Women in Bar: सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक इतिहास में महिला प्रतिनिधित्व को लेकर एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है।
उपाध्यक्ष का पद महिला के लिए आरक्षित
सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस के. वी. विश्वनाथन की बेंच ने SCBA चुनाव सुधारों से जुड़े मामले की सुनवाई करते हुए यह ऐतिहासिक निर्देश जारी किया। कोर्ट ने आदेश दिया है कि सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) के आगामी चुनावों में उपाध्यक्ष (Vice-President) का पद विशेष रूप से महिला अधिवक्ताओं के लिए आरक्षित (Earmarked) रहेगा। सुप्रीम कोर्ट पिछले तीन वर्षों से बार एसोसिएशन में लैंगिक समानता (Gender Equality) लाने के लिए क्रमिक रूप से पदों को आरक्षित कर रहा है।
आरक्षण का ऐतिहासिक क्रम (The Reservation Timeline)
- सुप्रीम कोर्ट ने एक सोची-समझी रणनीति के तहत SCBA के महत्वपूर्ण पदों पर महिलाओं के लिए जगह बनाई है।
- 2024-2025 चुनाव: ‘कोषाध्यक्ष’ (Treasurer) का पद महिलाओं के लिए आरक्षित किया गया था।
- 2025-2026 चुनाव: ‘सचिव’ (Secretary) का पद विशेष रूप से महिला उम्मीदवारों के लिए सुरक्षित रखा गया।
- आगामी चुनाव (2026-27): अब ‘उपाध्यक्ष’ (Vice-President) का पद महिलाओं के लिए निर्धारित कर दिया गया है।
कार्यकारी समिति में एक-तिहाई का फॉर्मूला
- अदालत ने केवल शीर्ष पदों तक ही सीमित न रहकर पूरी समिति में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित की है।
- कार्यकारी समिति (Executive Committee): कुल 9 सीटों में से कम से कम 1/3 यानी 3 सीटें महिलाओं के लिए अनिवार्य हैं।
- वरिष्ठ कार्यकारी सदस्य (Senior Executive Members): कुल 6 में से कम से कम 1/3 यानी 2 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं।
- महत्वपूर्ण प्रभाव: सुप्रीम कोर्ट के इसी ‘आरक्षण फॉर्मूले’ को अब देश की अन्य बार काउंसिलों और बार संस्थाओं द्वारा भी अपनाया जा रहा है।
चुनाव का कार्यक्रम (Poll Schedule)
- बेंच ने चुनाव प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के निर्देश दिए हैं।
- 29 मई, 2026: SCBA को चुनाव समिति (Election Committee) को अधिसूचित करना होगा।
- 13 जुलाई, 2026: चुनाव समिति मतदान के विस्तृत कार्यक्रम (Schedule) की घोषणा करेगी।
मुख्य बिंदु (Key Highlights)
| विवरण | विवरण |
| आरक्षित पद | उपाध्यक्ष (Vice-President), SCBA। |
| संबंधित बेंच | जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस के. वी. विश्वनाथन। |
| उद्देश्य | बार एसोसिएशन के नेतृत्व में महिलाओं की भागीदारी और सशक्तिकरण। |
| अनुपालन | SCBA ने कोर्ट के इस सुझाव को सहर्ष स्वीकार कर लिया है। |
नेतृत्व में बदलाव की लहर
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला बार एसोसिएशनों के भीतर पुरुष प्रधान ढांचे को बदलने की दिशा में एक सशक्त कदम है। ‘उपाध्यक्ष’ जैसे प्रभावशाली पद पर महिला अधिवक्ता की मौजूदगी न केवल बार की नीतियों में बदलाव लाएगी, बल्कि जूनियर महिला वकीलों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बनेगी। यह निर्णय साबित करता है कि भारतीय न्यायपालिका अब “केवल शब्दों में नहीं, बल्कि पदों में भी” समानता लाने के लिए प्रतिबद्ध है।

