Police Recruitment: पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट का एक फैसला यह संदेश देता है कि जो लोग कानून की रक्षा करने वाली वर्दी पहनना चाहते हैं, उनका अपना दामन बेदाग होना चाहिए।
दरअसल, पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि पुलिस जैसे ‘अनुशासित बल’ (Disciplined Force) में भर्ती के लिए उम्मीदवारों के चरित्र और पृष्ठभूमि (Antecedents) के मानक बहुत ऊंचे होने चाहिए। आपराधिक छवि या गंभीर आरोपों का सामना कर रहे व्यक्ति को पुलिस बल में शामिल करना जनहित के खिलाफ हो सकता है।
हरियाणा पुलिस में कॉन्स्टेबल के पद पर चयन का मामला
हाईकोर्ट के जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की बेंच ने विजय कंसल नामक उम्मीदवार की याचिका खारिज कर दी। विजय को हरियाणा पुलिस में कॉन्स्टेबल के पद पर चुना गया था, लेकिन महिला की मर्यादा भंग करने (Outraging modesty) के आरोप में ट्रायल चलने के कारण उनकी नियुक्ति रद्द कर दी गई थी। कोर्ट ने उस नियम को सही ठहराया जिसके तहत आपराधिक मुकदमे का सामना कर रहे उम्मीदवार की नियुक्ति रद्द कर दी गई थी।
मुख्य नियम: क्या कहता है कानून? (The 2015 Rule)
- पंजाब पुलिस (हरियाणा संशोधन) नियम, 2015 के तहत एक सख्त प्रावधान है।
- पात्रता: यदि किसी उम्मीदवार पर नैतिक अधमता (Moral Turpitude) या ऐसे अपराध का आरोप (Charge) लगा है जिसमें 3 साल या उससे अधिक की सजा हो सकती है, तो उसे नियुक्ति के लिए योग्य नहीं माना जाएगा।
- कोर्ट का रुख: कोर्ट ने इस नियम को पूरी तरह उचित और तार्किक माना।
हाई कोर्ट की मुख्य टिप्पणियां (Key Observations)
- अदालत ने नियुक्ति से पहले और नियुक्ति के बाद के अंतर को स्पष्ट किया।
- नियोक्ता का अधिकार (Employer’s Right): किसी को भी जबरन नियुक्त करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता, खासकर तब जब उसने खुद अपने खिलाफ आपराधिक मामले का खुलासा किया हो। नियोक्ता को यह तय करने का पूरा हक है कि उम्मीदवार उस पद के लिए ‘उपयुक्त’ (Suitable) है या नहीं।
- अनुशासित बल की जरूरत: पुलिस की नौकरी आम नौकरियों जैसी नहीं है। यहाँ जनता की सुरक्षा और कानून व्यवस्था का सवाल होता है, इसलिए उम्मीदवारों की पृष्ठभूमि की जांच और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
- वेस्टेड राइट (Vested Right): कोर्ट ने कहा कि एक बार नौकरी मिल जाने के बाद उसे हटाने के नियम अलग होते हैं, लेकिन नियुक्ति के चरण पर उपयुक्तता जांचना एक अलग प्रक्रिया है। इन दोनों स्थितियों को एक समान नहीं माना जा सकता।
मामला क्या था? (The Case of Vijay Kansal)
- चयन: याचिकाकर्ता विजय कंसल का चयन 17 अक्टूबर, 2024 को कॉन्स्टेबल पद के लिए हुआ था।
- रद्द होना: नवंबर 2024 में उसकी उम्मीदवारी रद्द कर दी गई क्योंकि उस पर IPC की विभिन्न धाराओं के तहत महिला के साथ दुर्व्यवहार का मामला चल रहा था।
- दलील: विजय के वकील ने तर्क दिया था कि नियम को बहुत कठोर (Straight-jacket formula) नहीं होना चाहिए और नियोक्ता को अपने विवेक का इस्तेमाल करना चाहिए।
कोर्ट का फैसला: याचिका खारिज
अदालत ने सरकार (Additional Advocate General) की इस दलील को स्वीकार किया कि नियम स्पष्ट दिशा-निर्देश देता है और यह किसी के अधिकारों का हनन नहीं करता। कोर्ट ने माना कि चूंकि आरोप तय (Charges framed) हो चुके थे और ट्रायल चल रहा था, इसलिए नियुक्ति प्राधिकारी ने उसे ‘अनुपयुक्त’ घोषित कर सही कदम उठाया।

