Tuesday, August 4, 2026
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Peace Over Conflict: कोर्ट-कचहरी सिर्फ समय की बर्बादी है…80 की उम्र में कानूनी जंग पर सुप्रीम कोर्ट ने परिवार को दिखाया आईना

Peace Over Conflict: सुप्रीम कोर्ट जस्टिस जे. बी. पारदीवाला और जस्टिस विजय बिश्नोई की बेंच ने सोना ग्रुप (Sona Group) के पारिवारिक विवाद की सुनवाई करते हुए एक अत्यंत मानवीय और व्यावहारिक टिप्पणी की है।

बुजुर्ग वादी रानी कपूर और उनकी बहू प्रिया कपूर के बीच चल रही कानूनी जंग

बुजुर्ग वादी रानी कपूर और उनकी बहू प्रिया कपूर के बीच चल रही कानूनी जंग को समाप्त करने के लिए ‘मध्यस्थता’ (Mediation) का रास्ता अपनाने की सलाह दी है। करोड़ों के व्यापारिक साम्राज्य ‘सोना ग्रुप’ की विरासत को लेकर सास और बहू के बीच चल रही यह कानूनी लड़ाई अब सुप्रीम कोर्ट की दहलीज पर है।

कोर्ट की तीखी और मार्मिक टिप्पणी

  • सुनवाई शुरू होते ही बेंच ने रानी कपूर की उम्र का हवाला देते हुए वकीलों से सवाल किए।
  • उम्र का तकाजा: “आप सभी क्यों लड़ रहे हैं? आपके मुवक्किल (Client) के लिए यह लड़ने की उम्र नहीं है… एक बार ‘A से Z’ तक के सभी मुद्दों के लिए मध्यस्थता (Mediation) पर विचार करें। वरना, यह सब बर्बादी है।”
  • बुजुर्गों के लिए सलाह: कोर्ट ने विशेष रूप से रानी कपूर की ओर इशारा करते हुए कहा, “आप 80 वर्ष की हैं। यह उम्र लड़ाई-झगड़े की नहीं है।”

विवाद की जड़: रानी कपूर फैमिली ट्रस्ट

  • यह पूरा मामला धोखे और नियंत्रण के आरोपों के इर्द-गिर्द घूमता है।
  • रानी कपूर का आरोप: 2017 में स्ट्रोक आने के बाद वे शारीरिक रूप से कमजोर हो गई थीं। उनके दिवंगत बेटे संजय कपूर और बहू प्रिया कपूर ने कथित तौर पर उनसे सादे कागजों पर हस्ताक्षर करा लिए और उनकी संपत्ति को एक ट्रस्ट में ट्रांसफर कर दिया।
  • संजय कपूर की मृत्यु के बाद: पिछले साल जून में बेटे की मृत्यु के बाद, रानी कपूर का दावा है कि प्रिया कपूर ने पूरे ग्रुप और संपत्ति पर कब्जा कर लिया है, जिससे वे (रानी कपूर) बेसहारा हो गई हैं।

कोर्ट में दिग्गजों की दलीलें

  • मामले की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि देश के नामी वकील इसमें पैरवी कर रहे हैं।
  • रानी कपूर की ओर से: वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान और माधवी दीवान ने तर्क दिया कि रानी कपूर के पास अब कुछ नहीं बचा है और उन्हें तत्काल अंतरिम सुरक्षा (Interim Protection) की आवश्यकता है।
  • पोते-पोतियों की ओर से: वरिष्ठ अधिवक्ता नवीन पाहवा ने कहा कि बच्चों को भी संपत्ति से बाहर रखा गया है।

मध्यस्थता (Mediation) क्यों जरूरी है?

  • सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कानूनी प्रक्रिया लंबी और बोझिल हो सकती है।
  • शांतिपूर्ण समाधान: कोर्ट ने कहा कि सभी पक्षों के हित में यही होगा कि वे शांतिपूर्ण और न्यायसंगत तरीके से विवाद सुलझाएं।
  • अंतिम प्रयास: बेंच ने कहा कि यदि आवश्यक हुआ तो हम मेरिट पर सुनवाई करेंगे, लेकिन पहले हम मध्यस्थता के लिए प्रयास करना चाहते हैं।

केस के मुख्य बिंदु (Key Highlights)

बिंदुविवरण
मुख्य पक्षरानी कपूर (सास) बनाम प्रिया कपूर (बहू)।
विवादित इकाईसोना ग्रुप (Sona Group) की कंपनियां और फैमिली ट्रस्ट।
सुप्रीम कोर्ट बेंचजस्टिस जे. बी. पारदीवाला और जस्टिस विजय बिश्नोई।
अगली सुनवाईअगले सप्ताह (कोर्ट मध्यस्थता की प्रगति देखेगा)।
प्रमुख चिंता80 वर्षीय वादी का स्वास्थ्य और मानसिक शांति।

कानून से ऊपर परिवार

सुप्रीम कोर्ट का यह रुख याद दिलाता है कि कानून केवल अधिकारों के बंटवारे के लिए नहीं है, बल्कि रिश्तों की गरिमा बनाए रखने के लिए भी है। एक 80 वर्षीय बुजुर्ग के लिए वर्षों तक चलने वाली अदालती कार्यवाही किसी सजा से कम नहीं है। अब देखना यह होगा कि क्या दोनों पक्ष कोर्ट की इस भावुक अपील का सम्मान करते हुए बातचीत की मेज पर आते हैं या नहीं।

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