Thursday, September 17, 2026
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Digital Arrest Menace: पढ़े-लिखे लोग भी बन रहे शिकार, यह हैरान करने वाला है…CJI ने सुनाया बुजुर्ग महिला का दर्दनाक वाकया

Digital Arrest Menace: सुप्रीम कोर्ट ने 20 अप्रैल, 2026 को देश में बढ़ते डिजिटल अरेस्ट (Digital Arrest) के मामलों पर गहरी चिंता व्यक्त की है।

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ के पीड़ितों से संबंधित स्वतः संज्ञान (Suo Motu) मामले की सुनवाई की। इस दौरान अटॉर्नी जनरल (AG) आर. वेंकटरमणी ने कोर्ट को बताया कि सरकार इस दिशा में बहुत तेजी से काम कर रही है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने इन घोटालों की गंभीरता पर टिप्पणी करते हुए इसे “चौंकाने वाला” बताया कि समाज के उच्च-शिक्षित लोग भी इन अपराधियों के जाल में फंस रहे हैं।

CJI की चिंता: पूरी रिटायरमेंट जमापूंजी लुट गई

  • सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने एक ऐसी बुजुर्ग महिला का जिक्र किया जिन्हें वह व्यक्तिगत रूप से जानते हैं।
  • मामला: अपराधियों ने उस महिला को डिजिटल अरेस्ट के जरिए डराया और उनकी पूरी रिटायरमेंट जमापूंजी (Retirement Benefits) ठग ली।
  • CJI की टिप्पणी: यह बेहद चौंकाने वाला है कि अच्छे-खासे शिक्षित लोग भी इस तरह के झांसे में आकर अपनी मेहनत की कमाई गंवा रहे हैं।

डिजिटल अरेस्ट क्या है? (The Scam Model)

  • यह साइबर अपराध का एक नया और डरावना रूप है।
  • मोडस ऑपेरंडी: धोखेबाज खुद को पुलिस, सीबीआई, नारकोटिक्स विभाग या कोर्ट का अधिकारी बताकर ऑडियो/वीडियो कॉल करते हैं।
  • बंधक बनाना: वे पीड़ित को कैमरा चालू रखने और किसी से बात न करने का दबाव डालते हैं (वर्चुअल बंधक)।
  • फिरौती: कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर पीड़ितों को मोटी रकम ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया जाता है।

अब तक की अदालती कार्रवाई और निर्देश

  • सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही इस खतरे को “डकैती या लूट” करार दिया है और कई कड़े कदम उठाए हैं।
  • Standard Operating Procedure (SoP): कोर्ट ने RBI, बैंकों और दूरसंचार विभाग (DoT) को मिलकर एक SOP तैयार करने को कहा है ताकि धोखाधड़ी होते ही फंड को तुरंत फ्रीज किया जा सके।
  • AI का उपयोग: सुप्रीम कोर्ट ने RBI से सवाल किया है कि वे साइबर अपराधियों के खातों को ट्रैक करने और फ्रीज करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग क्यों नहीं कर रहे हैं।
  • मुआवजा ढांचा: RBI और DoT को डिजिटल अरेस्ट के पीड़ितों को ‘मुआवजा’ देने के लिए एक फ्रेमवर्क बनाने का निर्देश दिया गया है।
  • CBI जांच: कोर्ट ने CBI को इन मामलों की अखिल भारतीय स्तर पर एकीकृत (Unified) जांच करने का आदेश दिया है।

केस के मुख्य बिंदु (Key Highlights)

बिंदुविवरण
ठगी की राशिसुप्रीम कोर्ट के अनुसार, डिजिटल धोखाधड़ी के जरिए ₹54,000 करोड़ से अधिक की “डकैती” हुई है।
बचाव का तरीकाबैंकों को ‘टेंपरेरी डेबिट होल्ड’ (Temporary Debit Holds) लगाने के अधिकार दिए जा रहे हैं।
CBI की भूमिकादिल्ली और गुजरात सरकारों को CBI जांच के लिए तुरंत मंजूरी देने का निर्देश।
अगली सुनवाई12 मई, 2026 (SOP की अंतिम समीक्षा हेतु)।

सतर्कता ही बचाव है

चीफ जस्टिस की यह टिप्पणी एक चेतावनी है कि साइबर अपराधी केवल अनपढ़ लोगों को ही नहीं, बल्कि तकनीक की समझ रखने वाले पेशेवरों और शिक्षित नागरिकों को भी निशाना बना रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट का लक्ष्य एक ऐसा सख्त सिस्टम बनाना है जहाँ बैंक और सुरक्षा एजेंसियां अपराधी के पैसे निकालने से पहले ही एक्शन ले सकें।

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