Sunday, August 16, 2026
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IBC Amendment 2025: डूबे कर्ज की वसूली होगी तेज; दिवाला कानून संशोधन बिल की सारी जानकारी यहां पर हैं, पूरा पढ़ें

IBC Amendment 2025: लोकसभा ने 30 मार्च, 2026 को दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (Insolvency and Bankruptcy Code – IBC) संशोधन विधेयक, 2025 को पारित कर दिया है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सदन में बताया कि 2016 में लागू हुए IBC के अब तक के अनुभवों और कोर्ट के फैसलों को ध्यान में रखते हुए यह नया बिल लाया गया है। इसका मुख्य लक्ष्य स्ट्रेस्ड एसेट्स (Stressed Assets) की वैल्यू को अधिकतम करना और बैंकिंग सेक्टर की सेहत सुधारना है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए इस बिल में कुल 12 प्रमुख संशोधन प्रस्तावित हैं, जिनका उद्देश्य मौजूदा ढांचे को मजबूत करना और वैश्विक स्तर की सर्वोत्तम प्रथाओं (Best Practices) को अपनाना है।

NPA रिकवरी में IBC का कमाल

  • वित्त मंत्री ने सदन को आंकड़ों के जरिए IBC की सफलता बताई।
  • कुल वसूली: बैंकों ने विभिन्न चैनलों के माध्यम से कुल ₹1,04,099 करोड़ की वसूली की।
  • IBC की हिस्सेदारी: कुल वसूली में अकेले IBC का योगदान ₹54,528 करोड़ रहा, जो कि कुल NPA रिकवरी का 52.3% है।

छोटे व्यवसायों के लिए नया ‘क्रेडिटर-इनीशिएटेड’ फ्रेमवर्क

  • पुराने ‘फास्ट-ट्रैक’ प्रोसेस (जो बहुत सफल नहीं रहा) की जगह अब एक नया मॉडल लाया गया है।
  • कम समय सीमा: छोटी कंपनियों के लिए समाधान की समय सीमा को घटाया गया है।
  • Debtor-in-Possession: अब प्रबंधन मौजूदा बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स या पार्टनर्स के पास ही रहेगा (सुरक्षा उपायों के साथ), जबकि पहले नियंत्रण पूरी तरह लेनदारों (Creditors) के पास चला जाता था।
  • आउट-ऑफ-कोर्ट सेटलमेंट: कोर्ट के बाहर भी समाधान शुरू करने के विकल्प दिए गए हैं।

‘ग्रुप’ और ‘क्रॉस-बॉर्डर’ इन्सॉल्वेंसी

  • निवेशकों का भरोसा बढ़ाने के लिए बिल में दो बड़े प्रावधान जोड़े गए हैं।
  • Group Insolvency: यदि एक ही ग्रुप की कई कंपनियां संकट में हैं, तो उनके लिए एक एकीकृत ढांचा।
  • Cross-Border Insolvency: विदेशी संपत्तियों और अंतरराष्ट्रीय मामलों से निपटने के लिए एक सक्षम फ्रेमवर्क।

पारदर्शिता के लिए 12वां संशोधन

  • सेलेक्ट कमेटी ने 11 सिफारिशें की थीं, जिन्हें सरकार ने मान लिया। इसके अलावा सरकार ने अपनी तरफ से एक 12वां संशोधन भी जोड़ा है।
  • कारण बताना अनिवार्य: अब ‘कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स’ (CoC) को अपने हर फैसले के पीछे के कारणों को रिकॉर्ड (Record Reasons) करना होगा। इससे पूरी समाधान प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी।

निष्कर्ष: बैंकिंग सेक्टर के लिए ‘संजीवनी’

वित्त मंत्री के अनुसार, IBC ने संकटग्रस्त संस्थानों को जीवित रखकर अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इन नए संशोधनों से न केवल कर्ज की वसूली तेज होगी, बल्कि व्यापार करने की सुगमता (Ease of Doing Business) में भी सुधार होगा।

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