Thursday, October 29, 2026
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Principles of Natural Justice: जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए होगी सुनवाई…कैदी के RTI हक पर CIC का यह रहा अहम फैसला

Principles of Natural Justice: केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) ने “जीवन और स्वतंत्रता” (Life and Liberty) से जुड़े एक अत्यंत संवेदनशील मामले में हस्तक्षेप करते हुए एक जेल में बंद RTI आवेदक के सुनवाई के अधिकार को सुरक्षित किया है।

मुख्य सूचना आयुक्त (CIC) राज कुमार गोयल ने हिंदी में जारी अपने आदेश में जेल प्रशासन और सुप्रीम कोर्ट लीगल सर्विसेज कमेटी (SCLSC) को विशेष निर्देश जारी किए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि न्याय के सिद्धांतों (Principles of Natural Justice) का पालन करने के लिए जेल में बंद व्यक्ति की बात सुनना अनिवार्य है।

मामला क्या था? (The Issue)

  • आवेदक की मांग: जेल में बंद एक व्यक्ति ने RTI के माध्यम से अपनी याचिका पर हुई कार्रवाई की ‘स्टेटस रिपोर्ट’ मांगी थी। उसने इसे अपने जीवन और स्वतंत्रता से जुड़ा मामला बताया था।
  • विफलता: निर्धारित समय के भीतर न तो कोई जवाब मिला और न ही उसकी प्रथम अपील (First Appeal) पर कोई फैसला हुआ।

फैसले के मुख्य बिंदु (Key Highlights)

बिंदुविवरण
कैटेगरी“जीवन और स्वतंत्रता” (Life & Liberty) के तहत प्राथमिकता।
तकनीकी समाधानजेल से ही डिजिटल माध्यम (VC) द्वारा सुनवाई सुनिश्चित करना।
प्राकृतिक न्यायबिना अपीलकर्ता को सुने कोई भी अंतिम आदेश पारित नहीं किया जाएगा।
जवाबदेहीसुप्रीम कोर्ट की लीगल बॉडी को लिखित स्पष्टीकरण देने का निर्देश।

CIC के कड़े निर्देश: न्याय का सिद्धांत सर्वोपरि

  • आयोग ने माना कि किसी भी नतीजे पर पहुँचने से पहले अपीलकर्ता का पक्ष सुनना जरूरी है। इसके लिए निम्नलिखित निर्देश दिए गए हैं।
  • वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC): रजिस्ट्री को निर्देश दिया गया है कि वह संबंधित जेल प्रशासन के साथ समन्वय करें ताकि अगली सुनवाई में अपीलकर्ता जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़ सके।
  • SCLSC को आदेश: सुप्रीम कोर्ट लीगल सर्विसेज कमेटी को 7 दिनों के भीतर अपना लिखित जवाब दाखिल करने और उसकी एक कॉपी सुनवाई से पहले अपीलकर्ता (कैदी) को भेजने का आदेश दिया गया है।
  • समय सीमा: मामले को अगले 2 सप्ताह के भीतर फिर से सूचीबद्ध (Re-list) करने का निर्देश दिया गया है।

विभाग की दलील और आयोग का रुख

  • विभाग का पक्ष: सुनवाई के दौरान संबंधित अथॉरिटी ने दावा किया कि उन्हें कोई RTI आवेदन या प्रथम अपील प्राप्त ही नहीं हुई, हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि आवेदक की कानूनी सहायता (Legal Aid) की एक फाइल प्रोसेस की गई थी।
  • आयोग का फैसला: रिकॉर्ड पर मौजूद तथ्यों को देखते हुए, CIC ने सुनवाई टाल दी और दोहराया कि अपीलकर्ता को अपनी बात रखने का अवसर देना “अनिवार्य” है।

सलाखों के पीछे भी सुरक्षित है RTI का हक

यह आदेश एक महत्वपूर्ण मिसाल पेश करता है कि जेल में बंद होने से किसी नागरिक के सूचना प्राप्त करने या सुनवाई के संवैधानिक अधिकार खत्म नहीं हो जाते। CIC ने तकनीकी (VC) और कानूनी (Natural Justice) दोनों मोर्चों पर यह सुनिश्चित किया है कि जेल की दीवारें न्याय की प्रक्रिया में बाधा न बनें।

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