी 2022 को गभाना थाना क्षेत्र के नगला बंजारा गांव में हुई थी।
बच्चे की गवाही पूरी तरह स्पष्ट व सटीक
अदालत ने इस मामले को अहम बताते हुए कहा कि बच्चे की गवाही पूरी तरह स्पष्ट और सटीक थी। जबकि बाकी गवाहों, जिनमें मृतका की मां लीलावती और भाई रामअवतार शामिल हैं, ने अपने पहले दिए बयान से पलटी मार ली थी। लेकिन फॉरेंसिक रिपोर्ट और बच्चे की गवाही में समय और मौत के कारण को लेकर पूरी समानता थी।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सुसाइड को नकारा
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में आत्महत्या की बात को नकारते हुए गला दबाकर हत्या की पुष्टि की गई। यह आरोपी और उसके परिवार के दावों के विपरीत था। 4 साल के बेटे ने अदालत में बताया कि घटना वाले दिन उसके पिता घर पर ही थे, जबकि परिवार के अन्य सदस्यों ने कहा था कि वह गांव में नहीं थे।
नाबालिग ने कहा: मैं कभी झूठ नहीं बोलूंगा
नाबालिग ने अदालत में कहा, “मैं कभी झूठ नहीं बोलूंगा, मुझे सब कुछ साफ-साफ याद है।” अदालत ने अपने फैसले में इस बयान का उल्लेख किया। रामअवतार के व्यवहार पर भी अदालत ने नाराजगी जताई। उसने पहले दहेज हत्या की शिकायत की थी, लेकिन बाद में आरोपी के पक्ष में बयान दे दिया कि वह घटना के समय गांव में नहीं था।
आरोपी ने 12 सालों तक दहेज के लिए प्रताड़ित किया
अभियोजन पक्ष के अनुसार, सावित्री को शादी के 12 सालों तक दहेज के लिए प्रताड़ित किया गया। आरोपी पक्ष की मांगों में मोटरसाइकिल भी शामिल थी। गवाहों के बयान बदलने के बावजूद, अदालत ने कहा कि फॉरेंसिक और मेडिकल सबूतों के साथ-साथ अतुल की सच्ची और अडिग गवाही ने आरोपी की दोषिता को पूरी तरह साबित कर दिया। परिवार के अनुसार, बच्चा अब भी उसी गांव में अपने दादा-दादी के साथ रह रहा है।

