Wednesday, September 9, 2026
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Delhi News: MCD को 2015 से पता थीं साकेत की ढही इमारत में गड़बड़ियों की बातें, फिर भी मूंद रखी थीं आंखें, एमिकस क्यूरी का बड़ा खुलासा

Delhi News: सुप्रीम कोर्ट में दक्षिण दिल्ली के पॉश इलाके साकेत (Saidulajab, Saket) में हाल ही में ढही 5 मंजिला इमारत के दर्दनाक हादसे को लेकर एक बेहद चौंकाने वाली रिपोर्ट पेश की गई है।

वरिष्ठ अधिवक्ता और एमिकस क्यूरी अजीत कुमार सिन्हा ने तैयार की रिपोर्ट

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ के समक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता और एमिकस क्यूरी अजीत कुमार सिन्हा द्वारा तैयार की गई यह रिपोर्ट अधिवक्ता गोविंद जी के माध्यम से दाखिल की गई है। कोर्ट द्वारा नियुक्त एमिकस क्यूरी (न्यायालय मित्र) ने सीधे तौर पर दिल्ली नगर निगम (MCD) को इस तबाही और छह मासूमों की मौत का जिम्मेदार ठहराया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि एमसीडी को साल 2015 से इस अवैध निर्माण की पूरी जानकारी थी, लेकिन भ्रष्टाचार या मिलीभगत (Collusion) के चलते अधिकारी आंखें मूंदकर बैठे रहे।

क्या था साकेत हादसा? (6 मौतें और 14 घायल)

यह घटना 30 मई को साकेत के सैदुलाजाब स्थित वेस्टर्न मार्ग पर घटी थी। यहां एक 5 मंजिला अवैध इमारत अचानक ताश के पत्तों की तरह ढह गई। इस मलबे में दबने से 6 लोगों की मौत हो गई थी और कम से कम 14 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे। यह हादसा सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश के ठीक कुछ दिन बाद हुआ, जिसमें कोर्ट ने देश भर में अवैध निर्माणों पर कड़ा रुख अपनाया था।

एमसीडी का सबसे बड़ा झूठ: हाई कोर्ट को किया गुमराह

एमिकस क्यूरी की रिपोर्ट में एमसीडी के खिलाफ सबसे गंभीर और डराने वाला आरोप यह लगाया गया है कि निगम ने हादसे से महज छह हफ्ते पहले दिल्ली हाई कोर्ट में सफेद झूठ बोला था।

अब्दुल शाकिर की याचिका: इस इमारत में हो रहे धड़ल्ले से अवैध निर्माण को रोकने के लिए अब्दुल शाकिर नामक व्यक्ति ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी।

एमसीडी का जवाब: सुनवाई के दौरान एमसीडी के वकील ने हाई कोर्ट को आश्वस्त करते हुए कहा था कि “संबंधित संपत्ति पर फिलहाल किसी भी तरह का कोई निर्माण कार्य नहीं चल रहा है।” निगम ने कोर्ट को यह कहकर गुमराह करने की कोशिश की थी कि यह याचिका मकान मालिक और किरायेदार के निजी विवाद का नतीजा है।

रिपोर्ट में भंडाफोड़: एमिकस क्यूरी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि एमसीडी का यह दावा पूरी तरह झूठा था। इस साइट पर अवैध निर्माण पिछले एक दशक में तीन चरणों में बढ़ा है, और हैरानी की बात यह है कि हर चरण का रिकॉर्ड खुद एमसीडी के पास ही दर्ज था।

विश्लेषण: एक दशक में तीन चरणों में हुआ अवैध निर्माण

रिपोर्ट के मुताबिक, इस इमारत की नींव ही अवैधताओं पर टिकी थी, जिसे एमसीडी ने खुद समय-समय पर अपनी कागजी कार्रवाई में ‘बुक’ (दर्ज) किया था, लेकिन जमीन पर कभी कोई बुलडोजर नहीं चला।

निर्माण का चरणएमसीडी के रिकॉर्ड में स्थितिजमीनी हकीकत और अदालती आदेश
चरण 1 (वर्ष 2012)बेसमेंट, ग्राउंड फ्लोर और फर्स्ट फ्लोर के अवैध निर्माण को MCD ने 2012 में ही बुक किया थाअवैध होने के बावजूद इसे कभी तोड़ा या सील नहीं किया गया।
चरण 2 (वर्ष 2015)मकान मालिक ने नियमों को ताक पर रखकर दूसरी और तीसरी मंजिल (2nd & 3rd Floor) तान दी। MCD ने मई 2015 में इसे भी बुक कियाएमिकस के अनुसार, यह निर्माण तब तक जारी नहीं रह सकता था जब तक कि नागरिकों की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार अधिकारियों ने रिश्वत या मिलीभगत के चलते अपनी आँखें न मूंद ली हों।
चरण 3 (वर्ष 2020)दिल्ली हाई कोर्ट ने दिसंबर 2020 में एमसीडी को सख्त निर्देश दिए थे कि वह सुनिश्चित करे कि यहाँ कोई भी निर्माण मौजूदा बिल्डिंग बाय-लॉज के खिलाफ न हो।अदालती आदेश को रद्दी की टोकरी में डाल दिया गया और निर्माण चलता रहा, जिसके परिणामस्वरूप 30 मई को इमारत ढह गई

हादसे के बाद निलंबन सिर्फ दिखावा और कॉस्मेटिक एक्सरसाइज

एमिकस क्यूरी ने हादसे के बाद एमसीडी द्वारा की गई कार्रवाई को “महज दिखावा” (Mere Eyewash) और “कॉस्मेटिक एक्सरसाइज” करार दिया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि त्रासदी होने और छह लोगों की जान जाने के बाद बिल्डिंग विभाग के असिस्टेंट इंजीनियर (AE) सुदेश सिंह चौहान और जूनियर इंजीनियर (JE) अमन जैन को सस्पेंड कर दिया गया। लेकिन यह कार्रवाई बहुत देर से की गई। यह पूरी तरह से इन अधिकारियों की “कर्तव्यों के प्रति लापरवाही और ढीलापन” (Dereliction of duties and slackness) का नतीजा है, जिसके कारण इतना बड़ा हादसा हुआ।

एमिकस क्यूरी ने सुप्रीम कोर्ट से की ये सख्त मांगें

रिपोर्ट के अंत में एमिकस क्यूरी ने सुप्रीम कोर्ट से एमसीडी की जवाबदेही तय करने के लिए निम्नलिखित कड़े निर्देश जारी करने की मांग की है।

जवाबदेह हलफनामा: एमसीडी से एक विस्तृत हलफनामा मांगा जाए जिसमें वे स्पष्ट करें कि एक पूरी तरह से अवैध ढांचा इतने वर्षों तक किसकी शह पर खड़ा रहा।

स्ट्रक्चरल ऑडिट (Structural Audit): दिल्ली नगर निगम के अधिकार क्षेत्र में आने वाली सभी इमारतों का एक व्यापक स्ट्रक्चरल ऑडिट कराया जाए, ताकि भविष्य में साकेत जैसा कोई और हादसा न हो।

समयबद्ध कार्रवाई: दिल्ली में जितनी भी अवैध और खतरनाक इमारतें चिह्नित हैं, उन्हें एक निश्चित समय-सीमा (Time-bound manner) के भीतर सील करने और गिराने (Demolition) की कार्रवाई की जाए।

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