Saturday, August 15, 2026
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Bar Council: वकील निर्दोष है तो चेतावनी कैसी?….; BCI से एडवोकेट को दी गई ‘वॉर्निंग’ रद्द, झूठी शिकायत मामले पर यह रही सुप्रीम राय, पढ़ें

Bar Council: सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस विक्रम नाथ, संदीप मेहता और विजय बिश्नोई की पीठ ने एक वकील के खिलाफ की गई प्रतिकूल टिप्पणी को हटाते हुए कहा कि जब शिकायत ही खारिज हो गई है, तो चेतावनी देना न्यायोचित नहीं है।

मामले का सारांश (Quick Highlights)

विवरणतथ्य
संबंधित कानूनएडवोकेट एक्ट, 1961 की धारा 35 और 38।
मूल विवादपारिवारिक कलह के कारण वकील पर कदाचार का आरोप।
स्टेट बार काउंसिल का रुखशिकायत को झूठा मानकर खारिज किया और जुर्माना लगाया।
सुप्रीम कोर्ट का निर्णयBCI द्वारा दी गई ‘चेतावनी’ को अवैध मानते हुए हटा दिया।

मुरादाबाद जिले के एक वकील से जुड़ा मामला

हाल ही में एक महत्वपूर्ण व्यवस्था देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी वकील के खिलाफ पेशेवर कदाचार (Professional Misconduct) की शिकायत निराधार पाई जाती है, तो बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) उसे किसी भी तरह की चेतावनी जारी नहीं कर सकती। यह मामला उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले के एक वकील से जुड़ा है। उनके खिलाफ उनके ही बहनोई (जीजा) ने एडवोकेट एक्ट, 1961 की धारा 35 के तहत शिकायत दर्ज कराई थी।

पारिवारिक विवाद और झूठी शिकायत

  • शिकायतकर्ता और वकील के बीच वैवाहिक विवाद (वकील की बहन और शिकायतकर्ता के बीच) के कारण तनाव चल रहा था। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि वकील ने उन्हें जान से मारने की धमकी दी है।
  • स्टेट बार काउंसिल का फैसला: उत्तर प्रदेश स्टेट बार काउंसिल ने पाया कि यह शिकायत पूरी तरह से झूठी और दुर्भावनापूर्ण (Mala fide) थी, जिसका उद्देश्य केवल वकील को परेशान करना था। काउंसिल ने शिकायत खारिज कर दी और शिकायतकर्ता पर 25,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया।

BCI का विरोधाभासी कदम

  • शिकायतकर्ता ने इस फैसले को बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) में चुनौती दी। BCI ने भी माना कि शिकायत में कोई दम नहीं है, लेकिन उसने दो बदलाव किए।
  • जुर्माना हटाया: BCI ने शिकायतकर्ता पर लगा जुर्माना हटा दिया।
  • चेतावनी जारी की: शिकायत खारिज करने के बावजूद, BCI ने वकील को चेतावनी दे दी कि वे भविष्य में शिकायतकर्ता को डराने या धमकाने जैसे किसी भी अवांछित आचरण में शामिल न हों।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला: “अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन”

  • वकील ने इस प्रतिकूल टिप्पणी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की। कोर्ट ने BCI के रुख पर सवाल उठाया।
  • औचित्य का अभाव: “जब स्टेट बार काउंसिल और BCI दोनों की अनुशासन समितियों ने शिकायत में कोई योग्यता नहीं पाई, तो बिना किसी औचित्य के चेतावनी जारी करना गलत है।”
  • अधिकार क्षेत्र से बाहर: कोर्ट ने कहा कि BCI ने वकील के खिलाफ ऐसी टिप्पणी दर्ज करके अपनी शक्तियों का अतिक्रमण किया है, विशेषकर तब जब शिकायतकर्ता ने खुद स्वीकार कर लिया था कि शिकायत तुच्छ (Frivolous) थी।
  • आदेश: सुप्रीम कोर्ट ने BCI द्वारा दर्ज की गई उस चेतावनी और टिप्पणियों को पूरी तरह से रद्द (Quashed) कर दिया और उन्हें रिकॉर्ड से हटाने का आदेश दिया।

वकीलों के सम्मान की रक्षा

यह फैसला उन वकीलों के लिए एक बड़ी राहत है जिन्हें अक्सर व्यक्तिगत रंजिश के कारण झूठी शिकायतों का सामना करना पड़ता है। सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अनुशासनात्मक संस्थाएं (जैसे BCI) किसी वकील के करियर और प्रतिष्ठा पर तब तक कोई दाग नहीं लगा सकतीं जब तक कि दोष सिद्ध न हो जाए।

IN THE SUPREME COURT OF INDIA
VIKRAM NATH J., SANDEEP MEHTA J., VIJAY BISHNOI J.
CIVIL APPELLATE JURISDICTION
CIVIL APPEAL NO(S).12368 OF 2025
PREM PAL SINGH
VERSUS
DISCIPLINARY COMMITTEE OF THE
BAR COUNCIL OF INDIA & OTHERS

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