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Justice For Victim: लक्जरी कार को हथियार की तरह इस्तेमाल किया गया…आइए समझते हैं BMW कार से वर्ली हिट-एंड-रन की कहानी

Justice For Victim: मुंबई की एक सत्र अदालत (Sessions Court) ने जज अनिल डी. सालुंखे की बेंच ने इस मामले में वाहन की भूमिका को लेकर बेहद तल्ख टिप्पणी की है।

जुलाई 2024 से जेल में बंद मिहिर शाह (पूर्व शिवसेना नेता के बेटे) ने तर्क दिया था कि उसे व्यक्तिगत और व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए कार की जरूरत है, लेकिन अदालत ने “अपराध की गंभीरता” को सर्वोपरि रखा। वर्ली हिट-एंड-रन (Worli Hit-and-Run) मामले के मुख्य आरोपी मिहिर शाह को बड़ा झटका दिया है। अदालत ने आरोपी की उस याचिका को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें उसने अपनी जब्त की गई BMW कार को वापस लौटाने की मांग की थी।

कोर्ट की सख्त टिप्पणी: ‘वाहन बना हथियार’

  • अदालत ने कार की वापसी से इनकार करते हुए जो तर्क दिए, वे इस मामले की संवेदनशीलता को दर्शाते हैं।
  • हथियार की तरह उपयोग: जज ने कहा कि प्रथम दृष्टया (Prima facie) ऐसा प्रतीत होता है कि कार का उपयोग एक “हथियार” की तरह किया गया, जिसके कारण एक महिला (कावेरी नखवा) की दुखद मृत्यु हुई।
  • साक्ष्यों से छेड़छाड़: कोर्ट ने माना कि यदि कार आरोपी को सौंप दी जाती है, तो इस बात की पूरी संभावना है कि वह भौतिक साक्ष्यों (Material Evidence) को नष्ट कर दे या वाहन का फिर से दुरुपयोग करे।
  • BNS की गंभीर धाराएं: घटना के भयानक स्वरूप को देखते हुए पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 105 (गैर-इरादतन हत्या) और 281 (लापरवाही से गाड़ी चलाना) के तहत मामला दर्ज किया है।

घटना की दर्दनाक पृष्ठभूमि (The Worli Tragedy)

  • यह मामला 7 जुलाई, 2024 की सुबह का है, जिसने पूरे देश को झकझोर दिया था।
  • 2 किमी तक घसीटा: आरोप है कि मिहिर शाह अपनी तेज रफ्तार BMW चला रहा था, जिसने प्रदीप नखवा और उनकी पत्नी कावेरी की स्कूटी को टक्कर मारी। कावेरी कार के बंपर और टायर के बीच फंस गईं और उन्हें 2 किलोमीटर तक घसीटा गया।
  • सीट बदलना: पुलिस के अनुसार, हादसे के बाद मिहिर ने चालाकी दिखाते हुए अपने ड्राइवर राजऋषि बिदावत के साथ सीट बदल ली थी।
  • फरार होने में मदद: जब गाड़ी बांद्रा में खराब हुई, तो मिहिर के पिता राजेश शाह ने कथित तौर पर उसे भागने में मदद की। मिहिर को घटना के दो दिन बाद गिरफ्तार किया गया था।

अभियोजन पक्ष (Prosecution) की दलीलें

सरकारी वकील अश्विनी रायकर ने इस अर्जी का कड़ा विरोध किया। उन्होंने तर्क दिया कि यह एक सामान्य एक्सीडेंट नहीं है, बल्कि एक जघन्य कृत्य है। कार इस पूरे मामले का सबसे अहम सबूत है। इसकी फोरेंसिक जांच और ट्रायल के दौरान इसकी स्थिति को बनाए रखना बेहद जरूरी है।

केस के मुख्य बिंदु (Key Highlights)

बिंदुविवरण
आरोपीमिहिर शाह (जुलाई 2024 से जेल में)।
कोर्ट का आदेशBMW कार वापस करने की अर्जी खारिज।
अगली सुनवाई29 अप्रैल, 2026 (आरोपों को तय करने/Framing of Charges के लिए)।
मुख्य आधारकार का उपयोग “हथियार” के रूप में होना और सबूत मिटाने का डर।
कानूनी स्थितिबॉम्बे हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट पहले ही मिहिर की जमानत याचिका खारिज कर चुके हैं।

कानून का कड़ा संदेश

सत्र अदालत का यह आदेश स्पष्ट करता है कि जब किसी वाहन का उपयोग सार्वजनिक सुरक्षा को ताक पर रखकर किसी की जान लेने के लिए किया जाता है, तो वह केवल एक ‘संपत्ति’ नहीं रह जाता, बल्कि उसे ‘अपराध का उपकरण’ माना जाता है। मिहिर शाह के लिए यह एक बड़ा झटका है क्योंकि अब उसे ट्रायल पूरा होने तक बिना अपनी लग्जरी कार के जेल में ही रहना होगा।

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