Tuesday, October 6, 2026
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Adultery Case: पति को नौकरी में कम छुट्‌टी मिलती है…फिर भी पत्नी व्यभिचार है, इसे लेकर सीधे शारीरिक संबंध के सबूत जरूरी नहीं; पढ़ें फैसला

Adultery Case: मद्रास हाईकोर्ट ने वैवाहिक विवादों और तलाक के मामलों को लेकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण कानूनी सिद्धांत प्रतिपादित किया है।

परिस्थितियों और पक्षों के व्यवहार के आधार पर निषकर्ष

हाईकोर्ट के जस्टिस सीवी कार्तिकेयन और जस्टिस के राजशेखर की खंडपीठ ने कहा कि एडल्ट्री स्वभाव से ही एक गुप्त कृत्य है, इसलिए परिस्थितियों और पक्षों के व्यवहार (Circumstantial Evidence) के आधार पर इसका तार्किक निष्कर्ष निकाला जा सकता है। कोर्ट ने व्यवस्था दी है कि वैवाहिक विवादों में व्यभिचार (Adultery/विवाहेतर संबंध) को साबित करने के लिए यौन संबंध (Sexual Intercourse) के सीधे या प्रत्यक्ष प्रमाण (Direct Evidence) की आवश्यकता नहीं है।

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CRPF में कार्यरत पत्नी का किसी अन्य व्यक्ति से संबंध का आरोप

यह मामला एक पति द्वारा दायर अपील पर आधारित था, जो केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) में कार्यरत है। उसने अपनी पत्नी पर किसी अन्य व्यक्ति के साथ अवैध संबंध होने का आरोप लगाते हुए हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13(1)(i) के तहत तलाक की मांग की थी। इससे पहले, फैमिली कोर्ट ने यह कहते हुए तलाक देने से इनकार कर दिया था कि दोनों के बीच शारीरिक संबंध का कोई प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं है। हाई कोर्ट ने फैमिली कोर्ट के इस दृष्टिकोण को पूरी तरह खारिज कर दिया।

हाई कोर्ट का मुख्य कानूनी दृष्टिकोण (Impossible Standards of Proof)

  • मामले में उच्च न्यायालय ने साक्ष्य के कड़े और असंभव मानकों पर टिप्पणी की।
  • गोपनीयता का कृत्य: कोर्ट ने नोट किया, “यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि व्यभिचार अपने आप में गोपनीयता में किया जाने वाला कृत्य है। इस मुद्दे पर या यौन संबंध का कोई भी प्रत्यक्ष प्रमाण प्रस्तुत करना अत्यंत कठिन है।”
  • कानून असंभव की मांग नहीं करता: अदालत ने स्पष्ट किया कि कानून सबूतों के ऐसे मानकों की मांग नहीं करता जिन्हें हासिल करना नामुमकिन हो। समग्र परिस्थितियों और सुसंगत साक्ष्यों से निकाले गए उचित निष्कर्ष एडल्ट्री को साबित करने के लिए पर्याप्त हैं।

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कोर्ट ने किन साक्ष्यों को माना पर्याप्त? (The Circumstantial Evidence)

  • हाई कोर्ट ने फैमिली कोर्ट के फैसले को पलटते हुए पति द्वारा प्रस्तुत निम्नलिखित परिस्थितियों और सबूतों को वैध माना।
  • सार्वजनिक निकटता (Public Proximity): गवाहों ने गवाही दी कि उन्होंने पत्नी और उसके कथित प्रेमी (Paramour) को स्कूल और अस्पताल जैसी सार्वजनिक जगहों पर कई बार बेहद करीब देखा था। एक गवाह ने दोनों की साथ बैठी हुई तस्वीर भी पेश की थी।
  • प्रेमी की पत्नी की पुलिस शिकायत: सबसे मजबूत कोरोबोरेटिव (पुष्टि करने वाला) साक्ष्य कथित प्रेमी की अपनी पत्नी द्वारा पुलिस में दर्ज कराई गई शिकायत थी। उस महिला ने आरोप लगाया था कि उसका पति उक्त महिला (याचिकाकर्ता की पत्नी) के साथ संबंध में है, जिससे उनके अपने वैवाहिक जीवन में कलह पैदा हो रही है। हाई कोर्ट ने इस शिकायत को एक महत्वपूर्ण पुख्ता सबूत माना।
  • पति की नौकरी की प्रकृति: अदालत ने इस बात पर भी ध्यान दिया कि पति सीआरपीएफ (CRPF) में है और उसे साल में केवल कुछ ही बार छुट्टी मिलती है, जिसके कारण वह लंबे समय तक घर से दूर रहता था। कोर्ट ने माना कि पति की अनुपस्थिति में इस तरह के संबंध विकसित होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

अंतिम निर्णय: फैमिली कोर्ट का आदेश रद्द

सभी साक्ष्यों और परिस्थितियों के समग्र विश्लेषण (Overall Analysis) के बाद, खंडपीठ ने निष्कर्ष निकाला कि दोनों के बीच अवैध संबंध होने की पूरी संभावना है। इसके साथ ही, मद्रास हाई कोर्ट ने फैमिली कोर्ट के पुराने फैसले को रद्द करते हुए पति की तलाक की डिक्री को मंजूरी दे दी।

मामले का सारांश (Quick Highlights)

मुख्य कानूनी बिंदुमद्रास उच्च न्यायालय का निर्णय
माननीय न्यायाधीशजस्टिस सीवी कार्तिकेयन और जस्टिस के राजशेखर
मामले का आधारहिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13(1)(i) (व्यभिचार के आधार पर तलाक)।
महत्वपूर्ण कानूनी सिद्धांतएडल्ट्री को साबित करने के लिए केवल परिस्थितिजन्य साक्ष्य (जैसे सार्वजनिक निकटता और व्यवहार) ही पर्याप्त हैं।
अंतिम आदेशपत्नी के विवाहेतर संबंधों को प्रमाणित मानते हुए पति को तलाक की मंजूरी।

पारिवारिक मामलों में साक्ष्य कानून को व्यावहारिक बनाने का प्रयास

मद्रास हाई कोर्ट का यह फैसला पारिवारिक अदालतों के लिए एक मार्गदर्शक की तरह काम करेगा। इस आदेश ने यह साफ कर दिया है कि वैवाहिक वफादारी के मामलों में अदालतों को अत्यधिक तकनीकी या व्यावहारिक रूप से असंभव सबूतों पर अड़े रहने के बजाय, सामाजिक वास्तविकताओं, गवाहों के बयानों और मानवीय आचरण के आधार पर न्यायसंगत निर्णय लेना चाहिए।

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