Thursday, September 17, 2026
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Special Courts for Terror & Drugs: NIA और UAPA मामलों के लिए बनेंगे विशेष कोर्ट…एक्सक्लूसिव कोर्ट्स की जरूरत क्यों?, पढ़िए

Special Courts for Terror & Drugs: सुप्रीम कोर्ट ने भारत में आतंकवाद और नशीली दवाओं (Drugs) से संबंधित मामलों के त्वरित निपटारे के लिए एक बड़ा कदम उठाया है।

सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लेते हुए स्पष्ट किया कि आतंकवाद और ड्रग्स जैसे गंभीर मामलों के ट्रायल वर्षों तक नहीं लटके रहने चाहिए। कोर्ट ने ‘त्वरित न्याय’ को आरोपी और पीड़ित दोनों के अधिकारों के लिए जरूरी बताया। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से UAPA और NDPS एक्ट के तहत लंबित मामलों का पूरा विवरण मांगा है, ताकि इनके लिए ‘एक्सक्लूसिव स्पेशल कोर्ट्स’ (Exclusive Special Courts) स्थापित किए जा सकें।

एक्सक्लूसिव कोर्ट्स की जरूरत क्यों?

  • अदालत ने पाया कि वर्तमान में NIA (National Investigation Agency) के मामलों की सुनवाई करने वाले जज अन्य सामान्य मामलों (Non-NIA cases) में भी व्यस्त रहते हैं।
  • अत्यधिक बोझ: दिल्ली, महाराष्ट्र, गुजरात और जम्मू-कश्मीर जैसे 17 राज्यों में पेंडेंसी (लंबित मामले) बहुत ज्यादा है।
  • कोर्ट का सख्त निर्देश: “NIA अदालतों को विशेष रूप से केवल UAPA या संबंधित मुकदमों की सुनवाई करनी चाहिए। इन पीठासीन अधिकारियों (Presiding Officers) को कोई अन्य काम नहीं सौंपा जाना चाहिए।”

वित्तीय ढांचा: ₹1 करोड़ का अनुदान

  • सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से इन विशेष अदालतों की स्थापना और संचालन के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करने को कहा है।
  • बुनियादी ढांचा (Infrastructure): अदालतों के नवीनीकरण, आईटी उपकरण (कंप्यूटर, ब्रॉडबैंड) और फर्नीचर के लिए ₹1 करोड़ का एकमुश्त (One-time) फंड।
  • वार्षिक खर्च: जजों और कर्मचारियों के वेतन व कार्यालय खर्च के लिए ₹1 करोड़ का वार्षिक ग्रांट।
  • मॉडल स्टाफ: प्रत्येक कोर्ट में एक विशेष जज, स्टेनोग्राफर और वाहन के साथ समर्पित ड्राइवर की व्यवस्था होगी।

17 राज्यों पर विशेष ध्यान

  • कोर्ट ने उन 17 राज्यों की पहचान की है जहां NIA के 10 से अधिक ट्रायल लंबित हैं। इन राज्यों ने पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर कम से कम एक विशेष अदालत स्थापित करने पर सहमति जताई है।
  • राज्यों की सूची: असम, बिहार, छत्तीसगढ़, दिल्ली, गुजरात, जम्मू-कश्मीर, झारखंड, कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र, मणिपुर, पंजाब, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, राजस्थान और तेलंगाना।

हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों को निर्देश

  • सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित राज्यों के हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस को निर्देश दिया है कि वे इन विशेष अदालतों के लिए ऐसे जजों की नियुक्ति की प्रक्रिया तेज करें जिन्हें आपराधिक मुकदमों (Criminal Trials) के संचालन का “उचित और पर्याप्त अनुभव” हो।

मुख्य बिंदु (Key Highlights)

श्रेणीविवरण
अधिनियम (Acts)UAPA (आतंकवाद विरोधी) और NDPS (ड्रग्स संबंधी)।
एजेंसियांNIA (केंद्रीय), NCB (नारकोटिक्स) और राज्यों की पुलिस एजेंसियां।
फंडिंगकेंद्र सरकार द्वारा ₹1 करोड़ प्रति कोर्ट (इंफ्रास्ट्रक्चर और संचालन हेतु)।
अगली सुनवाई8 मई, 2026 (राज्यों को तब तक डेटा देना होगा)।

न्याय में देरी, न्याय का हनन

सुप्रीम कोर्ट का यह हस्तक्षेप उस समस्या का समाधान है जहाँ गंभीर सुरक्षा और ड्रग्स से जुड़े मामलों के आरोपी और गवाह दशकों तक अदालत के चक्कर काटते रहते हैं। “स्पेशल कोर्ट” होने से न केवल दोषियों को जल्द सजा मिलेगी, बल्कि बेगुनाह लोगों को भी अपनी बेगुनाही साबित करने का त्वरित मौका मिलेगा।

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