Thursday, November 5, 2026
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Johnnie Walker Case: 20 साल पुराना मामला, अब फंसी गर्दन!…कार्ति चिदंबरम पर सीबीआई का शिकंजा; जस्टिस शर्मा ने सुनवाई से किया इनकार

Johnnie Walker Case: दिल्ली हाई कोर्ट की जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम की उस याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग (Recuse) कर लिया है।

जस्टिस शर्मा, जो सांसदों और विधायकों (MPs/MLAs) से जुड़े आपराधिक मामलों की सुनवाई के लिए नामित हैं, ने बिना कोई विशेष कारण बताए इस मामले से हटने का फैसला किया। आरोप है कि कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने शराब कंपनी डियाजियो (Diageo) और सिकोइया कैपिटल (Sequoia Capital) से जुड़े “संदिग्ध” फंड ट्रांसफर मामले में CBI द्वारा दर्ज FIR को रद्द करने की मांग की थी।

जस्टिस शर्मा का ‘Recusal’ और उसका संदर्भ

  • अचानक फैसला: जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने कार्ति चिदंबरम और ‘एडवांटेज स्ट्रैटेजिक कंसल्टिंग’ (ASCPL) की याचिकाओं पर सुनवाई से इनकार करते हुए कहा कि अब इसे किसी दूसरी बेंच के सामने सूचीबद्ध किया जाए।
  • पिछला संदर्भ: दिलचस्प बात यह है कि इसी जस्टिस शर्मा ने हाल ही में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के उत्पाद शुल्क नीति (Excise Policy) मामले में खुद को सुनवाई से अलग करने के अनुरोध को खारिज कर दिया था। लेकिन कार्ति चिदंबरम के मामले में उन्होंने खुद ही हटने का फैसला किया।
  • अगली सुनवाई: अब यह मामला 21 जुलाई, 2026 को नई बेंच के सामने पेश होगा।

मामला क्या है? (The CBI Allegations)

CBI ने 1 जनवरी, 2025 को कार्ति चिदंबरम और अन्य के खिलाफ FIR दर्ज की थी। इसके पीछे मुख्य रूप से दो बड़े आरोप हैं।

A. ‘जॉन वॉकर’ व्हिस्की और डियाजियो (The Diageo Connection)

  • प्रतिबंध: 2005 में ITDC ने भारत में डियाजियो ग्रुप के ड्यूटी-फ्री उत्पादों (जैसे जॉन वॉकर व्हिस्की) की बिक्री पर रोक लगा दी थी, जिससे कंपनी को भारी नुकसान हो रहा था।
  • आरोप: CBI का दावा है कि डियाजियो स्कॉटलैंड ने इस प्रतिबंध को हटवाने के लिए कार्ति चिदंबरम से संपर्क किया और इसके बदले में उनकी कंपनी ASCPL को कथित तौर पर 15,000 अमेरिकी डॉलर का भुगतान किया गया।

B. सिकोइया कैपिटल और FIPB (The Sequoia Connection)

  • FDI निवेश: सिकोइया कैपिटल (मॉरीशस) ने 2008 में ‘प्लैटिनम पावर वेल्थ एडवाइजर’ में निवेश के लिए विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (FIPB) की मंजूरी मांगी थी।
  • आरोप: ₹9.52 करोड़ के इस FDI निवेश को कार्ति के पिता और तत्कालीन वित्त मंत्री पी. चिदंबरम द्वारा मंजूरी दी गई थी। CBI इस प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और कार्ति की भूमिका की जांच कर रही है।

एडवांटेज स्ट्रैटेजिक (ASCPL) की भूमिका

CBI के अनुसार, ASCPL वह इकाई है जिसे कार्ति चिदंबरम और उनके सहयोगी एस. भास्कररामन द्वारा नियंत्रित किया जाता था। एजेंसी का आरोप है कि विभिन्न कंपनियों से “कंसल्टेंसी” के नाम पर लिए गए पैसे असल में इसी कंपनी के माध्यम से रूट किए गए थे।

केस के मुख्य बिंदु (Key Highlights)

बिंदुविवरण
याचिकाकर्ताकार्ति चिदंबरम (सांसद, कांग्रेस) और राजेश मोहनन (ASCPL)।
जांच एजेंसीकेंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI)।
मुख्य आरोपFIPB मंजूरी और शराब प्रतिबंध हटाने के बदले अवैध फंड प्राप्त करना।
वर्तमान स्थितिबेंच बदलने के कारण अब 21 जुलाई को सुनवाई होगी।

Recusal के मायने

न्यायिक प्रक्रिया में जब कोई जज किसी मामले से खुद को अलग करता है (Recusal), तो इसका उद्देश्य निष्पक्षता सुनिश्चित करना होता है। हालांकि जस्टिस शर्मा ने कारण स्पष्ट नहीं किया है, लेकिन इससे अब कार्ति चिदंबरम की कानूनी लड़ाई में कुछ हफ्तों का विलंब हो गया है। CBI के लिए यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सीधे तौर पर FIPB की कार्यप्रणाली और सत्ता के कथित दुरुपयोग से जुड़ा है।

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