Timeline Work: बम्बई हाईकोर्ट (Bombay High Court) के नए आधुनिक भवन परिसर के निर्माण के लिए जमीन आवंटन के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है।
Suo Motu (स्वतः संज्ञान) मामले की सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस (CJI) सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने इस Suo Motu (स्वतः संज्ञान) मामले की सुनवाई करते हुए राज्य सरकार के ढीले रवैये पर सवाल उठाया और कहा कि इस तरह की प्रशासनिक देरी से पूरा प्रोजेक्ट ठप हो जाएगा। सर्वोच्च न्यायालय ने महाराष्ट्र सरकार की सुस्त कार्यप्रणाली पर गहरी नाराजगी जताते हुए शेष 10 एकड़ भूमि को सौंपने की प्रक्रिया में तेजी लाने (Expedite) का आदेश दिया है। बम्बई हाई कोर्ट की वर्तमान ऐतिहासिक इमारत लगभग 150 साल पुरानी हो चुकी है और जर्जर (Dilapidated) अवस्था में है। इसकी जगह मुंबई के बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (BKC) में एक विशाल और अत्याधुनिक न्यायिक परिसर बनाने के लिए कुल 30.16 एकड़ भूमि आवंटित की जानी है।
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सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी (Why So Much Time?)
- सुनवाई के दौरान महाराष्ट्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सरकारी वकील ज्योति चव्हाण ने कोर्ट को वर्तमान स्थिति से अवगत कराया।
- अब तक का आवंटन: कुल 30.16 एकड़ में से 20.19 एकड़ (कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार 20.15) जमीन का कब्जा बम्बई हाई कोर्ट प्रशासन को सौंपा जा चुका है।
- शेष 10 एकड़ का टाइमलाइन: सरकार ने कोर्ट को बताया कि बची हुई करीब 10 एकड़ जमीन को दो चरणों में सौंपा जाएगा— 5.27 एकड़ भूमि 31 जुलाई 2026 तक और अंतिम 4.74 एकड़ भूमि 31 दिसंबर 2026 तक हस्तांतरित की जाएगी।
इस लंबी समयसीमा (Time Gap) पर गहरी चिंता जताते हुए चीफ जस्टिस सूर्य कांत ने पूछा,”आप इतना समय क्यों ले रहे हैं? इस तरह तो पूरा प्रोजेक्ट ही ठप (Halted) हो जाएगा।” हालांकि, सरकारी वकील ने दलील दी कि यह समयसीमा शुरुआत से ही हलफनामों में तय थी और योजनाएं पहले ही स्टीयरिंग कमेटी को सौंपी जा चुकी हैं, लेकिन अदालत ने अधिकारियों को इस प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा करने के लिए अपनी पूरी ताकत लगाने का निर्देश दिया।
सभी बार एसो. को विश्वास में लेने का निर्देश (Stakeholders on Board)
प्रोजेक्ट की पारदर्शिता और सुचारू क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट की स्टीयरिंग कमेटी (परियोजना की देखरेख कर रही समिति) को एक और महत्वपूर्ण निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि कमेटी को बम्बई बार एसोसिएशन (Bombay Bar Association – BBA), अधिवक्ताओं के पश्चिमी भारत एसोसिएशन (AAWI) और अन्य सभी मान्यता प्राप्त बार संगठनों के प्रतिनिधियों को व्यक्तिगत रूप से सुनना चाहिए। ऐसा इसलिए किया जाना चाहिए ताकि इस बड़े प्रोजेक्ट को अंतिम रूप देने से पहले वकीलों और अन्य सभी मुख्य हितधारकों (Stakeholders) के सुझावों और चिंताओं को शामिल किया जा सके।
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जमीन हस्तांतरण का अब तक का इतिहास (The Phased Timeline)
- सुप्रीम कोर्ट ने बम्बई हाई कोर्ट की बदहाल बुनियादी संरचना को देखते हुए वर्ष 2024 में स्वतः संज्ञान लेकर इस मामले की निगरानी शुरू की थी। इस जमीन के ट्रांसफर की प्रक्रिया चरणों में चल रही है।
- अक्टूबर 2024: शुरुआत में 4.39 एकड़ जमीन का कब्जा सौंपा गया।
- जनवरी 2025: कुछ प्रशासनिक दिक्कतों के कारण दिसंबर 2024 की डेडलाइन चूकने के बाद, जनवरी के अंत तक 5.25 एकड़ की अगली किश्त सौंपी गई।
- अप्रैल 2025: महाराष्ट्र सरकार ने 4.09 एकड़ के ब्लॉक में से 1.94 एकड़ भूमि सौंपी, जिससे कुल आंकड़ा बढ़कर 11.58 एकड़ तक पहुंचा था।
- वर्तमान स्थिति (मई 2026): अब तक करीब 20.19 एकड़ जमीन दी जा चुकी है और मामला अंतिम 10 एकड़ पर आकर रुका है।
मामले का सारांश (Quick Highlights)
| मुख्य कानूनी बिंदु | सुप्रीम कोर्ट की वर्तमान स्थिति और निर्देश |
| माननीय न्यायाधीश | मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची |
| प्रस्तावित स्थल | बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (BKC), मुंबई (कुल 30.16 एकड़) |
| अदालत का अगला कदम | महाराष्ट्र सरकार से 1 अगस्त 2026 तक प्रगति पर विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट (Status Report) तलब। |
| मामले की अगली सुनवाई | अगस्त 2026 के पहले सप्ताह में। |
समयबद्ध निर्माण पर जोर
सुप्रीम कोर्ट का यह कड़ा रुख दर्शाता है कि न्यायपालिका देश की सबसे महत्वपूर्ण अदालतों में से एक (बम्बई हाई कोर्ट) के बुनियादी ढांचे के संकट को लेकर बेहद संवेदनशील है। बार-बार डेडलाइन बदलने और दिसंबर 2026 तक खींचने की सरकारी मंशा को टोकते हुए कोर्ट ने साफ कर दिया है कि वह बुनियादी ढांचे के मामलों में लालफीताशाही (Red-tapism) के कारण न्याय व्यवस्था के आधुनिकीकरण में किसी भी तरह की देरी को स्वीकार नहीं करेगी।

