Thursday, August 20, 2026
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VIP Security: अधिकारियों की सनक पर नहीं चल सकती सरकार…पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव की सुरक्षा घटना के फैसले पर टिप्पणी खबर से समझिए

VIP Security: पटना हाईकोर्ट ने पूर्णिया से लोकसभा सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव की सुरक्षा श्रेणी के मामले में एक महत्वपूर्ण फैसला दिया।

सांसद पप्पू यादव की सुरक्षा श्रेणी को घटाने के फैसले को किया रद्द

हाईकोर्ट के जस्टिस जितेंद्र कुमार की एकल पीठ ने इस कार्रवाई को पूरी तरह से मनमाना और स्थापित कानूनी प्रक्रिया के खिलाफ माना। कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकारी निर्णय कानून और उचित प्रक्रिया के अनुसार होने चाहिए, न कि राज्य के अधिकारियों की सनक और सनक (Whims and Fancies) के आधार पर। हाईकोर्ट ने वीआईपी सुरक्षा (VIP Security) और प्रशासनिक मनमानेपन पर कड़ी टिप्पणी की। कोर्ट ने बिहार सरकार द्वारा पूर्णिया से लोकसभा सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव की सुरक्षा श्रेणी को घटाने (Downgrade करने) के फैसले को रद्द कर दिया है।

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सांसद ने जान को खतरा होने की लगाई थी गुहार

पूर्णिया निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले प्रमुख राजनीतिक नेता पप्पू यादव ने अपनी जान को खतरा बताते हुए सुरक्षा बढ़ाने के लिए हाई कोर्ट का रुख किया था। उन्होंने लॉरेंस बिश्नोई गैंग और छोटू यादव गैंग जैसे आपराधिक गिरोहों से लगातार मिल रही धमकियों का हवाला दिया था। अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार, अगस्त 2025 में उनकी सुरक्षा को ‘Y’ श्रेणी से बढ़ाकर ‘Y+’ किया गया था, लेकिन ठीक एक महीने बाद, सितंबर 2025 में इसे बिना कोई ठोस कारण बताए दोबारा घटाकर ‘Y’ श्रेणी का कर दिया गया। इसी कटौती को हाई कोर्ट ने अब असंवैधानिक और अवैध ठहराया है।

हाई कोर्ट ने सुरक्षा घटाने के फैसले को क्यों माना गलत?

  • अदालत ने बिहार सरकार के फैसले की समीक्षा करते हुए प्रक्रिया में कई गंभीर कमियां और खामियां पाईं।
  • ठोस आधार और कारणों का अभाव: कोर्ट ने पाया कि पप्पू यादव की सुरक्षा कम करने के फैसले के पीछे कोई ऐसा ठोस इनपुट या सामग्री नहीं थी, जो यह दर्शाए कि उनकी जान का खतरा कम हो गया है। सरकार ने पूर्णिया के पुलिस अधीक्षक (SP) की जिस रिपोर्ट के आधार पर सुरक्षा घटाई थी, उसमें केवल यह लिखा था कि कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं की गई है। कोर्ट ने कहा कि शिकायत न होने का मतलब यह कतई नहीं है कि खतरा खत्म हो गया है।
  • कारणों को दर्ज करना कोई ‘रस्म’ नहीं: फैसले में कहा गया, “कारणों को रिकॉर्ड करना कोई खाली औपचारिकता (Empty Formality) नहीं है, बल्कि यह मनमानेपन के खिलाफ एक सुरक्षा कवच है और निर्णय लेने में पारदर्शिता, निष्पक्षता तथा जवाबदेही सुनिश्चित करता है।”
  • प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का उल्लंघन: सुरक्षा घटाने से पहले न तो पप्पू यादव का पक्ष जाना गया, न ही उन्हें इस फैसले की कोई अग्रिम सूचना या संचार (Communication) दिया गया। इसके अलावा, अन्य सुरक्षा एजेंसियों से भी इस संबंध में कोई नया इनपुट नहीं लिया गया था।

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सुरक्षा श्रेणियों में क्या होता है अंतर?

  • कोर्ट के आदेश के संदर्भ में सुरक्षा व्यवस्था को इस प्रकार समझा जा सकता है।
  • ‘Y’ श्रेणी की सुरक्षा: इसमें सीमित संख्या में सशस्त्र बल तैनात होते हैं, जिसमें आमतौर पर व्यक्तिगत सुरक्षा अधिकारियों (PSOs) सहित लगभग 8 से 11 सुरक्षा कर्मी शामिल होते हैं।
  • ‘Y+’ श्रेणी की सुरक्षा: यह ‘Y’ से उच्च स्तर की सुरक्षा श्रेणी है, जिसमें कमांडो या सुरक्षा कर्मियों की संख्या अधिक होती है और चौबीसों घंटे सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जाते हैं।

संविधान और कानून सर्वोपरि है

पटना हाई कोर्ट ने देश के लोकतांत्रिक ढांचे को याद दिलाते हुए राज्य सरकार को नसीहत दी। कहा, हमारा एक संवैधानिक लोकतंत्र है। यहाँ संविधान और उसके तहत बनाए गए कानूनों की सर्वोच्चता है। प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत (Principles of Natural Justice) और कानून की उचित प्रक्रिया हमारी कानूनी प्रणाली के अभिन्न अंग हैं… किसी भी व्यक्ति को सुनवाई का अवसर दिए बिना उसके खिलाफ कोई प्रतिकूल आदेश पारित नहीं किया जा सकता। सरकार ने तकनीकी आधार पर याचिका का विरोध करते हुए कहा था कि पप्पू यादव ने सुरक्षा घटाने के मूल आदेश को सीधे तौर पर चुनौती नहीं दी है। इस पर कोर्ट ने कहा कि तकनीकी कमियां substantive justice (मूल न्याय) को नहीं हरा सकतीं, खासकर तब जब वह आदेश याचिकाकर्ता को कभी आधिकारिक रूप से भेजा ही नहीं गया था।

मामले का सारांश (Quick Highlights)

मुख्य कानूनी बिंदुपटना उच्च न्यायालय का निर्णय
माननीय न्यायाधीशजस्टिस जितेंद्र कुमार
याचिकाकर्ताराजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव (सांसद, पूर्णिया)
विवादित आदेशसितंबर 2025 का आदेश (जिसमें सुरक्षा Y+ से घटाकर Y की गई थी)
अदालत का अंतिम निर्देशसितंबर 2025 का आदेश रद्द; पप्पू यादव की ‘Y+’ सुरक्षा तुरंत बहाल की जाए।
भविष्य के लिए आदेशबिहार सरकार खतरे का नए सिरे से आकलन करे और दोनों पक्षों को सुनकर एक सकारण आदेश (Reasoned Order) पारित करे।

सुरक्षा समीक्षाओं के लिए एक नजीर

यह फैसला यह साफ करता है कि राजनेताओं या नागरिकों की सुरक्षा कोई राजनीतिक या प्रशासनिक ‘पुरस्कार’ नहीं है जिसे अधिकारियों की मर्जी से जब चाहें घटाया या बढ़ाया जा सके। सुरक्षा का स्तर पूरी तरह से खुफिया इनपुट, वास्तविक खतरे के आकलन और पारदर्शी कानूनी प्रक्रिया पर आधारित होना चाहिए। पटना हाई कोर्ट का यह रुख भविष्य में सुरक्षा की समीक्षा करने वाली समितियों के लिए एक सख्त गाइडलाइन की तरह काम करेगा।

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