Justice for Homemakers: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने घरेलू कामकाज (Unpaid Domestic Work) के आर्थिक मूल्य को रेखांकित करते हुए एक अत्यंत महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।
हाईकोर्ट के जस्टिस हिरदेश ने मुरैना के मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (MACT) के उस आदेश को चुनौती देने वाली अपील पर सुनवाई की, जिसने एक दुर्घटना में मृत महिला की आय को बेहद कम आंका था। कोर्ट ने मुआवजे की राशि को ₹4.28 लाख से बढ़ाकर ₹5.44 लाख कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि एक होममेकर (गृहिणी) के योगदान को अकुशल मजदूर (Unskilled Labourer) के बराबर नहीं माना जा सकता, क्योंकि वे बिना किसी छुट्टी या निश्चित कार्य घंटों के परिवार के लिए बहुआयामी सेवाएं प्रदान करती हैं।
ट्रिब्यूनल की गलती: कागजों की कमी, तो कम आय?
- ट्रिब्यूनल का फैसला: फरवरी 2019 में ट्रिब्यूनल ने मृत महिला की आय केवल ₹4,500 प्रति माह मानी थी, क्योंकि परिवार उसकी आय (खेती और दूध बिक्री) का कोई दस्तावेजी सबूत नहीं दे पाया था।
- हाई कोर्ट का रुख: कोर्ट ने इस दृष्टिकोण को कानूनी रूप से गलत बताया। कोर्ट ने कहा कि दस्तावेजी सबूत न होने पर भी एक गृहिणी की सेवाओं का मूल्य वास्तविकता के आधार पर तय किया जाना चाहिए, न कि उसे न्यूनतम स्तर पर छोड़ देना चाहिए।
Compensation Recalculation by High Court
Head of Compensation Amount Awarded
Monthly Income (Semi-skilled) ₹7,982
Annual Income (+10% Future Prospects) ₹1,05,362
Loss of Dependency (after 50% deduction) ₹4,74,129
Consortium, Estate & Funeral Expenses ₹70,000
Total Enhanced Compensation ₹5,44,129
अर्ध-कुशल’ (Semi-skilled) श्रेणी में रखा
- हाई कोर्ट ने मुआवजे की गणना के लिए नए मानक तय किए।
- न्यूनतम वेतन अधिनियम: कोर्ट ने माना कि एक गृहिणी की आय कम से कम अर्ध-कुशल श्रमिक (Semi-skilled worker) के स्तर पर होनी चाहिए, जो उस समय ₹7,982 प्रति माह थी।
- बहुआयामी भूमिका: कोर्ट ने कहा कि गृहिणियां अक्सर घर के काम के साथ-साथ खेती और पशुपालन जैसे आय-जनक कार्यों में भी हाथ बटाती हैं, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट के सिद्धांतों का पालन
- मुआवजे की गणना करते समय कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसलों का हवाला दिया।
- सरला वर्मा केस: उम्र के आधार पर ‘9’ का मल्टीप्लायर लागू किया गया।
- प्रणय सेठी केस: भविष्य की संभावनाओं (Future Prospects) के लिए आय में 10% की वृद्धि की गई।
- पारंपरिक प्रमुख (Conventional Heads): पति/परिवार को होने वाले नुकसान (Consortium) के लिए ₹40,000 और अंतिम संस्कार व संपदा के नुकसान के लिए ₹30,000 दिए गए।
कोर्ट की बड़ी टिप्पणी: बिना छुट्टी का काम
- अदालत ने गृहिणियों के अदृश्य श्रम (Invisible Labour) को सम्मान देते हुए कहा।
- “एक गृहिणी परिवार के लिए अनगिनत सेवाएं प्रदान करती है, बिना किसी निश्चित समय और बिना किसी छुट्टी के पूरे घर का प्रबंधन करती है। मुआवजे का निर्धारण करते समय इस श्रम के आर्थिक मूल्य को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।”
निष्कर्ष: कानूनी मान्यता और सम्मान
यह फैसला उन लाखों महिलाओं के लिए एक बड़ी जीत है जिनके घर के काम को अक्सर ‘मुफ्त’ या ‘बिना मूल्य’ का मान लिया जाता है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि भले ही कोई औपचारिक वेतन पर्ची (Salary Slip) न हो, लेकिन एक गृहिणी का श्रम कानूनी और आर्थिक रूप से अत्यंत मूल्यवान है।

