Wednesday, June 17, 2026
HomeHigh CourtJoining Letter: यह शायद एक मिलियन-डॉलर का क्वेश्चन, अवमानना नोटिस की पहले...

Joining Letter: यह शायद एक मिलियन-डॉलर का क्वेश्चन, अवमानना नोटिस की पहले अवज्ञा…फिर कार्यवाही शुरू होने पर आज्ञा क्यों मांगते?, पढ़ें केस

Joining Letter: बॉम्बे हाई कोर्ट ने सरकारी अधिकारियों द्वारा अदालती आदेशों की अनदेखी करने की बढ़ती प्रवृत्ति पर कड़ा प्रहार किया है।

केस के मुख्य बिंदु (Key Highlights)

बिंदुविवरण
याचिकाकर्तासुशांत सरोदे और अनिकेत जाधव।
प्रतिवादीआर. जी. सिंह, निदेशक, SSC।
विवाद की वजहऊंचाई में 3-4 मिलीमीटर का मामूली अंतर।
कोर्ट की कार्रवाईअवमानना का नोटिस जारी होने के बाद नियुक्ति पत्र जारी।
अंतिम आदेशउम्मीदवारों की सीनियरिटी बरकरार रहेगी; केस का निपटारा।

दो उम्मीदवारों से जुड़े मामले पर अदालत की तल्ख टिप्पणी

कर्मचारी चयन आयोग (SSC) के निदेशक द्वारा माफी मांगने और दो उम्मीदवारों को नियुक्ति पत्र जारी करने के बाद, कोर्ट ने एक “मिलियन-डॉलर सवाल” पूछा-लोग पहले आदेशों की अवज्ञा क्यों करते हैं और फिर अवमानना का नोटिस मिलने के बाद पालन क्यों करते हैं? यह मामला सुशांत भाऊसाहेब सरोदे और अनिकेत सुनील जाधव नामक दो उम्मीदवारों से जुड़ा था, जिन्हें केवल 3 और 4 मिलीमीटर की ऊंचाई की मामूली कमी के कारण CISF और BSF में शामिल करने से इनकार कर दिया गया था।

मिलियन-डॉलर सवाल (The Core Remark)

  • जस्टिस रविंद्र वी. घुगे और हितेन एस. वेनेगांवकर की बेंच ने न्यायिक प्रणाली की गरिमा पर चिंता जताई।
  • विचित्र प्रवृत्ति: “हमारे मन में हमेशा यह सवाल रहता है… लोग कानून और आदेशों की अवज्ञा क्यों करते हैं और फिर अवमानना की कार्यवाही शुरू होने पर उनका पालन करते हैं? यह शायद एक ‘मिलियन-डॉलर क्वेश्चन’ है।”
  • अधिकारियों की धृष्टता: इससे पहले 24 अप्रैल को कोर्ट ने इसे एक “क्लासिक केस” बताया था, जहाँ अधिकारियों ने अदालती आदेशों (हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट दोनों) को अनदेखा करने का दुस्साहस दिखाया था।

मामला क्या था? (The 4mm Dispute)

  • विवाद: याचिकाकर्ताओं को मेडिकल टेस्ट (DME) में योग्य पाया गया था, लेकिन ऊंचाई में मामूली अंतर (3-4mm) के कारण ट्रेनिंग से बाहर रखा गया।
  • अदालती लड़ाई: उम्मीदवार हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक में जीत चुके थे, फिर भी SSC अधिकारी उन्हें नियुक्ति पत्र जारी नहीं कर रहे थे।
  • परिणाम: अवमानना (Contempt) का नोटिस मिलते ही, SSC डायरेक्टर आर. जी. सिंह व्यक्तिगत रूप से पेश हुए और बिना शर्त माफी मांगी। उन्होंने कोर्ट को बताया कि नियुक्ति पत्र भेज दिए गए हैं।

उम्मीदवारों के हक में बड़ा फैसला

  • कोर्ट ने न केवल उनकी अवमानना को खत्म किया, बल्कि उम्मीदवारों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए सख्त निर्देश दिए।
  • सीनियरिटी की सुरक्षा: उम्मीदवारों की वरिष्ठता (Seniority) उनके मूल बैच के अनुसार ही मानी जाएगी।
  • पूर्ण प्रशिक्षण: उन्हें 12 और 28 मई से शुरू होने वाले ट्रेनिंग प्रोग्राम में शामिल किया जाएगा और किसी भी स्तर पर उनके प्रशिक्षण में कटौती नहीं की जाएगी।
  • समान अवसर: उन्हें उनके बैच के अन्य उम्मीदवारों की तरह ही सभी लाभ और सुविधाएं मिलेंगी।

प्रशासन के लिए एक आईना

बॉम्बे हाई कोर्ट की यह टिप्पणी उन सभी सरकारी अधिकारियों के लिए एक कड़ा संदेश है जो अदालती फैसलों को “सुझाव” मानकर टालते रहते हैं। कोर्ट ने साफ कर दिया कि न्यायपालिका की गरिमा केवल कागजों पर नहीं, बल्कि उसके आदेशों के त्वरित पालन में निहित है। हर साल अधिकारियों के खिलाफ दर्ज होने वाली सैकड़ों अवमानना याचिकाएं इसी ‘देरी करने की मानसिकता’ का परिणाम हैं, जिसे अब कोर्ट सहन करने के मूड में नहीं है।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Patna
clear sky
39.7 ° C
39.7 °
39.7 °
19 %
3.3kmh
3 %
Wed
39 °
Thu
43 °
Fri
45 °
Sat
45 °
Sun
45 °

Recent Comments