Thursday, October 1, 2026
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NITHARI KOLI: निठारी कांड…बड़ी चूक…सबूत अधिनियम की धारा 27 पर फिट नहीं बैठी जांच

NITHARI KOLI: सुप्रीम कोर्ट ने 2006 के चर्चित निठारी सीरियल किलिंग केस में आरोपी सुरेंद्र कोली बरी कर दिया।

इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को बताया सही

शीर्ष कोर्ट ने आरोपी के खिलाफ दायर 14 अपीलों को खारिज कर दिया है। चीफ जस्टिस बीआर गवई की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले में कोई गलती नहीं है। कोर्ट ने कहा कि सबूत अधिनियम की धारा 27 के तहत, कोली के बयान के आधार पर पुलिस ने जो खोपड़ियां और अन्य सामान नाले से बरामद किए, वे कानूनी रूप से सबूत नहीं माने जा सकते। क्योंकि ये बरामदगी कोली के बयान को रिकॉर्ड किए बिना की गई थी। बेंच ने यह भी कहा कि केवल वही बरामदगी सबूत मानी जा सकती है, जो आरोपी के बताए स्थान से हो और वह जगह सिर्फ आरोपी की पहुंच में हो।

CBI और यूपी सरकार ने की थी अपील

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल CBI और उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई के लिए सहमति दी थी। ये याचिकाएं इलाहाबाद हाईकोर्ट के 16 अक्टूबर 2023 के फैसले को चुनौती देने के लिए दायर की गई थीं, जिसमें कोली को बरी कर दिया गया था। एक याचिका पीड़ित के पिता ने भी दायर की थी।

क्या था मामला

निठारी, उत्तर प्रदेश में मोनिंदर सिंह पंधेर और उनके घरेलू सहायक सुरेंद्र कोली पर पड़ोस के बच्चों समेत कई लोगों के रेप और हत्या का आरोप था। 28 सितंबर 2010 को ट्रायल कोर्ट ने कोली को फांसी की सजा सुनाई थी।

हाईकोर्ट ने दी थी राहत

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कोली और पंधेर दोनों को बरी कर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में नाकाम रहा और जांच को ‘नाकाम और भरोसे के साथ धोखा’ बताया था। हाईकोर्ट ने कोली के खिलाफ 12 मामलों और पंधेर के खिलाफ 2 मामलों में दी गई फांसी की सजा को पलट दिया था।

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