Tuesday, August 25, 2026
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Maintenance Rights: कमाने की क्षमता और वास्तविक कमाई में अंतर…पत्नी जब तक नहीं कमाती है, तब तक पति गुजारा भत्ता दें

Maintenance Rights: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने सौरभ मालवीय बनाम अपूर्वा मालवीय मामले में एक महत्वपूर्ण कानूनी मिसाल कायम की है।

हाईकोर्ट के जस्टिस गजेंद्र सिंह की बेंच ने पति की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें उसने फैमिली कोर्ट द्वारा तय किए गए ₹40,000 के गुजारा भत्ते को चुनौती दी थी। अदालत ने स्पष्ट किया है कि केवल “कमाने की क्षमता” (Capacity to Earn) होने का मतलब यह नहीं है कि पत्नी को गुजारा भत्ता (Maintenance) नहीं मिलना चाहिए। जब तक पत्नी वास्तव में कमाना शुरू नहीं करती, पति उसे वित्तीय सहायता देने के लिए बाध्य है।

“कमाना” बनाम “कमाने के योग्य होना” (Potential vs Actual Income)

  • पति का मुख्य तर्क यह था कि उसकी पत्नी उच्च शिक्षित है और उसके पास इंजीनियरिंग (Engineering) की डिग्री है, इसलिए वह खुद कमा सकती है।
  • बड़ा अंतर: हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा, “कमाने की क्षमता” (May Earn) और “वास्तविक कमाई” (Is Earning) के बीच एक बुनियादी अंतर है।
  • कोई सबूत नहीं: भले ही पत्नी शिक्षित है, लेकिन इस बात का कोई सबूत पेश नहीं किया गया कि वह वर्तमान में किसी नौकरी में है या उसकी कोई स्वतंत्र आय है।
  • नौकरी छोड़ना: यदि किसी महिला ने वैवाहिक जिम्मेदारियों के कारण अपनी नौकरी छोड़ दी है, तो वह तब तक गुजारा भत्ते की हकदार है जब तक वह दोबारा पर्याप्त आय का स्रोत नहीं ढूंढ लेती।

पति की आय और जिम्मेदारी

  • आय का खुलासा: पत्नी ने पति की अच्छी आर्थिक स्थिति और कई आय स्रोतों का दावा किया था। पति ने इन आंकड़ों को तो नकारा, लेकिन अपनी वास्तविक आय का कोई ठोस सबूत कोर्ट में पेश नहीं किया।
  • आनुपातिक राशि: कोर्ट ने माना कि ₹40,000 की राशि पति की आर्थिक स्थिति और जीवन स्तर के हिसाब से बिल्कुल उचित (Proportionate) है।

केस की पृष्ठभूमि (Case Background)

  • शादी: मई 2018 (स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत)।
  • अलगाव: अगस्त 2022 से दोनों अलग रह रहे हैं।
  • कानूनी धारा: पत्नी ने Section 125 CrPC (अब BNSS के तहत) के तहत ₹50,000 की मांग की थी।
  • फैमिली कोर्ट का फैसला: मंदसौर की फैमिली कोर्ट ने ₹40,000 प्रति माह देने का आदेश दिया था।

फैसले के मुख्य बिंदु (Key Highlights)

कानूनी बिंदुहाई कोर्ट का निष्कर्ष
शिक्षित पत्नीडिग्री होना गुजारा भत्ता न देने का आधार नहीं है, यदि वह बेरोजगार है।
कमाने की क्षमताकेवल ‘योग्यता’ होने से गुजारा भत्ते का अधिकार खत्म नहीं होता।
पति का कर्तव्यपति को अपनी वास्तविक आय का प्रमाण देना चाहिए, अन्यथा पत्नी के दावों को वजन दिया जाएगा।
भविष्य की छूटयदि भविष्य में पत्नी की आय शुरू होती है, तो पति आदेश में संशोधन (Modification) के लिए आवेदन कर सकता है।

महिलाओं की वित्तीय सुरक्षा

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का यह फैसला उन महिलाओं के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच है जिन्हें अक्सर उनकी “योग्यता” का हवाला देकर वित्तीय मदद से वंचित करने की कोशिश की जाती है। अदालत ने साफ कर दिया है कि योग्यता पेट नहीं भरती; जब तक हाथ में वेतन (Salary) नहीं आता, पति की जिम्मेदारी बनी रहती है।

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