Tuesday, October 27, 2026
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Special Intensive Revision: पश्चिम बंगाल मतदाता सूची संशोधन (SIR)… Tribunals गठित करने का दिया आदेश

Special Intensive Revision: पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (Special Intensive Revision – SIR) की प्रक्रिया पर नजर रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए।

कोर्ट ने उन लोगों की अपीलों पर सुनवाई के लिए स्वतंत्र अपीलीय न्यायाधिकरणों (Appellate Tribunals) के गठन का आदेश दिया है, जिनके नाम मतदाता सूची से बाहर कर दिए गए हैं। इन न्यायाधिकरणों की अध्यक्षता हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त जज करेंगे। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस आर. महादेवन और जस्टिस जोयमाल्य बागची की पीठ ने स्पष्ट किया कि न्यायिक अधिकारियों के फैसलों को चुनाव आयोग का कोई प्रशासनिक अधिकारी चुनौती नहीं दे सकता।

अदालत की मुख्य टिप्पणियां और निर्देश

  • न्यायिक अधिकारियों पर सवाल उठाने पर फटकार: कोर्ट उन याचिकाओं पर बेहद नाराज हुआ जिनमें दावा किया गया था कि न्यायिक अधिकारियों को दावे और आपत्तियों को निपटाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। सीजेआई ने सख्त लहजे में कहा, “आपकी ऐसी अर्जी दाखिल करने की हिम्मत कैसे हुई? यह दिखाता है कि आपको भरोसा नहीं है… भारत के मुख्य न्यायाधीश के रूप में, मैं इसे बर्दाश्त नहीं करूंगा।
  • “स्वतंत्र अपीलीय मंच: कोर्ट ने कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से अनुरोध किया कि वे पूर्व मुख्य न्यायाधीशों और जजों के नाम सुझाएं, जिन्हें चुनाव आयोग अपीलीय न्यायाधिकरण के रूप में अधिसूचित करेगा।
  • लॉजिस्टिक और तकनीकी सहायता: कोर्ट ने बंगाल सरकार और चुनाव आयोग को आदेश दिया कि वे न्यायिक अधिकारियों को पूरी रसद और तकनीकी सहायता प्रदान करें। ऑनलाइन पोर्टल की तकनीकी खामियों को तुरंत दूर करने और नए लॉगिन आईडी बनाने के निर्देश भी दिए गए।

SIR प्रक्रिया का अब तक का लेखा-जोखा

विवरण आंकड़े/जानकारी
निपटाए गए दावे/आपत्तियां 9 मार्च की शाम तक 10.16 लाख
कुल तैनात न्यायिक अधिकारी लगभग 700 (500 बंगाल से, 200 ओडिशा और झारखंड से)
कुल आपत्तियां (अनुमानित) लगभग 80 लाखअगला कदम

अपीलीय न्यायाधिकरण का गठन

  • क्या है पूरा विवाद?पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी के आरोपों और राज्य सरकार व चुनाव आयोग के बीच ‘विश्वास की कमी’ (Trust Deficit) के कारण सुप्रीम कोर्ट इस प्रक्रिया की निगरानी कर रहा है। इससे पहले कोर्ट ने कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को निर्देश दिया था कि वे पड़ोसी राज्यों (ओडिशा और झारखंड) से न्यायिक अधिकारियों को बुलाएं ताकि 80 लाख से अधिक दावों और आपत्तियों का निष्पक्ष निपटारा हो सके।
  • मतदाताओं के लिए राहत:अदालत ने कहा कि जिन व्यक्तियों के दावे न्यायिक अधिकारियों द्वारा खारिज कर दिए गए हैं, वे अब नए बनाए गए अपीलीय न्यायाधिकरणों में अपनी गुहार लगा सकेंगे। कोर्ट ने चुनाव आयोग को यह भी निर्देश दिया कि वह कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की अनुमति के बिना प्रक्रिया में कोई भी ऐसा नया नियम न जोड़े जिससे काम में बाधा आए।
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