Sunday, August 16, 2026
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Nurses’ Rights: नर्सिंग पेशेवरों को दिल्ली HC का यह निर्देश जरूर ध्यान देना चाहिए…पूरा केस यह है

Nurses’ Rights: दिल्ली हाई कोर्ट ने इंडियन प्रोफेशनल नर्सेज एसोसिएशन (IPNA) की एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए नर्सिंग पेशेवरों के लिए एक बड़ा निर्देश दिया है।

हाईकोर्ट चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की बेंच ने IPNA की याचिका को डिस्पोज (निपटारा) करते हुए स्पष्ट किया कि नर्सिंग पेशेवरों की चिंताओं को एक औपचारिक प्रक्रिया के माध्यम से हल किया जाना चाहिए। कोर्ट ने इंडियन नर्सिंग काउंसिल (INC) को निर्देशित किया है कि वह नर्सिंग स्टाफ की शिकायतों के निवारण के लिए एक उचित तंत्र (Grievance Redressal Mechanism) स्थापित करने की संभावना पर विचार करे।

मामला क्या था? (The Grievances)

  • शिकायत निवारण का अभाव: याचिका में मुख्य मुद्दा यह था कि इंडियन नर्सिंग काउंसिल के पास नर्सिंग पेशेवरों की शिकायतों को सुनने और सुलझाने के लिए कोई उचित या समर्पित मैकेनिज्म नहीं है।
  • सेवा बॉन्ड (Service Bonds) का उल्लंघन: याचिका में यह भी आरोप लगाया गया था कि 2011 में जारी सर्कुलर के बावजूद, जिसमें छात्रों के लिए ‘सर्विस बॉन्ड’ पर रोक लगाई गई थी, कई नर्सिंग संस्थान अभी भी इस गलत प्रथा को जारी रखे हुए हैं।

कोर्ट के मुख्य निर्देश (The Final Order)

  • हाई कोर्ट ने मामले को सुलझाने के लिए एक समय-सीमा (Timeline) तय की है।
  • विस्तृत अभ्यावेदन (Detailed Representation): नर्सिंग एसोसिएशन को 2 सप्ताह के भीतर INC के सचिव को एक विस्तृत रिपोर्ट देनी होगी, जिसमें सभी संबंधित सामग्री और सबूत शामिल होंगे।
  • समयबद्ध फैसला: काउंसिल के सक्षम अधिकारी को इस अभ्यावेदन पर विचार करना होगा और 2 महीने के भीतर उचित निर्णय लेना होगा।
  • शिकायत तंत्र: कोर्ट ने विशेष रूप से कहा है कि INC को यह जांचना चाहिए कि क्या शिकायतों को प्रभावी ढंग से निपटाने के लिए एक अलग ‘शिकायत निवारण तंत्र’ की आवश्यकता है।

काउंसिल का पक्ष

सुनवाई के दौरान, काउंसिल के वकील ने तर्क दिया कि वे अपने सर्कुलर का पालन सुनिश्चित करने के लिए कदम उठा रहे हैं और संस्थानों से अपेक्षा की जाती है कि वे नियमों का पालन करें। हालांकि, कोर्ट ने माना कि केवल सर्कुलर जारी करना काफी नहीं है, बल्कि शिकायतों को सुनने के लिए एक व्यवस्थित प्लेटफॉर्म होना चाहिए।

निष्कर्ष: नर्सिंग पेशे में पारदर्शिता

यह फैसला भारत में लाखों नर्सिंग पेशेवरों के लिए महत्वपूर्ण है। एक समर्पित शिकायत तंत्र (Grievance Mechanism) बनने से न केवल नर्सिंग स्टाफ के शोषण (जैसे कि अनुचित सर्विस बॉन्ड) को रोकने में मदद मिलेगी, बल्कि उनके कार्यस्थल की समस्याओं को भी सीधे काउंसिल के स्तर पर सुलझाया जा सकेगा।

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