Saturday, August 22, 2026
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Stray Dogs: एनिमल बर्थ कंट्रोल नियम (ABC Rules) …संवेदनशील संस्थानों पर आवारा कुत्तों को छोड़ने व रहने का कोई मतलब नहीं, पशुप्रेमी यह जरूर पढ़ें

Stray Dogs: सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के आतंक और सार्वजनिक सुरक्षा को लेकर एक बेहद ऐतिहासिक और दूरगामी फैसला सुनाया है।

मामले का सारांश (Quick Highlights)

मुख्य कानूनी बिंदुसर्वोच्च न्यायालय का कानूनी निष्कर्ष
माननीय न्यायाधीशजस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया
मूल अधिनियम/नियमएनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) रूल्स, 2023 और पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960
प्रतिबंधित क्षेत्रस्कूल, कॉलेज, अस्पताल, स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, एयरपोर्ट, बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन।
नियम 11(19) पर फैसला“उसी इलाके में छोड़ना” केवल सार्वजनिक सड़कों पर लागू होगा, संवेदनशील सरकारी या निजी संस्थानों के अंदर नहीं।
अंतिम आदेशसंस्थागत क्षेत्रों से आवारा कुत्तों को हटाकर शेल्टर होम में शिफ्ट करने के पुराने आदेश की पुष्टि।

आवारा कुत्तों के हमलों से जुड़े स्वतः संज्ञान मामलों की सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने देश में आवारा कुत्तों के हमलों से जुड़े स्वतः संज्ञान (Suo Motu) मामलों की सुनवाई करते हुए यह फैसला दिया। शीर्ष कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि स्कूल, अस्पताल, एयरपोर्ट और रेलवे स्टेशन जैसे संवेदनशील और नियंत्रित प्रवेश वाले (Restricted-access) संस्थागत परिसरों में आवारा कुत्तों को रहने का कोई मौलिक या पूर्ण अधिकार (Absolute Right) नहीं है।

एनिमल बर्थ कंट्रोल की व्याख्या से जुड़ा मामला

यह मामला मुख्य रूप से एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) रूल्स, 2023 की व्याख्या से जुड़ा था। पशु कल्याण संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट के 7 नवंबर 2025 के उस पुराने आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें नगर निकायों को संस्थागत क्षेत्रों से आवारा कुत्तों को हटाने और उन्हें उसी जगह वापस न छोड़ने का निर्देश दिया गया था।याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि एबीसी रूल्स का नियम 11(19) यह अनिवार्य करता है कि नसबंदी और टीकाकरण के बाद कुत्तों को उसी इलाके (Same Locality) में वापस छोड़ा जाए जहाँ से उन्हें पकड़ा गया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क को पूरी तरह खारिज कर दिया।

कोर्ट के फैसले के मुख्य बिंदु (Key Legal Principles)

  • ‘गवर्नमेंट/संस्थागत कैंपस’ और ‘गली’ में अंतर: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि एबीसी रूल्स के नियम 7(2) में ‘गवर्नमेंट या गेटेड कैंपस’ को ‘स्ट्रीट डॉग’ की परिभाषा में शामिल करना केवल एक वर्णनात्मक (Descriptive) वर्गीकरण है। यह आवारा कुत्तों के लिए कोई ऐसा कानूनी अधिकार पैदा नहीं करता जो जन सुरक्षा से ऊपर हो। ‘उसी स्थान’ की सीमित व्याख्या: अदालत ने ‘पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960’ की धारा 2(i) का हवाला देते हुए कहा कि ‘सड़क या गली’ (Street) का मतलब सार्वजनिक रास्तों और खुले स्थानों से है। इसलिए नियम 11(19) के शब्द ‘उसी स्थान या इलाके’ का दायरा केवल सार्वजनिक सड़कों तक सीमित है, इसे प्रतिबंधित या संस्थागत परिसरों पर लागू नहीं किया जा सकता।
  • संवैधानिक दायित्व (Article 21): पीठ ने कहा कि जीवन और सार्वजनिक सुरक्षा का अधिकार (अनुच्छेद 21) सर्वोपरि है। अगर नियमों की व्याख्या ऐसी की गई जिससे अधिकारियों के हाथ बंध जाएं, तो यह जन सुरक्षा के संवैधानिक ढांचे के खिलाफ होगा।

Also Read; Dog’s Watch-1: आवारा कुत्तों को हटाकर शेल्टर में रखें…कोई व्यक्ति या संस्था प्रक्रिया में बाधा डाले तो अवमानना माना जाए

संवेदनशील परिसरों में क्यों नहीं छोड़े जा सकते कुत्ते?

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में उन स्थानों को रेखांकित किया जहां आम जनता, विशेषकर कमजोर वर्ग (Vulnerable Groups) आते हैं। “शैक्षणिक संस्थान, अस्पताल, परिवहन केंद्र (Airports/Railway Stations) जैसे क्षेत्र विशिष्ट उद्देश्यों के लिए बनाए गए हैं, जहां बच्चों, मरीजों और बुजुर्गों सहित बड़ी संख्या में लोगों की सुरक्षा और स्वास्थ्य जुड़ा होता है। इन परिसरों में उच्चतम स्तर की स्वच्छता और सुरक्षा बनाए रखना अनिवार्य है। ऐसे स्थानों पर आवारा कुत्तों की निरंतर उपस्थिति को अनिवार्य मानना इन परिसरों के अस्तित्व के मूल उद्देश्य के ही विपरीत होगा।”

अब क्या होगी नई व्यवस्था?

  • सुप्रीम कोर्ट ने अपने पुराने दिशा-निर्देशों की पुष्टि करते हुए नगर निगमों और स्थानीय निकायों को कई आदेश दिए हैं।
  • परिसरों से हटाना: स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, खेल परिसर, हवाई अड्डे, बस स्टैंड (ISBT सहित) और रेलवे स्टेशनों से आवारा कुत्तों को तुरंत हटाया जाए।
  • नसबंदी और आश्रय: इन कुत्तों को पकड़कर इनका वैधानिक रूप से नसबंदी (Sterilisation) और टीकाकरण (Vaccination) किया जाए।
  • वापसी पर रोक: इन कुत्तों को वापस उन्हीं संस्थागत परिसरों में नहीं छोड़ा जाएगा। इसके बजाय, उन्हें प्रशासन द्वारा निर्धारित पशु आश्रयों (Designated Dog Shelters) में स्थानांतरित किया जाएगा।

जन सुरक्षा और पशु कल्याण में संतुलन

सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय देश भर के सार्वजनिक और शैक्षणिक संस्थानों के प्रशासनिक अधिकारियों को बड़ी राहत देगा। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि पशुओं के प्रति मानवीय दृष्टिकोण (Humane Management) रखना आवश्यक है, लेकिन इसका यह अर्थ कतई नहीं निकाला जा सकता कि इंसानों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को जोखिम में डालकर आवारा पशुओं को हर जगह रहने का असीमित अधिकार दे दिया जाए।

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