Sanctioned Strength: भारत सरकार ने देश की शीर्ष अदालत में बढ़ते मुकदमों के बोझ और लंबित मामलों (Pendency) को कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 16 मई 2026 को एक अध्यादेश (Ordinance) जारी कर सुप्रीम कोर्ट के जजों की स्वीकृत संख्या (Sanctioned Strength) को 34 से बढ़ाकर 38 (मुख्य न्यायाधीश सहित) कर दिया है।
सुप्रीम कोर्ट में अब होंगे मुख्य न्यायाधीश सहित 38 जज: राष्ट्रपति ने जारी किया ऐतिहासिक अध्यादेश (Ordinance)
अध्यादेश के जरिए कानून में बदलाव (The Amendment)
- मूल कानून में संशोधन: इस अध्यादेश के माध्यम से ‘सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) अधिनियम, 1956’ की धारा 2 में संशोधन किया गया है। इसमें जजों की संख्या को “तैंतीस” (33) से बदलकर “सैंतीस” (37) कर दिया गया है।
- नया समीकरण: अब सर्वोच्च न्यायालय में 1 मुख्य न्यायाधीश (CJI) और 37 अन्य न्यायाधीश होंगे, जिससे कुल संख्या 38 हो जाएगी। इससे पहले कोर्ट में CJI सहित कुल 34 जजों की संख्या स्वीकृत थी।
- संवैधानिक शक्ति: राष्ट्रपति ने यह अध्यादेश संविधान के अनुच्छेद 123 (Article 123) के तहत जारी किया है। यह अनुच्छेद राष्ट्रपति को तब अध्यादेश जारी करने की असाधारण शक्ति देता है जब संसद का सत्र (Parliament Session) न चल रहा हो।
- कैबिनेट की मंजूरी: इस अध्यादेश को जारी करने से पहले केंद्रीय कैबिनेट ने 5 मई 2026 को जजों की संख्या बढ़ाने के इस प्रस्ताव को अपनी मंजूरी दी थी।
जजों की नियुक्ति कैसे होगी?
जजों की संख्या में बढ़ोतरी से सुप्रीम कोर्ट में 4 नए पद सृजित (Create) होंगे। हालांकि, इन पदों पर जजों की नियुक्ति की प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं हुआ है। इन सीटों पर जजों की नियुक्ति स्थापित कोलेजियम प्रणाली (Collegium System) के माध्यम से ही की जाएगी, जिसके तहत सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ जजों का पैनल सरकार को नामों की सिफारिश भेजेगा।
सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या का इतिहास (1950 से 2026 तक)
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 124(1) के तहत मूल रूप से संसद को कानून बनाकर जजों की संख्या तय करने का अधिकार दिया गया है। मूल संविधान के अनुसार, शुरुआत में जजों की संख्या बहुत कम थी, जो समय के साथ इस प्रकार बढ़ती गई।
| वर्ष | स्वीकृत जजों की संख्या (CJI सहित) |
| 1950 (स्थापना) | 8 (1 CJI + 7 अन्य न्यायाधीश) |
| 1956 | 11 |
| 1960 | 14 |
| 1977 | 18 (नोट: 1979 के अंत तक कैबिनेट ने इसे 15 तक सीमित रखा था, जिसे बाद में तत्कालीन CJI के अनुरोध पर हटाया गया) |
| 1986 | 26 |
| 2009 | 31 |
| 2019 | 34 |
| 2026 (वर्तमान) | 38 (1 CJI + 37 अन्य न्यायाधीश) |
न्याय प्रणाली पर प्रभाव
सुप्रीम कोर्ट में आखिरी बार जजों की संख्या 2019 में 31 से बढ़ाकर 34 की गई थी। पिछले 7 सालों में मुकदमों की संख्या में भारी इजाफा हुआ है। जजों की संख्या 38 होने से शीर्ष अदालत में अधिक संवैधानिक पीठों (Constitutional Benches) का गठन हो सकेगा और महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई में तेजी आएगी।

