HomeLatest NewsIncome Disclosure: पति ने खुद को मजदूर बताकर छिपायी असली कमाई…हाईकोर्ट ने...

Income Disclosure: पति ने खुद को मजदूर बताकर छिपायी असली कमाई…हाईकोर्ट ने मांग लिया इनकम टैक्स रिटर्न की कॉपी, पढ़ें रोचक केस

Income Disclosure: इलाहाबाद हाई कोर्ट (लखनऊ बेंच) ने घरेलू हिंसा और भरण-पोषण (Maintenance) के मामलों में एक महत्वपूर्ण व्यवस्था दी है।

हाईकोर्ट के जस्टिस बृज राज सिंह की बेंच ने पत्नी और उसके नाबालिग बेटे द्वारा BNSS की धारा 528 के तहत दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। कोर्ट ने मजिस्ट्रेट को निर्देश दिया कि वे पत्नी की याचिका पर 6 सप्ताह के भीतर नए सिरे से विचार करें। कोर्ट ने मजिस्ट्रेट के उस आदेश को रद्द कर दिया है जिसमें पति के आय (Income) और संपत्ति के विवरण मांगने वाली पत्नी की याचिका को खारिज कर दिया गया था।

मामला क्या था? (The Disguised Income)

  • आरोप: लखनऊ की एक महिला ने अपने पति और ससुराल वालों पर दहेज उत्पीड़न, मारपीट और वित्तीय प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत मामला दर्ज कराया था।
  • झूठा दावा: पति ने मजिस्ट्रेट कोर्ट में खुद को एक ‘मजदूर’ (Labourer) बताया था ताकि उसे कम भरण-पोषण देना पड़े।
  • पत्नी की मांग: पत्नी ने BNSS की धारा 91 के तहत मांग की थी कि पति को उसके इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) और वित्तीय दस्तावेज पेश करने का आदेश दिया जाए। मजिस्ट्रेट ने 19 जनवरी को इस मांग को खारिज कर दिया था।

हाई कोर्ट का एक्शन: खुला सच

  • हाई कोर्ट ने सीधे आयकर विभाग (Income Tax Department) से पिछले दो वर्षों का रिकॉर्ड तलब किया, जिससे चौंकाने वाला सच सामने आया।
  • असली पेशा: पति असल में एक आर्किटेक्ट (Architect) है।
  • असली कमाई: रिकॉर्ड के अनुसार, उसकी वार्षिक आय ₹4.85 लाख से ₹5.07 लाख के बीच है।
  • कोर्ट की फटकार: कोर्ट ने कहा कि भरण-पोषण तय करने के लिए आय का खुलासा सबसे महत्वपूर्ण है और मजिस्ट्रेट पति को विवरण देने के लिए मजबूर कर सकते हैं।

कानूनी आधार: रजनीश बनाम नेहा केस (2021)

  • हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक ‘रजनीश बनाम नेहा’ फैसले का हवाला दिया।
  • इस फैसले के अनुसार, वैवाहिक विवादों में पति और पत्नी दोनों को अपनी संपत्ति और देनदारियों (Assets and Liabilities) का हलफनामा देना अनिवार्य है।
  • कोर्ट ने पति को आदेश दिया कि वह अपने इनकम टैक्स रिटर्न की एक कॉपी अपनी पत्नी को भी उपलब्ध कराए।

कोर्ट के मुख्य निर्देश

  • आदेश रद्द: मजिस्ट्रेट का 19 जनवरी का पुराना आदेश ‘क्वाश’ (Quash) कर दिया गया है।
  • ताजा विचार: मजिस्ट्रेट को अब पति की वास्तविक आय (जो हाई कोर्ट ने पकड़ी है) को ध्यान में रखते हुए पत्नी की अर्जी पर दोबारा फैसला लेना होगा।
  • समय सीमा: यह पूरी प्रक्रिया 6 हफ्तों में पूरी होनी चाहिए।

निष्कर्ष: पारदर्शिता ही न्याय का आधार

यह फैसला उन पतियों के लिए एक कड़ा संदेश है जो कोर्ट में अपनी आय छिपाकर अपनी पत्नी और बच्चों को उनके कानूनी हक से वंचित करने की कोशिश करते हैं। अब डिजिटल रिकॉर्ड और आयकर विभाग की मदद से ऐसी ‘चालाकी’ पकड़ना अदालतों के लिए आसान हो गया है।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Patna
mist
26 ° C
26 °
26 °
83 %
3.1kmh
40 %
Tue
26 °
Wed
41 °
Thu
42 °
Fri
43 °
Sat
42 °

Recent Comments