Tuesday, August 4, 2026
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Armed Forces: राष्ट्र सेवा कोई अहसान नहीं, इसके लिए आपको वेतन मिलता है… BSF जवान से यह क्यूं कहा गया, फैसला से समझें

Armed Forces: कलकत्ता हाई कोर्ट ने सीमा सुरक्षा बल (BSF) के एक कांस्टेबल की बर्खास्तगी के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया।

अदालत ने अनुशासन और राष्ट्र सेवा पर बहुत सख्त टिप्पणी की है। जस्टिस अमृता सिन्हा ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा बलों में ‘लापरवाह और गैर-जिम्मेदाराना’ रवैये के लिए कोई जगह नहीं है और बल का सदस्य होना देश पर कोई ‘एहसान’ नहीं है। यह मामला एक BSF कांस्टेबल का है जिसे बिना अनुमति के छुट्टी से ज्यादा समय तक बाहर रहने (Overstaying leave) के कारण फरवरी 2013 (रिकॉर्ड के अनुसार सेवा से बाहर रहने की अवधि 2022-23) में बर्खास्त कर दिया गया था।

कोर्ट की सख्त टिप्पणी (Service vs Favour)

  • जस्टिस अमृता सिन्हा ने याचिकाकर्ता के आचरण पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की।
  • एहसान नहीं है सेवा: “याचिकाकर्ता देश पर कोई अहसान नहीं कर रहा था; उसे दी गई सेवाओं के लिए वेतन दिया जा रहा था। बल का कोई सदस्य अपनी मर्जी से आने-जाने या अनुपस्थित रहने की उम्मीद नहीं कर सकता।”
  • जिम्मेदारी का अभाव: कोर्ट ने कहा कि बल के प्रत्येक सदस्य को जिम्मेदारी से काम करना होगा। किसी भी परिस्थिति में ‘लापरवाह और गैर-जिम्मेदाराना’ रवैये का समर्थन नहीं किया जा सकता।

आदतन अपराधी जैसा आचरण

  • कोर्ट ने याचिकाकर्ता के पिछले रिकॉर्ड को देखते हुए पाया कि वह अनुशासनहीनता का पुराना खिलाड़ी था।
  • बार-बार उल्लंघन: कम से कम पांच मौकों पर अधिकारियों ने उसकी छुट्टी को नियमित (Regularize) किया था।
  • कठोर कारावास: 105 दिनों तक अनुपस्थित रहने के लिए उसे वर्ष 2000 में 10 दिन का कठोर कारावास दिया गया था। जून 2021 में भी 108 दिनों के ओवरस्टे के लिए उसे 14 दिन की सख्त कैद काटनी पड़ी थी।
  • निष्कर्ष: कोर्ट ने माना कि याचिकाकर्ता अपने कर्तव्य के प्रति प्रतिबद्ध नहीं था और वह बल के लिए एक “बोझ” बन गया था।

अधिकारी अनंत काल तक इंतजार नहीं करेंगे

  • याचिकाकर्ता की दलील थी कि उसे अपना पक्ष रखने का मौका नहीं दिया गया और बर्खास्तगी ‘जल्दबाजी’ में की गई।
  • पर्याप्त अवसर: कोर्ट ने कहा, विभाग ने उसे ड्यूटी पर लौटने के लिए तीन नोटिस भेजे थे। यहाँ तक कि एक प्रतिनिधि को उसके घर भी भेजा गया था।
  • अनंत काल का इंतजार नहीं: “अधिकारी उसके वापस आने के लिए अनंत काल (Eternity) तक इंतजार नहीं कर सकते।” सुरक्षा बलों को सीमाओं की रक्षा और तस्करी रोकने जैसी पवित्र ड्यूटी निभानी होती है, जिसमें ढिलाई की कोई गुंजाइश नहीं है।

केस के मुख्य बिंदु (Key Highlights)

बिंदुविवरण
याचिकाकर्ताBSF कांस्टेबल (ओवरस्टे के कारण बर्खास्त)।
अदालतकलकत्ता हाई कोर्ट (जस्टिस अमृता सिन्हा)।
मुख्य कारणबिना सूचना के बार-बार ड्यूटी से गायब रहना।
कानूनी संदेशअनुशासनहीनता दिखाने वाले जवान के प्रति सहानुभूति दिखाना अन्य सदस्यों के अनुशासन को प्रभावित करता है।
परिणामयाचिका खारिज; बर्खास्तगी का आदेश सही ठहराया गया।

सुरक्षा बलों के लिए संदेश

कलकत्ता हाई कोर्ट का यह फैसला उन सभी के लिए एक कड़ा सबक है जो सुरक्षा बलों की नौकरी को “सुविधा” के रूप में देखते हैं। कोर्ट ने साफ कर दिया कि वर्दी पहनने का मतलब केवल अधिकार नहीं, बल्कि सर्वोच्च अनुशासन और जिम्मेदारी भी है। अगर किसी व्यक्ति में अपने काम के प्रति समर्पण की कमी है, तो उसे सेवा में बने रहने का कोई नैतिक या कानूनी अधिकार नहीं है।

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