Saturday, August 22, 2026
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Work Suspension: क्या आपके काम न करने से गैंगस्टर काम करना बंद कर देंगे?”…वकीलों की हड़ताल पर इस तीखी बहस पर अधिवक्तागण ध्यान दें

Work Suspension: पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने वकीलों द्वारा अदालती काम का बहिष्कार (Strike/Work Suspension) करने की प्रवृत्ति पर बेहद तीखी और सख्त टिप्पणी की है।

हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी की डिवीजन बेंच ने बार एसोसिएशन के अध्यक्ष से सीधे सवाल किया कि इस तरह हड़ताल करना अपने मुवक्किलों (Litigants) के साथ अन्याय और पेशे का अपमान है। कोर्ट ने पूर्व बार एसोसिएशन सचिव एडवोकेट गगनदीप जम्मू पर हुए जानलेवा हमले के विरोध में वकीलों द्वारा काम रोकने के फैसले पर भारी नाराजगी जताई।

“जब तक हड़ताल वापस नहीं होगी, मैं ऑर्डर साइन नहीं करूँगा”: चीफ जस्टिस की दोटूक

  • यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब हाई कोर्ट बार एसोसिएशन ने लंच के बाद काम ठप करने (Abstain from work) का फैसला किया। इस पर चीफ जस्टिस शेल नागू बेहद हैरान और नाराज दिखे।
  • कोर्ट रूम की तीखी बहस (Key Courtroom Exchange): चीफ जस्टिस का सवाल: “अगर आप काम से दूर रहेंगे, तो क्या गैंगस्टर काम करना बंद कर देंगे? हमने इस मामले को प्राथमिकता (Out of turn) पर लिया, सुरक्षा के आदेश दिए, अपना फर्ज निभाया। क्या आप अपने मुवक्किल के प्रति अपना फर्ज निभा रहे हैं?”
  • मुवक्किलों की पीड़ा का जिक्र: चीफ जस्टिस ने कहा, “मुझे इस फैसले से गहरा धक्का लगा है। क्या आप उन मुवक्किलों की दुर्दशा की कल्पना कर सकते हैं जो कोर्ट की सुनवाई के लिए 100-200 किलोमीटर दूर से चलकर आते हैं?”
  • विरोध के दूसरे तरीके खोजें: कोर्ट ने कहा कि हड़ताल करना सबसे आसान रास्ता (Easiest way out) है। वकीलों को विरोध के अन्य गरिमामय तरीके अपनाने चाहिए।

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खुद पीड़ित वकील ने कहा- “मुझे लग रहा है जैसे मेरा ब्लैकमेल हो रहा है”

  • जब कोर्ट ने पीड़ित वकील गगनदीप जम्मू को सामने बुलाया और पूछा कि “क्या आप यह जानकर शांति से सो पाएंगे कि आपके कारण वकीलों ने काम बंद कर दिया है?”, तो कोर्ट रूम का माहौल और संवेदनशील हो गया।
  • गगनदीप जम्मू ने भावुक और कड़े शब्दों में जवाब दिया कि मैं पिछले दो रातों से सोया नहीं हूँ! काम बंद करने का फैसला बार एसोसिएशन का था, मेरा नहीं। अगर कोर्ट कोई आदेश पास नहीं करना चाहता, तो मत करे, मैं यहाँ कोई याचिका लेकर नहीं आया हूँ। मुझे ऐसा महसूस हो रहा है जैसे मेरी ही जिंदगी खतरे में होने के बावजूद मेरे मामले पर मुझे ब्लैकमेल किया जा रहा है और मुझसे इस तरह के सवाल पूछे जा रहे हैं। इसके बाद कई अन्य वकीलों ने भी कोर्ट के सामने अपनी सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं जाहिर कीं।

क्या था हमला और कोर्ट की त्वरित कार्रवाई? (The Incident & Action)

  • 18 मई 2026 की घटना: पंजाब में यात्रा के दौरान बाइक सवार अज्ञात हमलावरों ने गगनदीप जम्मू की गाड़ी पर गोलियां चलाई थीं। हालांकि वे बाल-बाल बच गए, लेकिन गोलियां उनकी गाड़ी पर लगीं।
  • FIR दर्ज: मोहाली पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 109 (हत्या का प्रयास) और आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है।
  • कोर्ट ने तुरंत दी सुरक्षा: बार एसोसिएशन के अनुरोध पर कोर्ट ने मामले को तुरंत सुनते हुए चंडीगढ़ पुलिस को आदेश दिया कि जम्मू के घर के पास PCR वैन तैनात की जाए और उन्हें 2 पर्सनल सिक्योरिटी ऑफिसर (PSO) दिए जाएं।

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कोर्ट की शर्त और भविष्य का ब्लैप्रिंट (The Outcome)

मुख्य बिंदुअदालत का रुख और आगामी रणनीति
हड़ताल की वापसीकोर्ट के सख्त रुख के बाद बार एसोसिएशन अपनी हड़ताल वापस लेने पर सहमत हो गया।
जांच की निगरानीकोर्ट इस मामले में पुलिस जांच की खुद निगरानी करेगा।
SSP की पेशीपंजाब पुलिस से जांच का स्टेटस जानने के लिए सीनियर सुप्रीटेंडेंट ऑफ पुलिस (SSP) को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया गया है।
SOP बनाने पर विचारबॉम्बे हाई कोर्ट की तरह, पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट भी वकीलों पर होने वाले हमलों से निपटने के लिए एक Standard Operating Procedure (SOP) जारी करने पर विचार कर रहा है।

सुरक्षा की मांग जायज, लेकिन हड़ताल का तरीका गलत

बार एसोसिएशन का तर्क था कि यह हमला केवल एक वकील पर नहीं, बल्कि पूरी कानूनी बिरादरी की स्वतंत्रता और निडरता पर हमला है। हालांकि, हाई कोर्ट ने स्पष्ट संदेश दे दिया है कि वकीलों की सुरक्षा सर्वोपरि है और इसके लिए कड़े कदम उठाए जाएंगे, लेकिन इसके बदले न्याय की पूरी प्रक्रिया को ठप करना और दूर-दराज से आए मुवक्किलों को परेशान करना किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।

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