Monday, May 18, 2026
HomeSupreme CourtFire Insurance: आग लगने का कारण दावा खारिज करने का आधार नहीं…बीमा...

Fire Insurance: आग लगने का कारण दावा खारिज करने का आधार नहीं…बीमा जोखिम प्रबंधन पर टिप्पणी

Fire Insurance: सुप्रीम कोर्ट ने कहा, फायर इंश्योरेंस (आग बीमा) जोखिम प्रबंधन, संपत्ति संरक्षण और आर्थिक स्थिरता का एक रणनीतिक उपकरण है।

बीमा कंपनी के पक्ष में सुप्रीम फैसला

न्यायमूर्ति दीपंकर दत्ता और न्यायमूर्ति मनमोहन की पीठ ने यह टिप्पणी ओरियन कॉनमर्क्स प्राइवेट लिमिटेड के पक्ष में फैसला सुनाते हुए की। कंपनी ने नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के खिलाफ बीमा दावे की अस्वीकृति को चुनौती दी थी। कोर्ट ने कहा, “जब यह साबित हो जाए कि नुकसान आग से हुआ है और न तो धोखाधड़ी का आरोप है, न बीमाधारक आग का प्रेरक है, तब आग का कारण अप्रासंगिक हो जाता है। ऐसे मामलों में यह माना जाएगा कि आग दुर्घटनावश लगी और बीमा पॉलिसी के दायरे में आती है। फैसले में कहा गया कि सितंबर 2010 में कंपनी के परिसर में लगी आग दुर्घटनात्मक थी और बीमा पॉलिसी के तहत कवर होती है।

फायर इंश्योरेंस आग को रोक नहीं सकता…

न्यायमूर्ति मनमोहन ने कहा, “फायर इंश्योरेंस आग को रोक नहीं सकता, लेकिन आग लगने की स्थिति में वित्तीय झटका कम करने में मदद करता है। यह आर्थिक लचीलापन बनाए रखने का एक अहम माध्यम है। इसलिए इस बीमा के सिद्धांतों को स्पष्ट रूप से समझना आवश्यक है।” कोर्ट ने कहा कि कानून के अनुसार फायर इंश्योरेंस का अनुबंध आग से हुए नुकसान की भरपाई (इंडेम्निटी) के लिए होता है। फैसले में कहा गया, “आग बीमा तभी लागू होता है जब वास्तविक आग लगी हो; केवल गर्मी या रासायनिक प्रतिक्रिया के कारण नुकसान होने पर बीमा कंपनी जिम्मेदार नहीं होगी।”

आकस्मिक (Accidental) का अर्थ समझाया गया

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि “आकस्मिक (Accidental) का अर्थ है — ऐसा हादसा जो अप्रत्याशित रूप से या संयोगवश घटित हो। यदि आग जानबूझकर लगाई गई हो, तो वह बीमा दायरे से बाहर होगी।” हालांकि, कोर्ट ने कहा कि जब किसी मामले में आग लगने की परिस्थितियां संदिग्ध हों या बीमाधारक की मिलीभगत का संकेत दें, तभी आग का कारण महत्वपूर्ण हो जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने बीमा कंपनी की अपील खारिज करते हुए उसे मनमाना और अनुचित ठहराया और ओरियन कॉनमर्क्स की क्रॉस-अपील मंजूर करते हुए कंपनी को ब्याज सहित मुआवजा देने का निर्देश दिया।

यह है मामला

मामला 25 सितंबर 2010 को कंपनी के परिसर में लगी आग से जुड़ा था, जिसके बाद बीमा कंपनी ने नुकसान के दावे को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि आग की प्रकृति बीमा पॉलिसी के दायरे में नहीं आती। 2020 में राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) ने आंशिक रूप से कंपनी की शिकायत स्वीकार करते हुए नेशनल इंश्योरेंस को ₹61.39 लाख और 9% वार्षिक ब्याज देने का आदेश दिया था। दोनों पक्षों ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

नुकसान सिद्ध हो तो आग का कारण महत्वहीन

सर्वोच्च न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि “जब यह सिद्ध हो जाए कि नुकसान आग से हुआ है और बीमाधारक पर किसी प्रकार की धोखाधड़ी या जानबूझकर की गई लापरवाही का आरोप नहीं है, तब आग का कारण महत्वहीन हो जाता है।” सुप्रीम अदालत ने कहा, जब तक आग बीमाधारक की जानबूझी हरकत से नहीं लगी हो, तब तक उसके कारण का बीमा दावे से कोई संबंध नहीं है।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Patna
haze
35 ° C
35 °
35 °
59 %
3.1kmh
0 %
Mon
44 °
Tue
43 °
Wed
45 °
Thu
46 °
Fri
45 °

Recent Comments