Saturday, September 19, 2026
HomeHigh CourtRehabilitation Case: श्रीनगर में विस्थापित कश्मीरी पंडितों के लिए कॉलोनी बनाने का...

Rehabilitation Case: श्रीनगर में विस्थापित कश्मीरी पंडितों के लिए कॉलोनी बनाने का 17 वर्षों से क्यों है लंबा इंतजार…मांगा गया जवाब

Rehabilitation Case: घाटी से नब्बे के दशक में विस्थापित हुए कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास और उन्हें अपनी मातृभूमि पर दोबारा बसाने की कानूनी मुहिम में एक बड़ा मोड़ आया है।

भूमि आवंटित करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट के जस्टिस शहजाद अज़ीम की एकल पीठ ने ‘डिस्प्लेस्ड कश्मीरी रेजिडेंट्स हाउसिंग कोऑपरेटिव सोसाइटी’ (Displaced Kashmiri Residents Housing Cooperative Society) द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने श्रीनगर में विस्थापित कश्मीरी पंडितों के लिए एक समर्पित आवासीय कॉलोनी स्थापित करने हेतु भूमि आवंटित करने की मांग वाली याचिका पर कड़ा संज्ञान लिया है।

शीर्ष अदालत के समक्ष किया वादा 17 वर्ष बाद भी अधूरा

अदालत ने इस मामले में जम्मू-कश्मीर के केंद्र शासित प्रदेश (UT) प्रशासन से औपचारिक जवाब तलब किया है। याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि वर्ष 2009 में तत्कालीन राज्य सरकार के मुख्य सचिव द्वारा देश की शीर्ष अदालत (Supreme Court) के समक्ष किया गया वादा आज 17 साल बाद भी प्रशासनिक फाइलों में धूल फांक रहा है।

याचिका का मुख्य विधिक आधार: संसदीय समिति की रिपोर्ट और वर्ष 2009 का वादा

विस्थापितों की सोसाइटी ने अपनी याचिका में सरकार को दो मुख्य विधिक और प्रशासनिक दस्तावेजों को तत्काल लागू और क्रियान्वित (Operationalise) करने के निर्देश देने की मांग की है।

संसदीय स्थायी समिति की 137 वीं रिपोर्ट: गृह मामलों पर संसदीय स्थायी समिति ने फरवरी 2009 में संसद में अपनी 137 वीं रिपोर्ट पेश की थी। इसमें समिति ने कश्मीरी पंडितों की घाटी में सम्मानजनक वापसी और पुनर्गठन के लिए आवास (Housing) सहित व्यापक विधिक और बुनियादी उपाय करने की मजबूत सिफारिश की थी।

सुप्रीम कोर्ट में मुख्य सचिव का हलफनामा (Commitment): साल 2009 में ही एक मामले की सुनवाई के दौरान जम्मू-कश्मीर के तत्कालीन मुख्य सचिव ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष लिखित प्रतिबद्धता जताई थी। उन्होंने विस्थापित व्यक्तियों के लिए ₹1,618.40 करोड़ के व्यापक पुनर्वास पैकेज की रूपरेखा पेश की थी। शीर्ष अदालत ने तब उम्मीद जताई थी कि सरकार आतंकवाद के पीड़ितों को बसाने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगी।

वर्तमान विवाद: PPP मॉडल और 2025 से प्रशासनिक सुस्ती

याचिकाकर्ताओं के अनुसार, वे केवल कागजी वादों पर निर्भर नहीं रहे, बल्कि उन्होंने सरकार की अपनी योजनाओं में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया:

2024 की निविदाएं (Bids): जम्मू-कश्मीर सरकार ने साल 2024 में पब्लिक-प्राइवेट-पार्टनरशिप (PPP Model) के तहत आवासीय कॉलोनियों के विकास के लिए बोलियां आमंत्रित की थीं।

एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EOI): विस्थापितों की सोसाइटी ने 2 सितंबर 2024 को 1990 के दशक के नरसंहार और पलायन के शिकार लोगों की वापसी के लिए एक समर्पित आवासीय परियोजना विकसित करने हेतु अपना ‘Expression of Interest’ (EOI) जमा किया था।

प्रशासनिक मौन: अदालत को सूचित किया गया कि जनवरी 2025 से लेकर अब तक याचिकाकर्ताओं ने भूमि आवंटन और प्रशासनिक सहायता के लिए विभिन्न सरकारी विभागों के चक्कर काटे और कई प्रतिवेदन (Representations) दिए। लेकिन, डेढ़ साल से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी सरकार ने इस पर कोई अंतिम विधिक निर्णय नहीं लिया है।

विधिक सारांश (Case Matrix)

विधिक/प्रशासनिक बिंदुविवरण एवं अदालती प्रक्रिया
याचिकाकर्ताडिस्प्लेस्ड कश्मीरी रेजिडेंट्स हाउसिंग कोऑपरेटिव सोसाइटी।
सुनवाई करने वाली पीठजस्टिस शहजाद अज़ीम (J&K और लद्दाख हाई कोर्ट)।
मुख्य मांगश्रीनगर में विस्थापित कश्मीरी पंडितों की आवासीय कॉलोनी के लिए भूमि का आवंटन।
विधिक संदर्भगृह मंत्रालय की संसदीय समिति की 2009 की रिपोर्ट और सर्वोच्च न्यायालय में 2009 का सरकारी हलफनामा।
याचिकाकर्ता के वकीलएडवोकेट सत्य आनंद सभरवाल, सिकंदर हयात और नुमान जरगर।
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Patna
scattered clouds
27 ° C
27 °
27 °
89 %
0kmh
42 %
Fri
29 °
Sat
35 °
Sun
36 °
Mon
35 °
Tue
35 °

Recent Comments