Tuesday, August 4, 2026
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Maintenance Case: पत्नी के कारण पति की कमाई रुकी तो नहीं मिलेगा भरण-पोषण…इलाहाबाद हाईकोर्ट की टिप्पणी

Maintenance Case: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा, अगर पत्नी या उसके परिवार के कारण पति की कमाई की क्षमता खत्म हो जाए, तो पत्नी भरण-पोषण की मांग नहीं कर सकती।

यह एक गंभीर अन्याय है: अदालत

जस्टिस लक्ष्मी कांत शुक्ला की बेंच ने कहा कि जब पति की कमाई की क्षमता पत्नी के परिवार के आपराधिक कृत्य से खत्म हो गई हो, तो गुजारा भत्ता देना गलत होगा। कोर्ट ने इसे गंभीर अन्याय बताया।

यह है मामला

मामला कुशीनगर के पडरौना का है। यहां फैमिली कोर्ट ने 7 मई 2025 को पत्नी की अंतरिम भरण पोषण की अर्जी खारिज कर दी थी। पति होम्योपैथिक डॉक्टर था और अपना क्लिनिक चलाता था। 13 अप्रैल 2019 को जब वह क्लिनिक में काम कर रहा था, तभी पत्नी का भाई और पिता कुछ लोगों के साथ वहां पहुंचे। उन्होंने गाली-गलौज की। विरोध करने पर पत्नी के भाई ने गोली चला दी। गोली लगने से पति की रीढ़ की हड्डी में छर्रा फंस गया। डॉक्टरों ने बताया कि छर्रा निकालने पर लकवा हो सकता है। अब वह ठीक से बैठ भी नहीं सकता। इस कारण वह बेरोजगार हो गया।

पत्नी की याचिका को हाई कोर्ट में रद्द

पत्नी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा कि पति मेंटेनेंस देने के लिए बाध्य है। लेकिन कोर्ट ने कहा कि पति की मेडिकल स्थिति पर कोई विवाद नहीं है। कोर्ट ने माना कि पत्नी और उसके परिवार के कारण पति की कमाई की क्षमता खत्म हुई। ऐसे में उसे भरण-पोषण देने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के 2015 के फैसले शमीमा फारूकी बनाम शाहिद खान का हवाला दिया। उसमें कहा गया था कि पति की जिम्मेदारी उसकी कमाई की क्षमता पर निर्भर करती है। हाईकोर्ट ने पाया कि ट्रायल कोर्ट के फैसले में कोई गलती नहीं थी। इसलिए पत्नी की रिवीजन याचिका खारिज कर दी गई।

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