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CJI Surya Kant calls: आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता अब बनेंगी ‘कानूनी दूत’; घर-घर पहुंचेगा न्याय

CJI Surya Kant calls: भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत ने न्याय को समावेशी और सुलभ बनाने पर जोर देते हुए दिल्ली हाई कोर्ट में दिल्ली राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (DSLSA) की कई बड़ी योजनाओं का शुभारंभ किया है।

एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि समाज के वंचित वर्गों को बिना किसी कठिनाई के कानूनी उपचार मिलना सुनिश्चित करना समय की मांग है। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस पी.वी. संजय कुमार और दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय सहित न्यायपालिका के कई दिग्गज मौजूद थे। DSLSA ने न्याय को आम आदमी के दरवाजे तक पहुँचाने के लिए तीन मुख्य योजनाओं की शुरुआत की है।

प्रमुख पहल: ज़मीनी स्तर पर कानूनी सशक्तिकरण

  • आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता बनेंगे पैरा लीगल वॉलंटियर (PLVs): एक पायलट प्रोजेक्ट के तहत, अब आशा (ASHA) और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को कानूनी स्वयंसेवक के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा। इसका उद्देश्य है कि ये कार्यकर्ता घर-घर जाकर लोगों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करेंगे। वे उन लोगों की पहचान करेंगे जिन्हें कानूनी सहायता की आवश्यकता है और उन्हें सरकारी कल्याणकारी योजनाओं व मुफ्त कानूनी सहायता से जोड़ने में मदद करेंगे।
  • सरकारी अस्पतालों में ‘कानूनी सुविधा केंद्र’: DSLSA ने पीड़ितों को मुफ्त चिकित्सा उपचार के साथ-साथ कानूनी सहायता प्रदान करने की योजना शुरू की है। सरकारी अस्पतालों में बने ये केंद्र अपराध (विशेषकर महिलाओं और बच्चों के खिलाफ) के पीड़ितों को तत्काल कानूनी सलाह, काउंसलिंग और पुलिस के साथ समन्वय में मदद करेंगे।
  • पैरा लीगल वॉलंटियर्स के लिए ‘फील्ड डायरी – 2026’: PLVs के लिए एक व्यावहारिक मार्गदर्शिका (Handbook) लॉन्च की गई है। इसमें मुफ्त कानूनी सहायता की पात्रता, FIR दर्ज करने की प्रक्रिया, साइबर शिकायतों और मुआवजे के नियमों को बेहद सरल भाषा में समझाया गया है। यह डायरी महिलाओं, बच्चों और उपभोक्ताओं के अधिकारों पर केंद्रित है।

CJI का संदेश: “समावेशी न्याय ही लोकतंत्र की शक्ति”

अपने अध्यक्षीय भाषण में CJI सूर्यकांत ने कहा कि कानूनी जागरूकता को स्वास्थ्य और बाल देखभाल प्रणालियों के साथ जोड़ना एक क्रांतिकारी कदम है। उन्होंने कहा कि जब समुदाय के भीतर से ही लोग कानूनी दूत बनकर उभरेंगे, तब सही मायने में ‘न्याय सबके लिए’ का सपना पूरा होगा।

योजनाओं का प्रभाव

विशेषज्ञों का मानना है कि विधिक सेवाओं को सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणालियों (अस्पतालों) और सामुदायिक नेटवर्क (आंगनवाड़ी) से जोड़कर DSLSA ने एक अधिक ‘नागरिक-केंद्रित’ कानूनी प्रणाली की नींव रखी है। इससे अदालतों का बोझ कम होगा और लोगों को कानूनी पेचीदगियों में फंसने से पहले ही सही दिशा मिल सकेगी।

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