Wednesday, September 30, 2026
HomeSupreme CourtRajasthani Language: राजस्थानी भाषा पर कोर्ट ने क्यूं कहा…मातृभाषा में शिक्षा...

Rajasthani Language: राजस्थानी भाषा पर कोर्ट ने क्यूं कहा…मातृभाषा में शिक्षा केवल कागज पर नहीं, हकीकत में होनी चाहिए, पढ़िए केस

Rajasthani Language: सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए राजस्थान सरकार को आदेश दिया है कि वह सभी स्कूलों में राजस्थानी भाषा को एक विषय (Subject) के रूप में शामिल करने के लिए समयबद्ध और सकारात्मक कदम उठाए।

हाईकोर्ट ने राजस्थानी भाषा में शिक्षा देने की मांग को खारिज किया था

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने स्पष्ट किया कि मातृभाषा में शिक्षा प्राप्त करना केवल एक नीति नहीं, बल्कि अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का एक हिस्सा है। यह आदेश राजस्थान हाई कोर्ट के नवंबर 2024 के उस फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर आया है, जिसने राजस्थानी भाषा में शिक्षा देने की मांग को खारिज कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस “शून्य” (Vacuum) को भरने के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) का हवाला

  • सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का उल्लेख किया।
  • प्राथमिकता: शिक्षा नीति स्पष्ट रूप से कहती है कि स्कूली शिक्षा के प्रारंभिक चरणों (Foundational and Preparatory stages) में शिक्षा का माध्यम मातृभाषा, स्थानीय या क्षेत्रीय भाषा होनी चाहिए।
  • संविधान का आधार: कोर्ट ने तर्क दिया कि अपनी भाषा में जानकारी प्राप्त करने का अधिकार मौलिक अधिकार है, क्योंकि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता तभी सार्थक है जब जानकारी समझने योग्य भाषा में मिले।

सरकार के “संकीर्ण दृष्टिकोण” पर फटकार

  • अदालत ने राजस्थान सरकार के उस तर्क की आलोचना की जिसमें कहा गया था कि केवल आठवीं अनुसूची (8th Schedule) में शामिल भाषाओं को ही स्कूलों में पढ़ाया जा रहा है।
  • विरोधाभास: कोर्ट ने नोट किया कि राजस्थानी भाषा राज्य के विश्वविद्यालयों में पहले से ही पढ़ाई जा रही है। ऐसे में यह कहना कि स्कूली स्तर पर इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता, “तर्कहीन और संकीर्ण” (Pedantic) दृष्टिकोण है।
  • निष्क्रियता का जोखिम: कोर्ट ने चेतावनी दी कि संवैधानिक अधिकारों को कार्यपालिका की निष्क्रियता के कारण “सुप्त” (Dormant) रहने नहीं दिया जा सकता।

कोर्ट के मुख्य दिशा-निर्देश

  • सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार को कई निर्देश दिए हैं।
  • व्यापक नीति: NEP 2020 की पृष्ठभूमि में मातृभाषा आधारित शिक्षा के लिए एक ठोस नीति तैयार करें।
  • दर्जा प्रदान करना: राजस्थानी भाषा को शैक्षिक उद्देश्यों के लिए एक स्थानीय/क्षेत्रीय भाषा के रूप में मान्यता दें और उचित दर्जा दें।
  • चरणबद्ध कार्यान्वयन: सरकारी और निजी दोनों स्कूलों में राजस्थानी को एक विषय के रूप में चरणबद्ध तरीके से पेश किया जाए।
  • शिक्षा का माध्यम: प्रारंभिक स्तर पर इसे शिक्षा के माध्यम (Medium of Instruction) के रूप में अपनाने की सुविधा प्रदान की जाए।

मामले का सारांश (Quick Highlights)

विवरणतथ्य/आदेश
मुख्य मुद्दास्कूलों में राजस्थानी भाषा को शामिल करना।
कानूनी आधारअनुच्छेद 19(1)(a) और NEP 2020।
कोर्ट का रुखराज्य की निरंतर निष्क्रियता मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।
अगला कदम30 सितंबर, 2026 को अनुपालन (Compliance) रिपोर्ट पेश करनी होगी।

भाषाई पहचान की जीत

यह फैसला राजस्थान की सांस्कृतिक और भाषाई पहचान के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि “न्याय का अर्थ केवल अदालतों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि बच्चा उस भाषा में सीखे जिसे वह सबसे बेहतर समझता है।” अब गेंद राज्य सरकार के पाले में है कि वह इसे हकीकत में कैसे बदलती है।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Patna
clear sky
25.2 ° C
25.2 °
25.2 °
91 %
2.5kmh
0 %
Wed
32 °
Thu
32 °
Fri
33 °
Sat
33 °
Sun
33 °

Recent Comments